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AIIMS में हरीश राणा की इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू, देखें वारदात
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00:00नमस्कार मैं हूं शम्स ताहर खान और आप देख रहे हैं वारदात
00:04जिन्दगी का पिंजरा तोड़कर एक 30 साल का हरीश
00:07इसी हफ़ते किसी भी दिन हमेशा हमेशा के लिए उड़ जाएगा
00:12डॉक्टरों के लिए तो हरीश 13 साल पहले ही मर चुका था
00:16लेकिन अब वही डॉक्टर अपने हाथों से हरीश को मौत देंगे
00:20कहते हैं जिन्दगी और मौत उपर वाले के हाथों में
00:25तो यहां कह सकते हैं कि हरीश के हिस्से की मौत उपर वाले ने डॉक्टरों के हाथों लिगी थी
00:32देश के सबसे बड़े अस्पताल दिल्ली के एमस में हरीश को किष्टों में कैसे मौत दी जाएगी आहिए आपको बताता
00:41हूँ
00:48तिल्ली के दर्वाजे पर एक अपार्टमेंट में बसी ये छोटी सी दुनिया है राजिम भाएगी इस छोटी सी दुनिया के
00:58इस छोटे छोटे घरोंदों का नाम है
01:01इसी छोटी सी दुनिया का एक छोटा सा घरोंदा इस इमारत की तेरवी मंजिल पर है पता ने ये महज
01:10एक तेफाक था ये उपर वाले का कोई निराला खेल
01:15तेरवी मन्जिल पर तेरा मार्च को तेरा साल से पूरी दुनिया से बेखबर
01:21जिन्दा होकर भी जिन्दगी से दूर
01:2431 साल के हरीश राना से मिलने उपर वाले के कुछ नेक बंदे पहुँचते हैं
01:31यहां भी दफाक देखें अगर हरीश की उम्र के नंबर को आगे पीछे कर दे तो वो भी तेरा ही
01:38बनता है
01:39जो लोग हरीश से मिलने उसके घर पहुँचे थे वो असल में उसे दुआएं और शुब कामनाएं देने आए थे
01:46दुआएं मौत की शुब कामनाएं शरीर को द्याब कर उड़ जाने की
01:52शुक्रवार यानि तेरा मार्च की यह तस्वीर ठीक शाम साथ पज़े की है
01:58पहले सब को माफ करते हुए और सब से माफी मांगते हुए उड़ जाने की इस वीडियो को देखे
02:06सुनिये और बेहत गोर से देखे सुनिये
02:19सब को माफ करते हुए और सब से माफी मत ते हुए आज़ो
02:27ठीक है
02:34ये ब्रह्म कुमारी की लवली बहन है
02:37इनके एक हाथ में चंदन की छोटी सी डिबिया है
02:41जबके दूसरा हाथ हरीश के सिर पर है
02:44हरीश के सिरहाने ताई तरफ ब्रह्म कुमारी की एक और बहन खड़ी है
02:49हरीश के माथे पर चंदन का टीका लग चुका है
02:53पहले साथ सिकंड तक बहन लवली अपना एक हाथ हरीश के सिर पर रखकर मुस्कुराते हुए बस उसे निहारे जाती
03:03है
03:03हरीश की दोनों आखें खुली लगातार पलकें भी छपक रही है
03:08मुख खुला हुआ है
03:10बीच में एक बार वो इस तरह गले से सांस उपर नीचे करता है
03:14मानों उसे प्यास लगे हो
03:16अभी तक उसकी पलकें बस उठ और गिर रही है
03:20पर जैसे ही बहन लवली पहला शब्द बोलती है
03:23अचानक हरीश की आँखें हरकत करती है
03:26और वो आँखें घुमाकर अब सीधे बहन लवली को देखने लगता है
03:31जिस तरह साथ सेकंड की खामोशी के बाद
03:35पहली बार बहन लवली ने पहला शब्द बोला
03:38और उस शब्द को सुनते हैं
03:40जिस तरह हरीश ने अपनी आँखें घुमाई
03:42उससे इतना तो साफ है कि वो सुन सकता था
03:46शायद सुन रहा था
03:47क्या पता बहन लवली जो कह रही थी उसे समझ भी रहा हो
03:52अगर सच मुछ हरीश सुन और समझ रहा था
03:55तो वो यकिन ये जान भी गया होगा
