00:00पावन शुक्लपक्ष की एकादशी जिसे आमला की एकादशी के नाम से जाना जाता है इसे आमला एकादशी और रंग भरी
00:06एकादशी भी कहा जाता है आज की इस पावन प्रस्तूती में हम आपको सुनाएंगे आमला की एकादशी की दिव्वे और
00:12चमतकारी कथा तो आईए म
00:14foreign
00:44और उत्सम मनाने का निश्चे किया राजा, रानी और समस्त नागरिक नदी तटपरस्तित एक विशाल आमले के विक्ष के पास
00:52पूजा कले एक अत्रित हुए
00:53उसी राज जंगल में रहने वाला एक शिकारी जो जीवन यापन के लिए पश्यों का शिकार करता था, पानी की
00:59खोज में वहाँ आ पहुचा, वह अत्यन थका हुआ और भूखा था
01:03अंजाने में वह उसी आमले के विक्ष के नीचे बैठ गया, जहां भक्त जन पूजा और जागरन कर रहे थे
01:09उसे विधी विधान का ग्यान नहीं था, फिर भी वह पूरी राज जाकता रहा और बिना कुछ खाए पिये वही
01:15ठैरा रहा
01:16इस प्रकार उससे अंजाने में ही आमलकी एकादेशी का वरत और जागरन हो गया
01:20कुछ समय बाद जब उसकी मृत्य हुई तो यमराज के दूद उसे उसके पापों के कारण नर्क ले जाने के
01:27लिए आये
01:27उसी समय भगवान विश्नु के दूद भी वहां पहुँचे और उसे वैकुंट ले जाने लगे
01:32दोनों पक्षों में विवाद उत्पन हुआ
01:34जब ये विशे भगवान विश्नु के समक्ष रखा गया तब उन्होंने कहा
01:38यद्धपी शिकारी ने जीवन भर पाप कर्म किये
01:41परन्तु उसने अंजाने में ही पवित्र आमले के विरिक्ष के समीप
01:45जागरण और उपवास करके आमलकी एकादेशी का पालन किया है
01:49इस एक पुन्य कर्म ने उसके समस्त पापों का नाश कर दिया
01:52अत्हाव वे वैकुन्द धाम में निवास करने योग्य है
01:55इस प्रकार शिकारी को मोक्ष की प्राप्ती हुई
01:57और दिव्यरत द्वारा उसे वैकुन्द धाम निवास करने योग्य है
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