00:00तेलेकॉम सेक्टर में एक बार फिर वही पुराना डर लोटता हुआ नजर आ रहा है जिसने कुछ साल पहले तेलेकॉम
00:07कमपनियों की नीव हिला दी थी
00:09क्या फिर से महंगे रिचार्च होने वाले हैं? धीमा 5G और कमपनियों पर कर्स का बोज बढ़ने वाला है
00:15यही बड़ा सवाल अब हर मोबाइल यूजर के मन में है एक बार फिर से आपके टारिफ प्लान जोर महंगे
00:22होने वाले है क्या चलिए
00:24क्यूं यह सवाल लोगों के मन में आ रहा है इसको थोड़ा सा डीकोड करने की कोशिश करते हैं
00:48अब रिपोर्ट्स की माने तो एर्टेल पर करीब 5,000 करोड रुपे और टार टेले सर्विसेज पर 4,000 करोड
00:54से ज्यादा का भुकतान बनता है
00:56जिसे तेस हमें सीमा के अंदर चुकाना होगा
00:59ब्याज और पैनल्टी जोडने पर ये रकम और भी ज्यादा बढ़ सकती है
01:03अब यहां समझना ये जरूरी है कि आखिर AGR विवाद है क्या
01:08देखे रूल्स के मताबिक नियमों के मताबिक टेलेकॉम कंपनियों को अपनी कमाई का एक हिस्सा
01:13सरकार को लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रूम चार्ज के रूप में देना होता है
01:18लेकिन विवाद इस बात पर हुआ कि क्या इस कमाई में सिर्फ टेलेकॉम सर्विसस जैसे
01:23कॉल और डेटा शामिल होंगे या फिर रेंट, डिविडेंट और असेट सेल जैसी
01:29नौन चलेकॉम इंकम भी, सरकार का कहना था कि कुल कमाई पर हिस्सा देना होगा
01:33जबकि कम्पनिया इस से असेहमत नजर आ रहे है
01:36मामला आखिर कार सुप्रीम कोट ओफ इंडिया पहुचा
01:39जहां कोट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुना दिया
01:42इस फैसले के बाद कम्पनियों पर भारी भर कम बकाया निकल कर आया
01:47और टेलेकॉम सेक्टर में आ गया फूचाल
01:49अब ताजा घटना क्रम में एक बार फिर वही दबाव कम्पनियों पर लोटता दिख रहा है
01:54सरकार पहले ही कम्पनी के बकाय को फ्रीज कर चुकी है
02:02और उसे लॉंग टर्म में किष्टों में भुपतान की छूट दे दी गई
02:06साथ ही उसकी देनदारी भी दोबारा समीक्षा के अंदर है
02:10यानि की एक बार फिर से उसकी स्टूटनी की जा रही है
02:13जितना भी उसका लेंडिंग देनदारी बच रही है
02:16आप आने वाले समय में उसका बोज और कम जरूर हो सकता है
02:19यानि वी आई के लिए वोटफोन आइडिया के लिए यहाँ पर सीधी-सीधी रहात
02:23लेकिन एर टेल और टाटे टेले सर्विसस को फिलहाल ऐसी कोई रहत मिलती दिखाई तो नहीं दे गई
02:29इस पूरे घटना क्रम का सीधा असर आम यूजर्स पर पढ़ सकता है
02:34इसलिए हमारे और आपके लिए यह खबर और भी जाता सरूरी हो जाती है
02:37लेकिन जब भी कम्पनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है तो उसकी भरपाई अकसर कस्टमर्स से की जाती है
02:42हमने पहले भी देखा था जब अचानक से सभी टेलेकॉम कम्पनियों ने चार्जर्स पढ़ाए थे
02:49अब आने वाले समय में मोबाईल रिचार्ज प्लांस 10 से 15 प्रतिशत तक और महंगे होने की उम्मीद है
02:55यानि आपके जेब पर सीधा असर पढ़ना टेम आना चारा है
02:59सिर्फ यही नई 5G एक्सपांशन की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है
03:04यह अटल पहले ही देशपर में 5G नेटवर्क के एक्सपांशन पर भारी निवेश कर रही है
03:09लेकिन अगर कंपनी का बड़ा हिस्सा बकाया चुकाने में चला गया
03:13तो नए टावर लगाने के लिए और नेटवर्क को सुधारने की पूरी प्रोसेस धीमी पढ़ सकती है
03:19इसका मतलब है कि आपको बहतर स्पीड और कवरेज के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है
03:25वहीं टाटर टेले सर्विसस के लिए ये सिचुएशन और भी ज़्यादा चनौती पूर्ण हो सकते है
03:30क्योंकि कंपनी अब मुक्य रूप से एंटरप्राइस सेग्मेंट में काम करती है
03:34और उसका मोबाइल ओपरेशन काफी लिमिटेट है
03:37ऐसे में इतना बड़ा भुकतान उसके फिनांशल स्टेटस पर दबाब डालेगा
03:41तो कुल मिलाकर टेलिकॉम सेक्टर एक बार फिर अनसर्टिनिटी की दौर में खड़ा हो गया
03:46सरकार को अपना राजस चाहिए, रेविन्यू चाहिए, कंपनियों को राहत चाहिए
03:50और यूजर्स को सस्ती और बहतर सर्विसस चाहिए
03:54अगर यह बैलन्स नहीं बन पाया, तो आने वाले महीनों में महंगे प्लान, धीमा विस्तार और बढ़ता फिनांशल दबाफ तीनों
04:01एक साथ देखने को मिल सकते हैं
04:03तो आप बताईए जरा कॉमेंट सेक्शन में, आप तयार हैं एक बार फिर से रिचार्ज उस महेंगे होने के लिए
04:08जेप पर सीधी मार पड़ेगी
04:09क्या कहना है आपका कॉमेंट जरूर करिएगा, देखते रिये गूर्ट रूटाट्स
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