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00:28Today we'll understand what we should do.
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01:08आज के एपिसोड में हम जानेंगे क्यों चैत्रशुक्ल प्रतिपदा को श्रिष्टी का नवप्रारंभ माना गया है।
01:39दर्शुक्ल भारती काल गणना में चैत्रशुक्ल प्रतिपदा को केवल एक तिथी नहीं माना गया है।
01:45इसे स्रिष्टी के आरंभ का छड़ कहा गया है।
01:49हमारे पुराणों में और जोतिशी ग्रंथों में वरणन मिलता है कि इसी दिन ब्रह्मा ने स्रिष्टी की रचना प्रारंभ की
01:56थी।
01:57इसलिए इस दिन को स्रिष्टी समवत्सर का प्रथम दिवस भी कहा जाता है।
02:03ब्रह्म पुराण और भविश्य पुराण में उलेख मिलता है कि जब ब्रह्मा जी ने स्रिष्टी का निर्मार का संकल्प लिया।
02:11तब काल चकर का पहला दिन अर्थात चैत्रमास की सुक्ल प्रतिपदा ही था।
02:17इसी छण से समय का क्रंब आरंभ हुआ। दिन, रात, रित्वें और संवत्सर का चकर चल पड़ा।
02:26यह भी उलेखनी है कि यही वस समय होता है जब सूर्य मेश रासी की ओर अग्रसर होता है और
02:33प्रकृति वसंत के संतुलन में होती है।
02:37पेणों पर नई पत्तियां आती हैं, प्रत्वी पर जीवन का पुनरजन्म होता है।
02:41इसलिए हमारे रिशियों ने इस प्राकृतिक पुनरजागरण को ही वर्षा रंभ का आधार बनाया।
02:49पौरानिक परंपरा में यह दिन भगवान विश्णू के मत से अवतार से भी जुड़ा हुआ माना जाता है।
02:56जिसने प्रलय के बाद सृष्टि की रक्षा की।
03:00यही कारण है कि इस्तिति को नवसमद्सर, युगादी और गुड़ी पड़वा जैसे बिभिन नामों से भी मनाया जाता है।
03:09अर्थात चैतर सुकल परतिपदा केवल नया वर्ष नहीं है।
03:13यह उश्ण की इस्मृति है जब सृष्टि ने पहली बार सांस ली और काल ने अपनी पहली गती प्राप्त की।
03:22अब बात करते हैं रौदर समद्सर दोजार तिरासी जो इस बार का नवसमद्सर का नाम है।
03:28काल का संकीत दर्शकों नवसमद्सर केवल एक नया वर्ष नहीं होता है। यह समय के सभाव का भी परिचे कराता
03:36है।
03:37और इस बार का वर्ष इसलिए विशेश है क्योंकि समद्ध दोजार तिरासी को भारतिये पंचाग में कहा गया है रौदर
03:43समद्सर।
03:45अब यहां एक रोचक प्रस्ण उठता है क्या हर वर्ष का नाम यूहीं रख दिया जाता है या इसके पीछे
03:52कोई गहरी परंपरा और गड़ना छिपी है।
03:56भारतिये काल गड़ना में साथ समद्सरों का एक चक्र माना गया है। यह परंपरा सूर्य सिधान्त और ब्रिहत सिधान्त जैसे
04:04प्राचीन गर्णतु में वरणित है।
04:07देव गुरु विरिश्पति की गती और काल की गड़ना के आधार पर इन साथ वर्सों को अलग अलग नाम दिये
04:14गए हैं।
04:15प्रभव, विभव, शुक्ल, प्रमोद, विकारी और इसी क्रम में एक वर्स आता है रौद्र।
04:23लेकिन रौद्र सब्द सुनते ही मन में प्रश्ण उठता है। क्या यह प्रश्ण उग्रता का संकेत है।
04:31दरसल रौद्र हमें इस्मरण कराता है भगवान शीव के रुद्र स्वरूप का।
04:36रिगवेद में रौद्र का वरणन करते हुए कहा गया है घोरह अपिशुवा। अर्थात जो स्वरूप में तिवर हो परन्तु परिणाम
04:46में कल्यान कारी।
04:48शीव का तांडो भी इसी सत्ते का प्रतीक है। वक्यवल विनाश नहीं बलकि असंतुलन को समाप्त कर नए संतुलन की
04:57शुरुवात है।
05:00इस द्रिष्टी से देखें तो रौदर समवत्सर किसी भय का संकेत नहीं है। यह समय की उस उर्जा का संकेत
