00:17नाथव द्वारा में शीव प्रतीमा के बाद अब हनुमान जी की एक भव्य प्रतीमा वनने जारी है
00:22श्रिनाजी के यहां पर द्वार पर और यह वास्तव में एक नया इतियास नाथव द्वारा में रचा जा रहा है
00:29आखिर यही परिकल्पना केसे जहन में आई और इस जो हनुमान जी की प्रतीमा को जो बनाने के मुख्यर सुत्रदार
00:36रहे हैं
00:37वो अभी हमारे साथ में हैं उन से पूरा जानने का प्रियास करते हैं कि आखिर इसा जो यह नाथव
00:42द्वारा में एक नया इतियास जो रतने जा रहा है
00:44इसको लेकर भी क्या कहते हैं क्या सोचते हैं
00:47सर एक आपका सुब नाम
00:50मेरा नाम है गिरीश रतिलाल शाह
00:53कांसे हैं आप
00:54मैं बंबाई से हूँ
00:57नाथव द्वारा में गिर्याज प्रतिमा यह जो परवत हैं
01:00यहां पर यह जो हनुमान जी की भविय प्रतिमा जो परिकल्पना जो साकार हुई हैं
01:05कैसे देखते हैं कैसे आपके जहन में यह आया
01:09लेकिसे सबसे पहली बात दुए हैं कि ठाकोर जी की कृपा ठाकोर जी की प्रेहना से
01:18मुझे यह भाव जागरत हुआ
01:21कि प्रवु निकुंजनायक के परमभक्त प्रवुशी हनुमान जी की भविय प्रतिमा बनाई जाए
01:38आपको तो पता होगा कि जब ठाकोर जी जती पुरास हैं नाद्वरा पधारे थे
01:46तो उनके साथ प्रवु शुजी और प्रवु हनुमान जी रख्षत करूप में साथ में आये थे
01:56अशिए भाव से मेरी यह अंतर की इख्या थी कि यहाँ पर भव्य प्रतिमा हनुमान जी की बने
02:09और मैंने ये बिंटी पुझे मिशाल बाव साथ को की अगस 2022 में
02:20उन्होंने मुझे बता है कि मैं आपकी बात आपका निवेदन आपकी इच्छा हुजूर के पास रखूँगा
02:32और कुछी दिनों में एक महिने के समय में हुजूर की आगना आगे
02:41और बस मुझे जीवन का ये अमूल ये सेवा करने का मौका मिला
02:46और वो प्रयास में में लग्या
02:51अगस्थ 2022 से सुरी हुई ये यात्रा
02:56और इप्रिल महिने में हन्मान जैन की 2023 को
03:03बावसाप के कर कमलों से हमने भूमी पुजन कायवजन किया
03:10वो तब से बस आज तक निरंतर प्रयास चालू है
03:18और बस यहां पर आते हैं उसके लिए एक तो सीडियों के जरिये वहां
03:26प्रतिमा तक पहुंच सकते हैं दूसरा लिफ्ट का भी यहां पर सुईदा लिफ्ट की सुईदा आप देख सकते हैं
03:33हम उसी केबिन में बैठे हैं और यह बिवस्ता जो है वो बुरद बजर्ग और जो असाय हैं जिनको चलने
03:50की तकलीफ हैं
03:51उनके लिए यह बिवस्ता बनाई गई है युवानों के लिए सीडि से जाने का मारग है शीडि से जाने के
04:01लिए करीब मेरे जैसे को
04:04एक सत्रा से बीस मिनिट लगती है और मैं मानता हूं कि आज के युवान जो है वो दस से
04:11तेरा मिनिट में उपर सीडियों से पूर्च जाएंगे
04:17हमारी यह इच्छा है कि महारास्री को हम सबसे प्रथम यह केबल कार में उपर दर्शन के लिए ले जाएं
04:30बड़े समय के बाद वो गिरी राजपरवत पे बिराजमान होंगे
04:37मुझे लगता है कि करीब पत्ती साल पहले महारास्री उपर आयो होंगे
04:44तो उनके लिए यह बहुत ही अच्छा एक अनुभव होगा जो उनकी पिछली यादों को
04:55मुक्य प्रतिमा के बारे में अगर थोड़ा सा कितनी बड़ी प्रतिमा है और उसके बारे में थोड़ा सा होता है
05:01यह प्रतिमा जो है एक सो इतिस फुट की है और जो पांसो फुट की उच्छाए पर बनाई गई है
05:08प्रभु श्री हनमान ये कि यह विश्व में सबसे बड़ी प्रतिमा होगी जो गिरिराज परवत पे पांसो फुट की उच्छाए
05:20पर बनाई गई है
05:22When we started this prayer, we had never thought that this will become the greatest, the most high-treatment.
05:33Knowing you, 631 feet of height, the Lord Shri Hanuman Ji is the height of 631 feet of height.
06:02That is why we can place this prayer.
06:03We believe that this prayer was very difficult, but all the work that Thakur Ji has done.
06:12That is true.
06:14That is true.
06:14We believe that I was a good person, but all the work that Thakur Ji has done.
06:17बोलेनाद बिराजे हैं दूसरी तरफ गिराज प्रवत्पा हनुमान जी और यहाँ पर जो श्रिनाद जी के दर्सन के लिए देश
06:22बर से दुनिया से जो लोग आते हैं उनको अब ये नाथो द्वरा में एक नया जो इतियास नचने जा
06:29रहा है ये एक अद्वुद उन्हें अ
06:46जो मैं क्या बता हूँ कि जो सच्चा भक्त है हनुमान जी का इस वरूप को दर्शन करते ही ऐसा
06:54तुप्त हो जाएगा कि उसकी कोई हम कलपना नहीं कर सकते हैं उसके लिए कोई शब्द नहीं है और ये
07:02भाव है और ठाकुर जी के भाव जो है हमारे हम भक्तों के भाव मेरा
07:09जक्तिगत में ये भाव जो था वो ठाकुर जी के स्वरूप में आप देख सकते हैं इतना सुन्दर स्वरूप आपको
07:16हनुमान जी का बस देखने मिलने जा रहा है उसका पूरा अनन्द लीजिए पूरा अनन्द लीजिए
07:25बहुत बहुत दन्यवाद आपने देखा किस तरह से नाथुद्वारा में ये अद्बुद जो हनुमान जी की प्रतिमा है आपने दावा
07:33किया है कि विश्व में सबसे उचाई पर जो बनी ये अनुमान जी की प्रतिमा है और निश्चित तोर पर
07:40नाथुद्वारा में श्र
07:48Raja Saman.
Comments