00:00सबसे पहला सवाल जो अक्षे कुमार को लेकर सब कहते हैं कि
00:03अर्ली मॉर्लिंग सूट होता है आपको कितने वज़े पहुचना पढ़ता था सेक्ट पर
00:07अब हम लोग हमेशा जो प्रियन जी का टाइम मिले कोशिश करते हैं कि हमेशा अब 10-20 मिनट पहले
00:14ही पहुच जाए क्योंकि इसले 20 साल से ट्यूनिंग ये बनी कि अगर 10-20 मिनट लेट हो रहे हैं
00:20तो पहले टीम को कम्यूनिकेट कर देते हैं
00:23और 10-20 मिनट पहले पहुच जाएं तो इंजुआय करते हैं क्योंकि वहाँ पे वो ऐसा नहीं लगता कि हम
00:34एक्टर डिरेक्टर और ये वो प्रेक्टिकल तो है क्योंकि सिस्टम है अनुशासन है लेकिन बाकी चीजें जो भी नियम मिलते
00:45हैं वो नियम पिछले 20 साल से पूर
00:53इंडिनिक को साथ में लेकर चलते हैं और उनकी ilory dazu कोई दिक्कत नहीं है यह ड़्यासन हमe को लेकटि
01:06को लेकर न सांवार को लेए थावत आप कर दी है कि संशे किसी भी तरीके कर और यह अक्षीau
01:19जी के साथ जो आपके शूटिंग हुई है जिद्गी भी हुई है इसके फ
01:22आपने अक्षे सर के साथ
01:23काम किया है
01:24और बहुत कलाकार
01:25चाहे शाहीद हो गया
01:26चाहे और भी कोई हो गया
01:29अनर्जी मैच करने के जब बात आती है
01:31और आर्जी मैच होना
01:33जिसará आनर्जी के साथ आ आते हो
01:35कि एक बर कहीं मैं � Amit App Sir का ऐन्टोगी चुन रहा था
01:51पहला 2001 की बार, हम किसी सकम नहीं, पहला, पहली बार, जब अमिताब जी के साथ आप लोगे है, तो
01:59वही जो आपकी एनरजी है, वो किस एक्टर के साथ जादा मैच होती है, आक्षे जी के पागलपन के साथ
02:04वो मैच हो गई, हम जितने दुनिया में लोग हैं, हमारी किसी की किस
02:10के साथ एनर्जी महच नहीं होती है सबकी अपनी अपनी एनर्जी होती है और हम सबकी एनर्जी कम्यूनिकेट होती है
02:19बहती है अपनी अपनी सबकी एनर्जी होती है अगर पॉजिटिव एनर्जी बहती है तो कम्यूनिकेशन में बदल जाती है और
02:29किसी स्रेजन में बदल जात
02:31है और निगेटिव इनर्जी होती है तो उसका रिसल्ट वो मतलब थोड़े उसमें बदल जाती है तो मेरी जिंदगी में
02:40कौन ये मुकेश भाई ये बात सच है कि मेरे हर प्रोडूसर से बहुत अच्छे रिष्टे हैं लेकिन पिछले बीच
02:51साल में
02:55कि लगभग हाफ सेंचुरी फिल्म है ऐसी है जिनके मैंने आज तक प्रोडूसर भी नहीं पूछे लगभग पचास फिल्म होंगी
03:03राभू जी की प्रियन जी की और डेविड साब की
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