03:58कि बस अब मरने वाला है
04:09कुछ हांकड़े कहते हैं
04:10कि करीब आठ अरव वाली इस दुनिया में हर रोज
04:13लगबख डेड़ लाग से ज्यादा मौत होती है
04:16दुनिया की सबसे ला इलाज बीमारियों को भी शामे कर ले
04:21तो भी शर्तिया किसी मरने वाले इनसान को
04:24अपनी मौत की तारीख और वक्त पता नहीं होता
04:27सिवाए उनके जने किसी जर्म के लिए सजा मौत दी गई हो
04:32अब ज़रा सोची
04:33अगर हरीश एक जिन्दा लाश होने के बावजूद
04:37लवडी दीदी की सारी बाते सुन और समझ रहा था
04:41तो उस पर क्या भी दी होगी
04:43मगर वो तो तेरा साल पहले ही मर गया था
04:46पर मौत अब आने वाली है
04:48ये शायद वो खुद भी सुन और समझ चुका है
04:51शायद यहीं वज़ा थी
04:53कि जब तक बहन लवली सिर्फ उसके सिर पर हात रखे थी
04:57तब तक कुल छे बार
04:58उसने अपने होठों को जुमबिश दी
05:01ऐसा लगा
05:02मानो वो कुछ कहना चाहता हो
05:04लेकिन जैसे ही लवली दीदी ने अपनी बाते शुरू की
05:08हरीश का बस मुख खुला रहा
05:10नजरे तैरती रही
05:12चेहरा बेजान हो गया
05:14तो क्या सत्मुच हरीश से ये समझ चुका था
05:17कि सब को माफ करते हुए
05:19सब से माफी मांगते हुए
05:21जिसे उड़ जाने के लिए कहा जा रहा है
05:23असल में वो वही है
05:25और क्या इसलिए वो तब भी बेजान बना रहा
05:28जब लवली दीदी ने उससे आखरी दो शब्त कहे
05:32आखरी वो दो शब्त
05:34जो शायद हरीश से उड़ने के लिए
05:36उसकी इजासत माग रहे थे
05:38सवाल के अंदास में पूछे गए
05:40वो आखरी दो शब्त थे
05:52सब को माफ करते हुए
05:55जिससे माफी मकते हुए
05:59ताह ज़्याआई
06:00चीके?
06:02चीके?
06:04चीके?
06:10असल में लवली दीदी हरीश से
06:13जिन्दगी का पिंजरा तोड़कर
06:15उड़ जाने के लिए कह रही थी
06:16उस श्रीर को छोड़कर
06:18उड़ जाने के लिए कह रही थी
06:20जो भीते तेरा साजों से
06:22उसे लाश बना कर
06:24चार बाई चार के इस बेट पर कैद करके रखे हुए थी
06:29असल में एक ये भावुक समय होता है
06:32जब भी कोई कुछ समय के लिए भी कहीं जाता है
06:36और हम समझते कि आत्मा जब शरीर छोड़ कर जाती है
06:39और वो उपने के परिवार का सदस्ते है
06:41इतना नजदीक अतरंग समबंध है
06:44तो फिर भी एक सत्य ये है कि परमात्मा पिता है
06:48और पिता से हम सर्म मिलकर यहां आये हैं
06:51और यहां हमने अपने अपने एक रोज अदा कर लिए हैं
06:54परन्तु एक ना एक दिन हम सब को भी यहां से जाना है
06:57तो उस तैयारी को कोई थोड़ा पहले, कोई थोड़ा बात में करना तो है
07:03तो किसी की घटना के सामने समय उस वेक्टी के सामने वो परिस्तिती पहले आ जाती है
07:09तो इसलिए यही है कि तैयारी भी घटने है
07:19हरीश की जिंदगी के पिंजरे को तोड़ने की इजाज़त
07:28तीरह साल से खामोश लेटे हरीश से अजासत लेने की रस्म अदाएगी भी अप पूरी हो चुकी थी
07:35तेरह मार्च की रात अपने घर में हरीश की आख्री रात थी
07:39मालूम नहीं, ये बात हरीश को भी मालूम थी ये नहीं
07:43नजरे, सांसे, पलके, सब तो हरकत कर रही थी
07:47बस लप खामोश थे
07:49दिमाग कितना समझ रहा था ये तो पता नहीं
07:53बस उसी खामोश लप की वज़ा से
07:55दिल्लिया दिमाग की बाते
07:57नहरीश कभी जुबान पर ला पाया
08:00नहरीश के करीब रहने वाले कभी समझ पाये
