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Chaitra Navratri 2026: आज चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्राचारिणी की पूजा-उपासना होती है। मां दुर्गा के नौ शक्तियों में देवी ब्रह्राचारिणी का दूसरा स्वरूप है। ब्रह्राचारिणी दो शब्दों से मिलकर बना है। 'ब्रह्रा' का मतलब घोर तपस्या से है और ' चारिणी' का अर्थ होता है आचरण से। यानी माता का दूसरा स्वरूप तप का आचरण करने से होता है। ऐसे में चलिए बताते हैं कि मां दुर्गा की दूसरी शक्ति ब्रह्मचारिणी की कथा.

Chaitra Navratri 2026: Today marks the second day of Chaitra Navratri. On the second day of Navratri, Goddess Brahmacharini is worshipped and revered. Goddess Brahmacharini represents the second manifestation among the nine divine powers of Mother Durga. The name 'Brahmacharini' is derived from the combination of two words: 'Brahma,' which signifies intense penance or austerity, and 'Charini,' which denotes conduct or practice. Thus, this second form of the Mother embodies the practice of penance. In this spirit, let us share with you the legend of Brahmacharini—the second divine power of Mother Durga.

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~PR.114~HT.408~ED.120~

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00:03चैत्र नवरात्रे की शुरुवात हो चुकी है और इन नौ दिनों में मादुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की
00:09जाती है
00:09चैत्र नवरात्रे के दूसरे दिन मा ब्रह्मचार्णी की पूजा और उपासना होती है
00:14मादुर्गा के नौ शक्तियों में देवी ब्रह्मचार्णी का दूसरा स्वरूप है
00:19ब्रह्मचार्णी दो शब्दों से मिलकर बना है
00:22ब्रह्मा का मतलब घोर तपस्या से और शारणी का अर्थ होता है आचरण
00:27यानि माता का दूसरा स्वरूप तब का आचरन करने से होता है
00:32ऐसे में चली आपको बताते हैं मातुर्गा के दूसरी शक्ति ब्रह्मचाणने की पावनकता के बारे में
00:38दरसब देवी दुर्गा का ये रूप पुर्ण जोतिर्मय और अत्यंत भव्य है
00:43इस देवी के दाएं हाथ में जब की माला है और बाएं हाथ में ये कमंडल धारन किये है
00:49पूर्व जनम में इस देवी ने हिमाले के घर पुत्री रूप में जनम लिया था
01:07एक हजार साल पहले तक इन्होंने केवल फल फूल खाकर बिताए और सो वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक
01:15पर निर्वा किया
01:16कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कस्ट सहे
01:233000 साल तक तोटे हुए बेल पत्र खाय और भगवान शंकर के अरादना करती रही
01:29इसके बाद तो उन्होंने सूखे बेल पत्र खाना भी छोड़ दिये
01:32कई हजारों साल तक निर्जल और निराहार रहकर तपस्या करती रही
01:37पत्तो को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपड़ना नाम पड़ गया था
01:42कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम छिन हो गया
01:47देवता, रिशी, सिद्धगर, मुनि सभी ने ब्रह्मचारने के तपस्या को अभीत पूर्ण पूर्ण ने कृत्ते बताया
01:55सरहाना की और कहा ये देवी आज तक किसी ने इस तरह कठोर तपस्या नहीं की
02:00ये तुम ही हो जिसने ये संभव किया है
02:03तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौले शिवजी तुम्हें अपने पती रूप में प्राप्त होंगे
02:10अब तपस्या छोड़कर घर लोड़ जाओ
02:12जल्दी तुम्हारे पिता तुम्हें पुलाने आ रहे है
02:15इस देवी की कथा का सार ये है कि जीवन के कठिन शंगर्सों में भी मन विशलित नहीं होना चाहिए
02:23माब्रमचार्णी देवी के कृपा से सर्वसिधी प्राप्त होती है
02:27नवरातरी के दूछरे दिन देवी के इसी सोरूप की उपासना की जाती है
02:31उमीद करती हूँ आपको जानकारी पसंद आई होगी
02:34फिलाल मारे इस वीडियो में तना ही वीडियो को लाइक शेर और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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