Skip to playerSkip to main content
  • 4 days ago
YouTube_विज्ञापन_कैसे_दिखाता_है

Category

📚
Learning
Transcript
00:00कभी सोचा है कि यूट्यूब को ये कैसे पता चल जाता है कि किसे कौन सा आड दिखाना है।
00:05चलिए, आज इसी के पीछे की पूरी कहानी समझते हैं और जानते हैं कि परदे के पीछे ये सब काम
00:12कैसे करता है।
00:13अकसर हम सब के साथ ऐसा होता है ना, हम कुछ देख रहे होते हैं और अचानक एक ऐसा आड
00:19आता है जो इतना रिलेटेबल लगता है कि थोड़ा अजीब भी लगता है।
00:22तो सवाल यही है कि ये होता कैसे है।
00:26तो इसका सारा खेल है परस्नलाइजड आड्स का।
00:30ये कोई हवा में तीर नहीं है, बलकि ये विज्यापन किसी की दिल्चस्पी और ओनलाइन अक्टिविटी के आधार पर खास
00:39तौर पर उनके लिए ही चुने जाते हैं।
00:42मिसाल के तौर पर सोचिए अगर कोई टेक्स से जुड़े विडियोज देख रहा है, तो यूट्यूब को ये सिगनल मिलता
00:48है कि उससे नए गाजट्स में दिल्चस्पी होगी, इसी लिए उसे वैसी ही आड्स दिखाए जाते हैं।
00:53बिल्कुल सीधा सा हिसाब है।
00:54तो फिर सवाल यूटता है कि आखिर यूट्यूब को ये सब पता कैसे चलता है। देखे, जब भी कोई अपने
01:02गूगल अकाउंट से साइन इन होता है, तो वो अपने पीछे एक डिजिटल फुट्प्रिंट छोड़ता जाता है, और यूट्यूब बस
01:08उसी निशान का इस्
01:23कौन-कौन सी वेबसाइट पर जाया जा रहा है, अरे, लोकेशन, उम्र, जेंडर, और हाँ, यूट्यूब पर किये गए लाइक्स
01:29और कॉमेंट्स भी इसमें शामिल हैं, ये सब मिलकर एक डिजिटल प्रोफाइल तयार करते हैं, और ये खेल सिर्फ यूट्यूब
01:36तक ही न
01:51करता है, तो यूट्यूब उस जानकारी का इस्तमाल करके उसे यूट्यूब आप के अंदर ही ओनलाइन डील्स के विज्यापन दिखा
01:58सकता है, लेकिन एक मिनिट, तब क्या होता है, जब कोई अपने अकाउंट में लॉग इन ही ना हो, क्या
02:04तब भी विज्यापन दिखते ह
02:05हाँ, बिलकुल दिखते हैं, लेकिन उनका तरीका थोड़ा अलग होता है, देखिये दोनों में जमीन आसमान का फर्क है, जब
02:13कोई साइन इन होता है, तो यूट्यूब के पास उसकी पूरी ओनलाइन हिस्ट्री होती है, लेकिन साइन ना होने पर
02:20विज्यापन सिर्फ उस व
02:33विज्यापन दिखेंगे, ऐसा इसलिए है क्योंकि विज्यापन विडियो के टॉपिक से जुड़े होते हैं, देखने वाले की परसनल जानकारी से
02:41नहीं, इसी को contextual advertising कहते हैं, तो क्या हम इन विज्यापनों को कंट्रोल कर सकते हैं, जवाब है हाँ,
02:49बिलकुल कर सकते हैं, औ
02:50और अच्छी बात ये है कि इसका control काफी हद तक हमारे ही हाथ में होता है, इसे control करने
02:56के तीन बहुत ही आसान तरीके हैं, पहला, आप Google Ad Settings में जाकर अपनी पसंद के topics को बदल
03:03सकते हैं या हटा सकते हैं, दूसरा, अगर कोई ad पसंद नहीं आ रहा, तो उसे तुरंद ब्लॉक
03:08कर दें, और तीसरा, अगर कोई ad आपको घलत या अनुचित लगे, तो उसकी report जरूर करें, लेकिन अगर कोई
03:15चाहता है कि विज्यापन दिखे ही न, पूरी तरहां से बंद हो जाए, तो क्या इसका भी कोई रास्ता है,
03:21जी हाँ, एक रास्ता है, अगर कोई चाहता है कि वि
03:38और इमेल से अपने आप भर सकते हैं, ताकि प्रोसेस और भी तेज हो जाए, ये सब डेटा इंटिग्रेशन का
03:44ही कमाल है, तो चलिए, फटा-फट से सारी जरूरी बाते एक बार फिर से दोहरा लेते हैं, यूट्यूब के
03:49विज्यापन हमारे ओनलाइन व्यवहार के आधार
03:51पर दिखाये जाते हैं, खासकर तब जब हम साइन इन होते हैं, अच्छी बात ये है कि हमारे पास इन
03:57सेटिंग्स को कंट्रोल करने का पूरा अधिकार है, लेकिन अगर विज्यापन मुक्त एक्सपीरिंस चाहिए, तो उसके लिए पैसे देने होंगे,
04:04और ये सब कुछ हमे
04:05एक बहुत बड़े और जरूरी सवाल पर लाकर खड़ा कर देता है, क्या मुफ्त कॉंटेंट का मजा लेने के लिए
04:11अपने डेटा के साथ ही समझोता करना जरूरी है, इस पर जरूर सोचेगा
Comments

Recommended