08:04अब 14 मार्च के सुबा हो चुकी थी
08:07शनिवार का दिन था
08:09इस घर का ये कमरा अब खाली होने जा रहा था
08:12इस बेट की भी अब इस कमरे में शायद कोई जरूरत नहीं
08:16सुबा के करीब 11 बजे होंगे
08:19आखरी सफर पर निकलने से पहले हरीश को
08:22बस एक आखरी सफर और करना था
08:25घर से 33 किलोमेटर दूर एम्स तक का सफर
08:29उसी एम्स का जहां धीरे धीरे मशीनें
08:32उसकी सांसों की डोर को तोड़ कर
08:34हमेशा हमेशा के लिए
08:36नसर्फ उसकी धड़कनों को
08:38खामोश कर देंगी
08:40बलकि ये खुला मूँ और खुली पलके भी
08:43हमेशा हमेशा के लिए
08:45बंद हो जाएंगी
08:4613 मार्च की दोपहर लगबग
08:49एक बजे का वक्त रहा होगा
08:51जब हरीश के माबाप और भाई
08:53उसे एम्बुलेंस में बिठाकर
08:55घर से विदा करते हुए
08:57अपने साथ उस एम्ज में पहुचे
08:59जहां हर मरीज इस उमीच से पहुचता है
09:02कि वहां से वो ठीक होकर
09:04अपने घर लोटेगा
09:06लेकिन ये दुनिया के शायद
09:08वो बदनसी बाबाप है
09:10जो अपने बेटे को देश्ट के
09:12सबसे बड़े अस्पताल
09:13इसलिए ले जा रहे है
09:14ताकि वो मरकर लोटे
09:18एम्ज के बाद हरीश की आखरी मन्जिल
09:21उसका अपना घर नहीं
09:23बलकि कोई शम्शान होगा
09:27ये उसी एम्ज में मौजूद
09:29इंस्टिट रौटरी कैंसर हॉस्पिटल है
09:32वैसे इसका पूरा नाम
09:34बी आर अम्बेट कर इंस्टिट रौटरी कैंसर हॉस्पिटल है
09:38इसी बिल्डिंग की पहली मन्जिल पर
09:41पैलियेटिव केर यूनिट
09:42यानी PCU डिपार्टमेंट है
09:44असल में PCU में उन मरीजों को ही रखा जाता है
09:48जो बहुत दर्द या तक्लीफ में हो
09:51और जिनके दर्द के कोई दवा ना हो
09:53बचने के उमीद लगबख खत्म हो चुकी हो
09:56बस यू समझ लीजिए
09:58कि एक मरीज को आसान और कम तक्लीफ दे मौद देने की जो जगा होती
10:03उसे ही पैलियेटिव केर यूनिट या PCU कहते है
10:10पैलियेटिव केर का मतलब है कि पेशन्ट को हम कमफटेबल करते हैं
10:13इसके अंदर हम नीन की दवाईयां भी दे सकते हैं
10:15दर्द की दवाईयां भी दे सकते हैं दर्द के इंजेक्शन भी दे सकते हैं
10:19या एनस्थीजिया के ब्लॉक्स भी दे सकते हैं जिसे की पैशन्ट को पेशन्ट को पेशन्ट बिलकुल ना हो
10:23और उसकी सफरिंग जो है वो कम हो
10:39लिहाजा PCU वाट में हरीश के लिए एक आखरी बेट भी तैयार था
10:44इसी बिल्डिंग की पहली मन्जिल पर हरीश के हिस्से मौत की जो बिस्तर आई है उसका नमबर है बेट नमबर
10:52ती
10:54बेशक एमस देश का सबसे बड़ा स्पताल है लेकिन बदनसीबी देखिए कि जिन्दगी बचाने वाले एमस के सामने भी पहली
11:03बार एक ऐसा केस आया है जिसमें उसे किसी की जिन्दगी बचानी नहीं बलकि जान लेनी है
11:09वो भी पूरी मर्यादा, इंसानियत, डॉक्टरी के महान पेशे और कानून को ध्यान में रखकर हरीश जब 14 मार्च के
11:17दोपहर एमस लाया गया उससे पहले ही एमस में धीरे धीरे उसकी जान लेनी के तयारी शुरू हो चुकी थी
11:24हरीश एकदम से नहीं मरेगा, बलकि आहिस्ता आहिस्ता इस तरह उसकी जान ली जाएगी कि शायद जान निकलने की जो
11:32तकलीफ होती है, उस तकलीफ का उसे एहसास भी ना हो
11:42कुल छे से साथ ऐसे स्टेज होंगे, जिनमें धीरे धीरे करके हरीश को मौत के दरवाजे तक ले जाये जाएगा
