00:03चैत्र नवरात्रे की शुरुवात हो चुकी है और इन नौ दिनों में मादुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की
00:09जाती है
00:09चैत्र नवरात्रे के दूसरे दिन मा ब्रह्मचार्णी की पूजा और उपासना होती है
00:14मादुर्गा के नौ शक्तियों में देवी ब्रह्मचार्णी का दूसरा स्वरूप है
00:19ब्रह्मचार्णी दो शब्दों से मिलकर बना है
00:22ब्रह्मा का मतलब घोर तपस्या से और शारणी का अर्थ होता है आचरण
00:27यानि माता का दूसरा स्वरूप तब का आचरन करने से होता है
00:32ऐसे में चली आपको बताते हैं मातुर्गा के दूसरी शक्ति ब्रह्मचाणने की पावनकता के बारे में
00:38दरसब देवी दुर्गा का ये रूप पुर्ण जोतिर्मय और अत्यंत भव्य है
00:43इस देवी के दाएं हाथ में जब की माला है और बाएं हाथ में ये कमंडल धारन किये है
00:49पूर्व जनम में इस देवी ने हिमाले के घर पुत्री रूप में जनम लिया था
01:07एक हजार साल पहले तक इन्होंने केवल फल फूल खाकर बिताए और सो वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक
01:15पर निर्वा किया
01:16कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कस्ट सहे
01:233000 साल तक तोटे हुए बेल पत्र खाय और भगवान शंकर के अरादना करती रही
01:29इसके बाद तो उन्होंने सूखे बेल पत्र खाना भी छोड़ दिये
01:32कई हजारों साल तक निर्जल और निराहार रहकर तपस्या करती रही
01:37पत्तो को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपड़ना नाम पड़ गया था
01:42कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम छिन हो गया
01:47देवता, रिशी, सिद्धगर, मुनि सभी ने ब्रह्मचारने के तपस्या को अभीत पूर्ण पूर्ण ने कृत्ते बताया
01:55सरहाना की और कहा ये देवी आज तक किसी ने इस तरह कठोर तपस्या नहीं की
02:00ये तुम ही हो जिसने ये संभव किया है
02:03तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौले शिवजी तुम्हें अपने पती रूप में प्राप्त होंगे
02:10अब तपस्या छोड़कर घर लोड़ जाओ
02:12जल्दी तुम्हारे पिता तुम्हें पुलाने आ रहे है
02:15इस देवी की कथा का सार ये है कि जीवन के कठिन शंगर्सों में भी मन विशलित नहीं होना चाहिए
02:23माब्रमचार्णी देवी के कृपा से सर्वसिधी प्राप्त होती है
02:27नवरातरी के दूछरे दिन देवी के इसी सोरूप की उपासना की जाती है
02:31उमीद करती हूँ आपको जानकारी पसंद आई होगी
02:34फिलाल मारे इस वीडियो में तना ही वीडियो को लाइक शेर और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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