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  • 3 weeks ago
10वीं के बाद सब्जेक्ट चुनने के असमंजस को दूर करने के लिए काउंसलिंग का आयोजन किया जा रहा है. अंकुर जाकड़ की रिपोर्ट...

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00:08दस्मी की परिक्षा के बाद हर छात्र के मन में एक असमंजस होता है
00:13Arts, Science या Commerce कौन साफ सब्जक्ट लेना चाहिए?
00:18कौन से स्ट्रिम चुननी चाहिए?
00:20ये सवाल जितना आसान लगता है उतना होता नहीं है
00:23सही जानकारी के अभाव, दोस्तों की देखा देखी
00:27और परिवार के दबाव के बीच कई छात्र कन्फ्यूज हो जाते है
00:32ऐसे में स्कूलों में शुरू किये गए करियर कांसलिंग सत्र
00:35छात्रों के लिए रास्ता दिखाने का काम कर रहे है
00:38जहां उनकी रुची, छमता और भविश्य के लक्षों को ध्यान में रखकर
00:43सही विश्य चुनने में मदद की जा रही है
00:49क्लास टेंथ जो है वो एक आधार शिला है
00:52अब हम यह कह सकते हैं कि वो एक लाइफ लाइफ लाइन क्लास है
00:55जहां पर कि उसके पास में लेंग्वेजेज भी होती है
00:59और मैथेमडिक साइंस और सोचल साइंस जिसे महत्पण विश्य भी होते है
01:03अगर बच्चा बड़ा केलकुलस विजार वाला बच्चा है
01:06अगर उसका लोजिकल पार्ट बड़ा स्टॉंग है
01:09तो उन्हें साइंस में जाना चाहिए
01:11बड़ा बच्चा अगर कोई है कि एक्सपेरिमेंटल है
01:13जिसको यह लगता है कि
01:15डिसिजन मेकिंग पावर बड़ी स्टॉंग है
01:17तो उन्हें साइंस के साथ में बाईलेजी का उप्शन्स करना चाहिए
01:20जिन बच्चों को लगता है कि
01:22उनके अंदर एक मैनिपुलेशन वाली जो पावर है
01:25आर्टिकुलेटिव हैं
01:26चीजों को समझने, समझाने और समझ करके उन पर अगर असर डालने की अगर उनमें ताकत है
01:32तो उन्हें कॉमर्स जिसा विशेच उन्ने में कोई कोताई नी बरतनी चाहिए
01:35लेकिन जो बच्चे डिबेटेड हैं
01:44जिन बच्चे को लगता है कि येस मैं कुछ और कर सकता हूँ
01:48मेरी लिखावट मुझसे कुछ करवा सकती है
01:50ऐसे बच्चे को जो है वो हुमेनिटीज लेकर अपना करियर बनाना चाहिए
01:55दस्वी पास करने के बाद कई छात्र अपनी रुची के अनुसार विशे चुनना चाहते हैं
02:00लेकिन परिवार, रिष्टेदारों या दोस्तों के दबाव में आकर गलत फैसला ले लेते हैं
02:06यही कारण है कि बाद में पढ़ाई में मन नहीं लगता और कई बार छात्र पढ़ाई तक छोड़ देते हैं
02:12ऐसे में कांसलिंग का मकसद सिर्फ सलाह देना नहीं
02:15बलकि छात्र की छमता, रुची और सोच को समझ कर सही दिशा दिखाना है
02:24इस सेशन के दुआरा हम इनका इक कंफुजन दूर किया है
02:27कि आप रुची के अनुसर अपना सब्जेट लें और हर सब्जेक्ट अपना एक वैलू रखता है
02:32हर सब्जेक्ट में स्कोप है क्यावल मेहनत करने की जरुवत है
02:35अधिकतर विद्धार्तियों के यही हमारे कंफुजन आया
02:38कि सर मेरी एक फ्रेंड वो जा रही हो बिचुड रही है
02:40तो हमने उनको ये लक्षे निर्धार्ट किया कि वो आपकी योगिता क्या है
02:45उसकी योगिता को बताया
03:00तो बच्चा उचित निर्ड़ने लेकर अपने लक्षे को प्राप नहीं कर पाता
03:03बच्चे की रूची के उपर है कि उसका लक्ष क्या है
03:06वो लक्ष को लेकर अपने सब्जेक्ट का चैन करे
03:11वो डॉक्टर बनके भी I.E.S. बन सकता है
03:14उसके पास एक extra opportunity आ जाती है
03:49कांसलिंग सत्रों का सकरात्मक असर भी देखने को मिल रहा है
03:52कुछ चात्राएं जो असमंजस में थी
03:55उन्होंने कांसलिंग के बाद अपने भविश्य के लक्ष को ध्यान में रखते हुए
03:59स्ट्रीम चुनने का फैसला लिया
04:01खुद सुनिया
04:04पहरे तो मेरे ये के लिए हो पाया है कि
04:06मुझे इंटरस्ट तो साइंस में था
04:08पर मेरे मार्क 72.83 आयते
04:11तो मुझे लगा मेरे मार्क सकम है
04:13इसाफ़ से में साइंस में जाऊ
04:15और एक तो यह है कि
04:17मेरा गोल यह मुझे एलल भी करनी है
04:19और यह तो आर्जेस यह फिर एड़ोकेट तो मुझे बनना ही है
04:23तो इसे साबसे मुझे ने मतलब मैं मैंने समझाए भी इसमें भी कर सकते हैं
04:27इसकिल्स ज्यादा डिवलोप्मेंट आर्स में होगी क्योंकि इसमें पॉलिटिकल और इको इन सबकी जर्वत होती है
04:33तो इसलिए मेरा आर्स मैंने चूज करा भी
04:36मेरा पहले तो कन्फूजन यह था कि मुझे इंट्रेस्ट तो देखो
04:39सायंस में प्था लेकिन स्टार्टिंग से
04:54पढ़िखाव
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