11:50पिछले तेरह सालों से जिन्दा होकर भी लाश बना हुआ हरीश कुछ दवाओं के सहारे जी रहा है
11:58अब चुकि उसे मरना ही है, तो फिर जिन्दगी बचाने की दवाओं की क्या ज़रूरत है
12:04लेकिन ये तवा भी अचानक उससे चीनी नहीं जाएगी, बलके धीरे धीरे तवाओं की डोस कम की जाएगी
12:14जितनी भी लाइफ सपोर्ट की मेडिसन्स हैं, उनकी डोस कम करते हुए उनको विड्रॉ किया जाएगा
12:20पेशेंट की कंडिशन को रेगुलरली असेस किया जाएगा, पेशेंट के कमफर्ट का भी ध्यान रखा जाएगा
12:25इसके अंदर पैसिव यूथनीजी है, जो भी उसका सपोर्ट सिस्टम है, उसको धीरे धीरे एथिकल वे में हम विड्रॉ करते
12:32जाएगे
12:34एक वक्त था जब हरीश वेंटिलेटर पर था, लेकिन डॉक्टरों की कहने पर जब वो घर में शिफ्ट हो गया,
12:40तब वेंटिलेटर हटा लिया गया
12:42बिना वेंटिलेटर के भी उसकी सांसे जारी रही, वेंटिलेटर एक तरह का लाइफ सपोर्ट सिस्टम होता है
12:49अगर एम्स के डॉक्टरों को लगा कि हरीश को लाइफ सपोर्ट सिस्टम यानि वेंटिलेटर पर ढाला जाए
12:56और फिर धीरे सपोर्ट सिस्टम वापस खींच लिया जाए तो डॉक्टर हरीश के साथ भी ऐसा ही करेंगे
13:06पेशन्ट को पहले स्टिबलाइज किया जाएगा अगर उस वकद उसको स्टिबलाइजेशन करने के लिए कुछ चीजों की अवश्यक्ता है तो
13:12वो डॉक्टरी बोर्ड जो है उसका डिसीजन लेगा
13:15और उसके बाद धीरे धीरे करके जो हैं चीजों को विड्रॉ किया जाएगा और पेशन्ट को भी तकलीफ ना हो
13:21इस चीज का भी जो डॉक्टर्स है वो पूरा ध्यान रखेंगे ताकि उनकी जो जान जाती है वो बड़े नैचुरल
13:27वे से जाए और बिना किसी जादा दिक्
13:31हरीश के ब्लेट प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए अब तक जो दवाईं दी जा रही थी वो भी किस्तों
13:37में कम करती जाएगी इससे भी हरीश धीरे धीरे मौत की तरफ आगे बढ़ेगा
13:45लाइफ सेविंग सपोर्ट सिस्टम के अंदर बीपी जब लो होता है तो हम बीपी बढ़ाने की दवाईयां देते हैं अगर
13:50वो नहीं देंगे तो पेशेंट की डेथ हो जाएगी ऑक्सीजन देते हैं कई पर वेंटिलेटर भी देते हैं और असिस्टिड
13:56नूट्रिशन और
13:57हाइडरेशन देते हैं यानि कि हम नलकी के जरीए पेशेंट को खाना देते हैं पानी पहुंचाते हैं या आईवी फ्लूइट्स
14:03देते हैं ये सब जो हैं ये लाइफ सस्टेनिंग या लाइफ सपोर्ट मेनियोवर्स हैं जो कि हम करते हैं पेशेंट
14:10के साथ लाइफ सपोर्
14:49या बेचैनी महसूस ना हो।
14:55निउट्रीशन या हाइड्रीशन है वो धीरे दिलेगर के विट्रॉ होंगी।
15:25या दर्द की दवा भी दी जाएगी।
15:57जब भी ये चीजें विट्रॉ होंगी।
15:59उसके नाग के रास्ते सीधे पेट तक पहुचता है।
16:02लहाजा इस फूट पाइप को शायद सबसे आखर में हटाया जाएगा।
16:07जब टॉक्टरों को यकीन हो जाएगा कि हरीश की सांसे बस कभी भी तूट सकती है।
16:14और लास्ट में जितनी भी असिस्टिड चीजें हैं जिसमें की असिस्टिड नूट्रीशन दे रहे हैं क्योंकि इस तरह के पेशेंट्स
16:20को अक्सर हम नूट्रीशन नेजोगेस्टिक ट्यूब के थूप के थूँ देते हैं क्योंकि पेशेंट ले नहीं पाता तो और फ्ल�
16:39सांसों को खाडना भी जरूरी होता है हरीश को मौत देने के लिए एक खड़ी वो भी आएगी जब ऑक्सीजन
16:47हटा कर उसकी सांसों को आजाद छोड़ दिया जाएगा
