00:00जन सुन वाई एक ऐसा मंच है, जहां आम जनता अपनी उम्मीदों और समस्याओं के साथ प्रशासन के सामने पहुँचती
00:06है, लेकिन जब इन ही उम्मीदों को लापरवाही से संभाला जाए, तो सवाल सिर्थ व्यवस्था पर नहीं, समवेदन शीर्ता पर
00:12भी उठता है, ऐस
00:25जन सुनवाई कारेक्रम के बाद का है, कारेक्रम समाप्थ होने के बाद जब जनता द्वारा दिये गए आवेदनों को समेता
00:31जा रहा था, तब कलेक्टर साकेत मालविया उन्हें एक ठेले में रख रहे थे, लेकिन ये आवेदन बेतर तीब और
00:37अव्यवस्थित तरीके से �
00:45लगाते हुए कहा कि ये कागज नहीं है, ये लोगों की उम्मीदे है, हमारे लिए सोने के समान है, उनके
00:51इस वाक्या ने वहां मौझूद हर व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर दिया, ये सिर्फ नाराजगी नहीं थी, बलकि प्रशासन
00:56को उसकी जिम्मेदारी का एहसास कर
00:59प्रशासन को सोने को सोने को समान हिए।
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