00:00अनि राष्टर वागी अन्जे दादा अन्जी कोंट इस्ते पी सामनारां से बाविश्याद राजयपक विली मोना राए असा भाकित संजे रावदान
00:06ने जे वक्त होए केला तेंचे तबीतिस कारणाश्यक्त के तिनला सुपन पढ़ला सावाग अशा प्रकार चा उठल्या ह
00:18हाम अन्जी संपर्क अन्य खुनी राजकी पक्ष्याषि नहीं बाजयपक अन्यट्रोच मुरत बश्यार वित्वर्यास्यकत कारणाश्यक्त कर लोदा अशानाश्यक्त कर दाए अन्ये
00:42आगछगेवली मोना करते लुभ पक्ष्या माल्वाबशे जिर्व पक्ष्याव सुना
00:48करते हैं पन ती आशे वक्त अग्ता वे का कर दसी आइन अपना शूंग अधित न इक तुन जा तबवित
00:55अपर ना मना किवा कदाचित शोपन पड़िया अना करते हैं कि मादल्या का अवित खृप अधित खृप वरी नश्टिया मुडमी
01:03नाश्यक ला यू शकलो नी असमी का
01:06जानलों बगगित लटते तो पर नवासल का दाची।
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