00:00लॉस तो मरलब एक इंडिस्ट्री के लिए नहीं, लॉस तो इंडियन म्यूजिक के लिए लॉस है, और वो अभी की
00:08बात नहीं है, अभी आठ रशक तक हम लोगों ने उनका हमने म्यूजिक सुना है, अगर वो होती और ऐसा
00:17कुछ होता तो मैं उनसे पूछता कि शो करूं या �
00:20करना फर्म तो वो कहती है नहीं, शो मस्ट गो आन, इसलिए हमने आज का शो जो है आशा जी
00:24को डेडिकेट किया है, एक इंस्ट्रिटूशन, एक महान, जो गायका थी और गायका और हुमन, दोनों आज लॉस तो मतलब
00:44एक इंडिस्ट्री के लिए नहीं, लॉस तो इंडियन
00:46म्यूजिक के लिए लॉस है, और वो अभी की बात नहीं है, अभी आठ रशक तक हम लोगों ने उनका,
00:56हमने म्यूजिक सुना है, गाया है, उससे हम तो वो सुन-सुन के हमने म्यूजिक का एक रंग देखा है
01:03आशा जी के गायकी में, और क्या थे अब धिरे धिरे और कि कि हम
01:10सब यस रहते हैं जिंदेगी में सोचते
01:12नहीं जीवन में हम लगे रहते हैं जब कोई
01:13च्छला जाता है अचानक से
01:16तब थोड़ा टाइम मिलता है
01:17साहिद सोचने का
01:18यही है जीवन का
01:21नियमबर न की गाये की
01:23वो जैसे अदायगारी
01:25करते थे और
01:27हर तेरे का गाना जो गाने का होता है ना वर्सेटिलिटी कह रहे हैं सब लोग
01:32वर्सेटिलिटी की मतलब इस से जदा वर्सेटाइल तो कोई थाई नहीं है आशा जी जे से खजल से लेके
01:39कैबरे सॉंग्स, रॉमेंटिक सॉंग्स यह वो
01:41तो यह बहुत ही बड़ा मतलब अभी के लिए नहीं आने वाले अनादर सेंचुरी के लिए है उनका
01:49म्यूजिक तो हमारे लिए बड़े गर्व की बात है कि आज हमारे नाटक जाने पहचाने अंजाने का वर्ल्ड प्रीमेर हो
01:55रहा है
01:55मुंबई के टाटा NCPA थेटर में इनके राइटर डिरेक्टर हमारे गजंद रहीरे जी है
02:02सवरूप जी बहुत दिनों बाद स्टेज पर आ रही है वेटरून अक्टरस हैं बाकी सब हमारी अग्रास है
02:12तौन सायों ये रही है रही है वे लुकिए फ़रवर्ड तो प्रफॉमेंस है थेटर में हर 10 साल बाद मैं
02:17आप लेह करता हूं और ये प्लेए जीवन से लोगों के जुडों
02:24दीपने ही को नोगों कि अपने खुद से हैँ अपने खुद को तलाशने से है और अलसो टोधी ऩोड़े चैन
02:32थो डिडिकेट़asis ही तो डिडिकेटिटी तो अप्वोणान निधिमेसित ठाते dio रहे हैं अगर भोको रुस्ट कि अगर बर दो अई
02:43हम उनसे घ Quछ
02:53को उनकी शक्सियत को आप लोग आए हमारा इनाटक काम्याब होगा पुरा फिर हम इसको पूरे दुनिया में ले जाएंगे
03:02क्या कहने के लिए कुछ हाई नहीं जी एक इंस्ट्रिटूशन एक महान जो गायका थी और गायका और गायका और
03:18हुमन दोनों आज
03:23कि यादे ऐसी है कि मैं उनके बारे में बताता हूं कि कैसी औरत थी हो रात को डेड़ बजे
03:32काम कर रहे थे और हम लोग घर से निकले उनके उनके घर से अपना प्रभु कुझ और जैसे हम
03:41निकलने लगे देखा तो सामने से वह आ रही थी तो अरे तुम लोग यह पे मैं कहां �
03:47आपर तो हमें एहमेंद बोसले काम काम कर रहे थे हैं मुली रुको दस्मिन रुको पंदा मिंट मैं खुद जाके
03:54उसाहरत लेडी ने चिकन बनाया और चावल बनाया और हम उनको खिलाए बले यह खाओ फिर जाओ तो इस टाप
04:03की वह लेडी थी शाजी से साथ मेरा बड़ा
04:08ही संबन्द था क्योंकि मैंने मेरी जो पहली फिल्म की तिश्रदाजली उनके बेटे के साथ की थी और हैमद भोसले
04:15साथ उनके बेटे थे उस फिल्म के संगीतकार थे तो मैं रोज उनके घर जाता था आशा जी लता जी
