00:00दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर में आखिर किसकी प्रतिमा स्थापित है?
00:03ये 108 फीट उची प्रतिमा श्री नील कंठ वर्णी की है
00:07श्री नील कंठ वर्णी भगवन स्वामी नारायन का ही एक नाम है
00:10जब वे किशोर उम्र में तपस्या कर रहे थे
00:13श्री नील कंठ वर्णी की ये प्रतिमा उसी योग मुद्रा में है जिसमें वे नेपाल के मुक्तिनाथ में लंबी तपस्या
00:19के दौरां स्थिर रहे थे
00:20ये प्रतिमा उनकी उस पवित्र तीर्थ यात्रा और कठोर साधना की याद दिलाती है
00:24भगवान स्वामिना रायन का जन्म 1781 इस्वी में यूपी में गोंडा जिले में हुआ उनका बचपन छपिया और अयोध्या में
00:32बीता
00:32उनके माता पिता ने उनका नाम घंश्याम रखा था
00:3529 जून 1792 को मातर 11 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और वैराग्य की ओर बढ़ गए
00:41इसी दोरान उन्होंने नीलकंठ वर्णी नाम धारण किया
00:44इसके बाद वे लंबी पद यात्रा पर निकल पड़े
00:46साथ साल की पैदल यात्रा में उन्होंने सभी तीर्थों के दर्शन करते हुए
00:51लगभग 12,000 किलोमीटर की दूरी तै की
00:53इस दोरान उन्होंने भारत समेत नेपाल, तिबबत, भूटान और बांगलादेश की भी यात्रा की थी
00:59उन्होंने जीवन और अध्यात्म के मूल तत्वों पर प्रकाश डाला और असंख्य लोगों को मोक्ष के मार्ग की दिशा दिखाई
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