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अमेरिकी सेना ने ट्रंप के आदेश को ठुकराते हुए ईरान पर ग्राउंड इनवेजन से इनकार कर दिया। सेना के चीफ हटाए जाने के बाद वरिष्ठ जनरल्स ने स्पष्ट कर दिया कि बिना तैयारी के मिशन में नहीं जाएंगे। यह कदम अमेरिका की सैन्य रणनीति और प्रशासन के बीच तालमेल की कमी को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बगावत युद्ध नीति और राष्ट्रपति की विश्वसनीयता पर गंभीर असर डाल सकती है। अमेरिकी सेना ने संदेश दिया है कि वे केवल सुरक्षित और सोच-समझकर ही कार्रवाई करेंगे।

The U.S. Army has reportedly refused President Trump’s orders for a ground invasion of Iran after the sudden removal of the Army Chief. Senior generals have made it clear that they will not undertake any mission without proper planning and support. This move exposes cracks between the Trump administration and the military leadership, raising serious questions about U.S. war strategy and presidential authority. Experts warn that such defiance could affect America’s global credibility. The Army’s message is clear: actions will be taken only with careful planning to ensure troop safety and national security.

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Transcript
00:00ट्रम्प के खिलाफ अमेरिका की सेना में बगावत की खबरें सामने आ रही हैं।
00:04मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राश्ट्रपती ट्रम्प के आदेश के बावजूद अमेरिकी सेना ने इरान पर ग्राउंड इन्वेजिन करने से इनकार
00:11कर दिया है।
00:12ये निर्ने खास तोर पर उस समय सामने आया जब सेना के चीफ को अचानक हटा दिया गया।
00:16इस घटना ने अमेरिका की सेन यरण नीती और उच्छ कमांड में असंतोष की स्थिती को जागर कर दिया है।
00:22सामरिक विशेशड्यों का मानना है कि ये सिर्फ एक सामान या असहमती नहीं है बरकि सेना के वरिष्ट अधिकारियों द्वारा
00:29राष्ट पती के आदेशों को चुनौती देने का मामला है।
00:32अब अमेरिका में ये सवाल उठ रहा है कि अगर उच्छ स्थर पर ही आदेशों का पालन नहीं हो रहा
00:37तो युद्ध नीती और निर्ने प्रक्रिया कितनी प्रभावी रह सकती है।
00:40इरान पर संभावित हमला पहले से ही अमेरिकी और अंतर राष्ट्रिय स्तर पर विवादों में घिरा हुआ था।
00:46अमेरिका की ओर से ग्राउंड इन्वेजन की योजना को लेकर कई महीनों से विचार विमर्ष चल रहा था।
00:51लेकिन सेना के वरिष्ट जनरल्स ने ये सपश्ट कर दिया कि वो इस तरह के मिशन में नहीं जाएंगे।
00:56इस कदम ने टरंप प्रशासन को भी चोकन ना कर दिया है।
01:00सेन्य और राजनेतिक विशलेशक बता रहे हैं कि अमेरिका की सेना ने ये कदम सोच समझ कर उठाया है।
01:05उनके अनुसार अगर बिना परियाप तैयारी और समर्थन के इरान में जमीन पर हमला किया गया तो ये अमेरिकी सेना
01:11के लिए भारी नुकसान का कारण बन सकता था।
01:13इसके अलावा इस फैसले से टरंप की साक पर भी बड़ा असर पढ़ सकता है।
01:17राश्ट्रपती की विदेश नीती और सेन रण नीती दोनों ही सवालों के घेरे में आ गए हैं।
01:22इस घटना ने अमेरिका के आंतरिक राजनेतिक परिद्रश्य को भी हिला कर रख दिया है।
01:26कॉंग्रेस और मीडिया में युद्ध नीती, राश्ट्रपती के आदेशों की वैधता और सेना के फैसले पर तीखी बहस हो रही
01:32है।
01:32कई विशेशग्यों का कहना है कि ये बगावत अमेरिका के लिए गंभीर चेतावनी है।
01:37कि अगर प्रशासन और सैन्य नेत्रित्व में तालमेल नहीं रहा तो संकट गहरा सकता है।
01:42पेंटागान और वाइट हाउस में इस्थिती ने तनाव बढ़ा दिया है।
01:45वरिष्ट सैन्य अधिखारियों का कहना है कि उनके निर्णय का मकसद सेना और राष्ट की सुरक्षा को प्रात्मिकता देना था।
01:51उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि उनके इनकार का मतलब ट्रम के खिलाफ प्रत्यक्ष बगावत नहीं है बलकि रणनेतिक सोच
01:57के आधार पर कदम उठाए गया है।
01:58अमेरिका और इरान के बीच पहले से ही बढ़ते तनाव को देखते हुए ये घटना दोनों देशों के लिए खत्रे
02:04की घंटी है।
02:05यदि अमेरिका की सेना में ही आदेशों का पालन नहीं होता तो युद्ध की स्थिती में निर्ने लेने की क्षमता
02:10प्रभावित हो सकती है।
02:35इस तरह की स्थिती में राष्ट्रपती ट्रम के लिए आंतरिक और बाहरी दबाव दोनों ही बढ़ गए है।
03:05इस बगावत की खबर में पूरी दुनिया में अमेरिकी सेन्य नित्रित्व और राष्ट्रपती की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिये
03:11हैं।
03:12कर दिये हैं।
03:19झालोब धर बाहरUNG प्यूंद अप्डावत की आंतरिक प्डावत अंतरिकृ की बडावत की तूस्सराइड अच्वस्ता ट्वर्ट्रपती आंतरिक तो चूसें।
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