00:01पाकिस्तान में हुई 21 घंटे की शांती वारता के बाद भी अमेरिका और इरान के बीच कोई समझोता नहीं हो
00:08पाया
00:08ये बाचीत बहुत एहम मानी जा रही थी क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीर थी
00:14लेकिन आखरी वक्त में बाचीत तूट गई अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये वारता पाकिस्तान में होने की
00:22वज़र से फेल हुई
00:22सुनिए विपक्ष इस पर क्या कुछ कह रहा है
00:26इसकी बज़ा अमेरिका है
00:31और सुभाविक तोर पे पाकिस्तान की भी भूमिका है
00:34लकिन उसमें जादे भूमिका अमेरिका की है
00:37सारे बिश्चु की नज़र है
00:40और ट्रंप अमेरिका निस्चित तोर पे एक महान मुलक है
00:44मगर ट्रंप एक महान राष्पती यह दि होना चाहते है
00:49तो यह सुद्व में उनको स्टेश्मेंट के तरीके से भूमिका अधा करनी चाहिए
00:53उनको नेतिन याहू का भौपू या उनका उनके निर्देशन में काम करने वारी के बजाए
01:03जो है उनको विश्वित किया है उसको देख करके काम करना चाहिए
01:07और कदम उठाने चाहिए परतिस्टा का सवाल बनाने के बजाए चीजों को कैसे रिजॉल्व हो उस पर उस पर बात
01:15करने चाहिए
01:16जबके एंडिये के नेता कह रहे हैं कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बातचीत होने का क्या मदलब था
01:22उस मुल्क की पहल से भला शांती कैसे हो सकती थी
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