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Prins Murchale
#PMLines
#PrinsMurchale
#poetry
Transcript
00:00तूने देखा है कभी एक नज़र, साम के बाद, कितने चुपचाप से लगते हैं सज़र, साम के बाद, तू है
00:11सूरज, तुझे मालूम कहां रात का दुख, तू किसी रोज मेरे घर में उतर,
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