04:20से रूज मुलाखाते होती थी और वो बड़े ही ब�
04:37जो उनको प्यार करता है मैं जानता हूं सब आज बहुत ही खाली-खाली महसूस कर रहे होंगे और लेकिन
04:44वो कहीं भी हो जैसे भी हो उपर जहां भी रहेंगी सब पे खुशियां बरसाती रहेंगी उनको और उनके गीत
04:52उनके संगीत उनके गाने हमेशा चलते रहेंगे वो �
04:56जो है जिस तरीखे से उनका रवया था सबके साथ, मेरे साथ तो बहुत ही खास था, मैं बहुत खुश्किसमत
05:04हूँ, एक हफता पहले मुझ से उन्होंने फोन पे बात की, वाटसाप पे और कहने लेगी, मैं मौरेशिस जा था,
05:11तो तुम जाकर आओ, पर आकर मिलो मुझ से, औ
05:25एक देन थी, बस पूचिया मैं, मैंने तो बहुत खरीब से देखा है, मैं तो तूर भी किया उनके साथ,
05:30बहुत सारे लोगों ने किया लेकिन, मेरे साथ बहुत खास उनका रिष्टा था और मेरी वाइफ के साथ भी, तीन
05:36दिन पहले मुझे अनुजा बता ले थी के नंद�
05:54मेरे बच्चों के लिए एक दादी समान और हम चार पुष्टों तक उनका स्ने पाया, प्यार पाया, वो मेरी छोटी
06:03पोती नुर्वी के संग तक खेली है, उसको गोर में बिठा कर, उसका गाना सुना है, कहां से शुरू करूँ
06:12मैं बता नहीं सकता, मैं कहां से बता नहीं स
06:15बता शुरू करूँ, एक पूरा पूरा जीवन जिनके साथ बिताया हो, जिनकी गोदों में खेला हो, वो आज नहीं रहीं,
06:26मेरे को फिर से एक बार महसूस होता है, कि फिर से एक बार मां खोई है मैंने, आशा जी
06:33को ये हमारा पूरा मुल्क तो सही ही, मगर पूरे विश्व
06:41में ऐसा शायद ही कोई होगा, जो उनका दिवाना ना हो, उनको आजीवन मिस करेंगे, उनकी गायन शैली की नकल
06:53करना भी नहीं सकते, अगर चाहें तो भी, उनकी एक शैली जो थी, वो बिल्कुल तुलना ही हो नहीं सकते,
07:03ऐसी थी
07:03आशा बोस्ते जी हमारे बीच में हमेशा थे, हमेशा ही रहेंगे, ऐसे मैं बहुत खुश नसीब हूँ कि उनको परसनली
07:16जानने का मुझे मौका मेंगा,
07:181996 से उनके साथ मैंने शोज किया, पूरी दुनिया भर में, और एक ऐसा, एक ऐसी विक्तित्त थी, कि आशा
07:30बोस्ते जी हैं, लेकिन एक रूम में हैं, तो फ़ले यंग्स्टर्स हो, कुछ भी हो, सब के साथ घुल मिल
07:36जाते थे, कोई इंटिमिडेशन नहीं था, और इतने सा
07:40सालों में बॉंबे के मेरे घर में दो बार गई है, तो मेरे पूरे फैमिली को, मेरी बेटीरों को, सब
07:49को, मतब इतना कुछ सिखने को मिला है, और बड़े अधुद, मतब जिन्दा दिल इंसान थे, मुझे अभी भी याद
08:01है, नाइटी सिक्स में जब पहला अमेरिका टूर
08:03था, मैंने सूट, टाई वगरा सब लेके गया था, कि दिदी के साथ गाऊंगा तो वैसा कपड़े होनी चाहिए, तो
08:11पहला दो शो उन्होंने कुछ नहीं काया, तिसे शो में बुला रही है, क्या सब बुड़े जैसे कपड़े पहन रही,
08:16तो छोड़ो, जीन्स पहनो, अच
08:32जबाब था, और आज तारिक में भी, मतब अभी उनकी तो इस तवियत खराब थी, लेकिन हमेशा रियास के साथ
08:39नहे गानों को सुनना, इसा वो में शाथ था उनकी साथ, और हमारे संगीत के संगीत के आकाश में बहुत
08:47सारे सितारे हैं, लेकिन चार ऐसे हैं, जिनको हम क्य
08:52किशुर कुमार, महम्मद रफी, लता मंगिशकर और दीदी, चारों चले गए, लेकिन इनका कोई डेथ दे नहीं होता है, हमेशा
09:02थी और हमेशा हमारे वीच में रहेंगे थी
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