00:00सिन सत्रासो के दौर में एक पुर्सकून सफर एक खौफनाख लेकिन समंदर की गहराई में एक खतरनाक राज जाग चुका
00:10था
00:12अचानक एक दीव हेकल अक्टॉप्स ने जहाज पर हमला कर दिया
00:22तकडी का जहाज इस ताकत के सामने तूपने लगा हर तरफ तबाही थी
00:28आज चंद लम्हों में सब कुछ खतम हो गया मगर एक उमीद बाकी थी
00:38जब सूरज निकला समंदर खामोश था मगर एक इनसान
00:45मगर मैं अभी जिन्दा हूँ
00:51रसी को मस्बूदी से पक्रौप राग्
00:57अभरे थी जिकला हूँ
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