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  • 4 months ago
रेड लाइट एरिया का नाम सुनते ही लोग नाक-भौं सिकोड़ने लगते हैं. यहां रहने वाली महिलाओं और उनके बच्चों को समाज में अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता, लेकिन केरल की लीला ईसो ऐसे बच्चों की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए 23 सालों से लगातार काम कर रही हैं.    करीब 24 साल पहले लीला पढ़ाई के दौरान झारखंड से नागपुर आईं, जहां रेड लाइट इलाके में यहां के बच्चों की जिंदगी को करीब से देखा. उस घटना ने उनकी जिंदगी बदल दी. वो अपने पति के साथ नागपुर में आकर बस गईं. उन्होंने शरणस्थान नामक गैर-सरकारी संस्था बनाई और तब से यहां के बच्चों की परवरिश का सिलसिला शुरू हो गया.  इन बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उन्होंने अपनी प्रॉपर्टी और गहने बेच दिए. करीब दो दशकों में इन्होंने सैकड़ों ऐसे बच्चों को प्यार-दुलार से पाला-पोसा और उन्हें अपने पैरों पर खड़े करने में मदद की. आज भी वो अपने रेजिडेंशियल हॉस्टल में 100 से ज्यादा बच्चों की जिंदगी को बेहतर बनाने में जुटी हैं. इस काम में उन्हें अब भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. 

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00:04Red Light Area
00:05Red Light Area
00:07Red Light Area
00:07It's hard to find people
00:08It's hard to find out
00:10It's hard to find out
00:12It's hard to find out
00:15But
00:15Kerala, Lila E.S.O.
00:18It's hard to find out
00:2023 years
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00:292013
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00:471,5
00:472,5
00:471,5
00:502,5
01:11।
01:50Thank you very much.
01:51is better to make them better.
01:52They have to face some of them.
02:49No one didn't come there for a good job.
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