05:06है जो जड़ता को तोड़ती है, जो समाज को जखजूरती है और जो व्योस्था को नए रूप में ढालने का
05:16अवसर देती है।
05:18इतिहास बताता है जब भी समय परिवर्तन के दौर से गुजरता है तो पहले हल्चल दिखाई देती है। लेकिन वही
05:26हल्चल आगे चलकर नए संतुलन की निव वनती है।
05:31भारतिय दर्सन में यह भी कहा गया है रुद्र जो असत्ते का अंत करते हैं और शंकर जो कल्याण की
05:39अस्थापना करते हैं।
05:42इसलिए संवत दोहजार तिरासी का यह रद्र वर्ष हमें डराने नहीं बलकि जगाने आया है।
05:48यह वर्ष हमें याद दिलाता है जो समय की गतिति तिव्र हो तो मनुश्य को भी जागरूक, संयमित और सजग
05:56होना पड़ता है।
05:58क्योंकि अंतता काल का प्रतेक परिवर्तन हमें एक नए संतुलन की योर ही ले जाता है।
06:04अब समझते हैं यह समझसर समाज और विश्व के लिए क्या संकियत लेकर आ रहा है।
06:11दर्शकों अब तक हमने रोदर समझसर के आध्यात्मिक और दार्षनिक आर्ष को समझा।
06:18लेकिन एक और महत्रपूर्ण प्रश्न है।
06:20जब समय का स्वभाव बदलता है तो क्या उसका प्रभाव केवल व्यक्ति पर पड़ता है।
06:28भारतिय जोतिस कहता है नहीं।
06:31समय केवल व्यक्तिकत जीवन को नहीं।
06:35समाज और विश्व की दिशा को भी परिभाद करता है।
06:39This is the degree of the
06:59अदिगाय देती हैं । और यदि हम आज के वैस्तविक परीद्शे को देखें तो दुनिया पहले से ही एक संवेधन्शील
07:08मोड़ पर
07:08ખड़ દिखाई દે રही है મध्यपूर में बढ़ता हुआ तनाओ ઇजराइल हमास के संघर्ष
07:16के बाद अब इजराइल और इरान के बीच गहराती टकराहट યूरूप में
07:22जारी रसिया युक्रेन गिद्ध और एसिया में साउच चाइना सी तथा ताइवान को लेकर बढ़ती प्रतिसपर्धा यह सभी घटनाय संकेत
07:33देती हैं कि विश्व व्यवस्था एक परिवर्तन काल से गुजर रही है
07:39इतिहास हमें बताता है बड़े वैस्विक परिवर्तन अचानक नहीं होते वे धीरे-धीरे बढ़ते तनाओं, प्रतिसपर्धा और रणनीतिक बदलाओं से
07:50जन्म लेते हैं
07:51ऐसे समय में भारत की भूमी का भी विशेश रुप से महत्वपून हो जाती है
07:57आज भारत वैस्विक मंच पर एक संतुलित और समवाद अधारित नीती का प्रतिन दित्व कर रहा है
08:05उरुजा सुरक्षा से लेकर शांती प्रयासों तक भारत लगतार यह संदेश दे रहा है कि समवाद ही अस्थाई समाधान का
08:13मार्ग है
08:15और शायद यही कारण है कि आने वाले समय में भारत की कुट्रिनीतिक भूमिका और अधिक प्रभाविशाली हो सकती है
08:24लेकिन दर्शकों इतिहास का एक गहरा नियम भी है
08:28जब भी दुनिया बड़े परिवर्तन के दौर में प्रवेश करती है तो शुरुवात में अईस्थिर्ता और हल्चल दिखाई देती है
08:37फिर उसी हल्चल से जन्म लेती है एक नई वेवस्था
08:43इस दृष्टी से देखें तो रौदर समद्सर केवल संघर्स का संकेत नहीं है
08:48यह संकेत है जागरण का संतुलन की खोज का और शायद एक नई वेश्विक वेवस्था के उदय का
08:56क्योंकि काल का नियम इस पश्ट है जब समय की गति तेज होती है तो इतिहास भी अपनी दिशा बदल
09:03देता है
09:06अब बात करते हैं दर्शकों वार्शिक रासिफल का
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12:06की चाल को पहचान लेता है तो चुनोतियां भी अवसर बन जाती हैं इसी संदेश के साथ नव समधसर
12:132023 आप सभी के जीवन में संतुलन जागरुपता और नई उर्जा लेकर आए नमस्कार
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