00:00क्या दिल्ली पुलिस अप्रण का भी धंदा करने लगी है?
00:02ये सवाल क्यों यह है? इसलिए क्योंकि दिल्ली पुलिस के जवान दो दिन में अलग अलग जगे से
00:07छात्र और मज़़ूर संग्ठनों के दस एक्टिविस्ट को अचाना को ठालेती है
00:11और उनकी कोई जानकारी नहीं देती है
00:14परिचित परिजन परिशान होते हैं दिल्ली हाई कोट का दरवाजा खटकाटाते हैं
00:18हैबियस कॉर्पस यानि बंदी पुलिस पुलिस आनन फानन में शनिवार राथी इन सब को रिहा कर देती है
00:36मामला समझी बहुत गंभीर है
00:38एक अधिकार समू कैंपेइन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन यानि C.A.S.R. ने आरूप लगाया कि
00:44दस छात्र और मजदूर समाजिक अधिकार एक्टिविस्ट को दिल्ली पुलिस में दो दिन के भीतर उठा लिया है
01:38तो रात रिहाई ये साबित करती है कि उनकी हिरासत कानूनी नहीं थी
01:45आवैद थी
01:46वकीलों का रोब था कि हिरासत में रखे गए लोगों को बिना वारंट और बिना नोटिस के उठाया गया था
01:51कुछ को अग्यात स्थानों पर रखा गया और टॉर्चर भी किया गया
01:56अभी भी इनमें रूद्र के बारे में कुछ पता नहीं चल रहा
01:59कोड ने कहा कि हिरासत में लिए गए सभी एक्टिविस्टों के पूरी सूची उनके उठाने रिहा करने का समय अदालत
02:05को सौपा जाए
02:06कानूनी अधिकार बताया जाए हिरासत का और सभी की फिजिकल और मेंटल इस्तितिकी जानकरी अधालत को दी जाए
02:12कोड ने पुलिस को चिताव ने दी कि कानून के बीना हिरासत में लेना गंभीर मानवादिकार उलंगन है
02:19अगली सुनवाई 27 मार्च तैकी गई है
02:22इसी तरह का एक और मामला रिपोर्ट हुआ है सुनवाई हुई है
02:25लक्षिता नाम की छात्रा 13 मार्च की शामसला पता है
02:28उनकी बहन ने उनके लिए याचिका डाली है
02:31ये सारी घटनाय क्या बताती है
02:33कि अब पुलिस पर भरुसा नहीं किया जा सकता
02:35वो गुंडे मवाली की तरह काम करने लगे है
02:37और याद रखिए दिल्ली पुलिस सीधे ग्रह मंत्रा ले
02:40यानि हमारे ग्रह मंत्री हमिशा जी के एंडर में आती है
02:42इसलिए इस तरह कानून से खिलवाग और गंफिर मामला बन जाता है
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