00:00Living Relationship में रहना कोई अपराद नहीं है, फिर चाहे आप शादी सुदा ही क्यों नहीं?
00:06इलाहाबाद High Court ने इससे जुड़ा हुआ एक फैसला सुनाया है, जिसके बार सामाजी किस तर पर इसको लेकर चर्चाय
00:11शुरू हो गई है.
00:12पताते चलें इससे पहले भी इलाहाबाद High Court ही नहीं, Supreme Court ने भी इससे जुड़े हुए फैसले सुनाये हैं,
00:18और ये इसपस्ट हो गया है कि Living Relationship में रहना कोई अपराद नहीं है.
00:22इलाहाबाद High Court ने एक बार फिर से इस सर्चा को छेड़ दिया है क्योंकि उसने अपने फैसले में कहा
00:27कि Living Relationship में रहने वाले विक्ती अपराद ही नहीं कहलाएंगे, भले ही वो शादी शुदा क्यों ना हो.
00:33शाजहापुर के एक मामले की सुनवाई करते हुए जहां कोट ने पती और उसके साथी को सुरक्षा प्रदान करने का
00:40निर्देश दिये हैं, तो वहीं दूसरी और इस पस्ट तोर पर कहा है कि Living Relationship में अगर कोई पती
00:45पतनी किसी गैर मर्द के साथ या गैर महिला के साथ रहत
01:03हैं, अगर अदालती तोर पर देखें तो ठीक है, लेकिन इससे क्या हो रहा है, समाज का ताना बाना सब
01:09खतब हो रहा है, यह वैवाही गड़बंदन जो वैस्ताय दी गई थी, समाज की जो धरम के छेट में जो
01:17लोग जुड़े हुए, जैस आदिसक्रा चार जी थे हमारे �
01:21धरम गुरु हुआ करते थे, या मुस्लिम धरम गुरु हैं, उन्होंने उनक्या भी निकाह का प्रोसेस है, तो यह सब
01:27निकाह खतम, साधी खतम चाहिए जो जो जिसको चाहिए पकड़ा के जहरा है, दर दिन मौत किया, उसके बाद फिर
01:33वही लेके ठाने में आ जाती, कि मेर
01:51परिवार के अधिकारों को आपने समाद कर दिया, अगर आपने दो अडेल को परमीसे तो दे दी, लेकिन जो उसके
01:58माता, पिता ने उनको पाला, पोसा, उसके लिए कस्त है, वो वहस्ता को खतम कर दिया समाद को, तो अडालतों
02:05को यह भी सोचना चाहिए, कि एक तरफ दो ज
02:18चलेगा ना कि moral policing, कोट ने बड़ा formally hold किया है कि जब दो consulting adults अपनी मर्जी से
02:25साथ रहना चाहते हैं, तो उनके personal relationship को अपराधिक नहीं माना जा सकता और उनको punish नहीं किया जा
02:32सकता, सिद इसले कि वो societal expectations से match नहीं करता है, या उन में से कोई already शादी शुदा
02:38है, इस judgment का गलत तर
02:48law के हिसाब से crime है ही नहीं, तो उस पर criminal action नहीं हो सकता, और ये principle पहले
02:55ही Supreme Court ने Joseph Stein के case में settle कर दिया है, साथ ही ये भी equally important है
03:01कि marriage जैसी जो संस्ता है वो बिल्कुल protected है, क्योंकि अगर कोई साधी में रहते हुए, दूसरी शादी, दूसरे
03:10living relationship में रह रह रहा है, तो और भी जो options
03:12है, divorce, maintenance, ये पूरी तरह से available है, और साथी एक case में, जो शैली का case था, उसमें
03:18Supreme Court ने साफ कहा है, कि third party interference पे civil liability तक आ सकती है, सबसे crucial aspect
03:25ये है कि इस case में couple को honor based violence का real threat था, और court ने अपनी constitutional
03:32duty को निभाते हुए, article 21 के under, और life और personal liberty को protect किया है, इसलिए judgment marriage
03:39को weekend बिल्कुल नहीं करता
03:41बलकि ये ensure करता है, कि हमारे देश में law prevail करेगा, ना कि society की subjective morality ना कि
03:59society की subjective morality
04:11समाजिक ताना गुना है, और जिसे इसकी बहुत ही ज्यादा में भर्चना करती हो, और totally गलत है ये
04:17समाज में खराब और गलत संदेश चाहेगा, को इसलिए कि suppose करिए ये जानवर संस्क्रिती हो गई न, कोई किसी
04:26के साथ भी रह रह रहा है, किसी को यापत्ती नहीं है, जो कि समाज में एक समाजिक लेक्ती की
04:31तौर तरीके से रहेगा, किसी की पत्नी किसी के साथ रहे, किसी क
04:34I am not sure what the situation is.
04:37I am not sure what the situation is.
04:38But I do not need to be able to do this.
04:40This is a bad situation.
04:43We will not be able to do this.
04:46We will not be able to do this.
04:46Video journalist Vijay with me,
04:48Mr. ETV, Bharat, Lakhnau.
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