00:00बारिश से भरे आस्मान के नीचे हजरत मूसा एक लंबी यात्रा पर थे। अचानक बादल गर्जे और मूसलाधार बारिश शुरू
00:09हो गई। वे एक पेड के नीचे रुके। तब ही उन्हें एक नर्म रहस्यमई आवास सुनाई दी। सामने की जोपरी
00:17का दर्वाजा बंद
00:18कर दो। अंदर एक बेफिकर इनसान गहरी नीद में था। मूसा ने चुपचाब दर्वाजा बंद किया। उन्होंने पूछा क्या ये
00:27मुझसे बहतर है। जवाब आया नहीं। पर अगर एक बूंद गिरती तो वो मुझे पुकारता और मैं उसे माफ कर
00:35देता।
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