00:00हनुमान जी के अनन्य भक्त और चमतकारी संतनीम करोली बाबा का अस्थी कलश पिछले तिरपन वर्षों से भोपाल में सुरक्षित
00:06रखा गया है।
00:07ये कलश उनके बड़े पुत्र अनैक सिंग के परिवार के पास संरक्षित है, जो भोपाल में ही रहते हैं।
00:13बाबा ने 11 सितंबर 1973 को वरिंदावन में अनन्त चतुरदशी के दिन देह त्याग की, उनकी अस्थियों को ग्यारा पवित्र
00:20नदियों में विसरजित किया गया।
00:22लेकिन एक भाग पुत्र भोपाल ले आए, जिसे आज तक संभाल कर रखा गया है।
00:27आज तक से विशेश बातचीत में बाबा के पोते डॉक्टर धननजे शर्मा ने बताया कि बाबा का भोपाल से विशेश
00:32लगाव था।
00:33साल 1970 में वे अरेरा कॉलोनी स्थित उनके घर पर करीब 10 दिन ठहरे थे और शहर के विभिन इलाकों
00:39का दोरा किया।
00:40बाबा ने उन्हें हनुमान जी की विशेश प्रतिमा भेट की थी, जिसकी वे रोज पूजा करते हैं।
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