16:53औक्सीजन वेंटिलेटर या सीपैप और ये सब मशीनों की अगर जरूरत पढ़ती है पेशन्ट को तो जब पैसे भी धनेजिया
17:00होता है तो इनको धीरे-धीरे करके विड्रॉ किया जाएगा ताकि पेशन्ट की जो नैचुरल डेथ की जर्नी है वो
17:06स्मूथ वे से चले
17:16किष्टों और चर्लों में इस तरह हरीश के हिस्से जो मौत आएगी वो कम से कम एक हफ़ते का वक्त
17:22लेगी
17:23सुप्रिम कोट में साफ कहा है कि अगर हमारा सम्विधान इजज़त के साथ जीने का हग देती है तो यही
17:30सम्विधान इज़त के साथ मरने का भी हग देती है
17:36एम्स के डॉक्टरों के मुदाबिक हरीश के हिस्से इज़त और बिना तकलीफ के जो मौत आने वाली है वो इसी
17:45हफ़ते आएगी
17:45यानि इसी हफ़ते किसी भी दिन सच मुझ हरीश उड़ चुका होगा
17:53मनीशा जहा और मैंगौल के साथ हिमान शुमिश्रा आज तर
18:0131 साल की अपने कुल उम्र में से हरीश कायदे से सिर्फ 18 साल जिया
18:06क्योंके पिछले 13 सालों से वो कौमा में एक लाश की तरह ही जी रहा था
18:11एक ऐसी लाश जिसकी मौत का ना सिर्फ इंतिजार था बलकि जिसकी मौत के लिए घरवाले दुआएं मांगने को मजबूर
18:20थे
18:21कहते हैं कि मरने के बाद लाश को ज्यादा देर तक घर में नहीं रखते
18:25पर सोचिये ला उस माबाब के बारे में जिनोंने पूरे 13 साल एक लाश के साथ गुजार दी
18:34बात 11 साल पुरानी है तब हरीश और उसके घरवालों की जिन्दगी पूरी तरह से गुलजार थी
18:42हरीश इंजीनियर बनना चाहता था अपने इसी खुआप को पूरा करने के लिए
18:472013 में उसने चंडी गड़ युनिवरसिटी में दाखला लिया
18:53इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू हो चुकी थी
18:55हरीश युनिवरसिटी के नजदीक मुहाली में एक पीजी में रहता था
19:00पीजी में उसका कमरा चौथी मन्जिल पर था
19:03कॉलेश से आने के बाद एक रोज हरीश अपने पीजी की बालकनी पर खड़ा था
19:08और अचानक वो उस बालकनी से नीचे गिर गया
19:16हरीश को फोरण पीजी आई चंड़ी गर ली जाया गया
19:19उसके सिर पर गंभीर चोटे आई थी
19:21सांसे चल रही थी लेकिन वो होश में नहीं था
19:27चुकी मामला एक्सिडेंट का था
19:29लहाजा मोहादी पुलिस ने एफ आयार भी धर्च की
19:32हरीश के घरवालों ने तब इलजाम भी लगाया था
19:35कि उनके बेटे को जानबूच कर कुछ रलकों ने बालकनी से नीचे गिराया
19:44चंड़ी गर पीजी आई में हरीश की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ
19:48डॉक्टरों ने अपने हाथ खड़े कर लिया
19:50लेकिन माबाप ने हिम्मत नहीं हारे
19:53वो हरीश को पीजी आई चंड़ीगर से दिल्ली के एम्स ले आए
19:58यहां भी उसका लंबा इलाज चला पर हालत में कोई सुधार नहीं
20:02एम्स के डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया
20:05एम्स के बाद हरीश को दिल्ली के हिराम मनुहर लुया अस्पता
20:09फिर लोक ना एक जैपरकाश ना रायन अस्पता
20:12और उसके बाद फोटिस अस्पताल में घरवानों ने भर दी करा
20:16लेकिन कहीं कोई फायदा नहीं हुआ
20:21अलबता इस इलाज की वज़ा से घर की माली हालत दिन बदिन खराब होती थी
20:30हरीश के पिता अशो उकराना एक कैटरिंग सर्विस कंपनी में नौकरी क्या करते थे
20:34तनखा बहुत ज्यादा नहीं थी
20:36आमदनी का दूसरा जरिया भी नहीं था
20:39छोटा बेटा आशीश तब बहुत छोटा था
20:41फिर भी उन्होंने हरीश के इलाज के लिए अपना सब कुछ छोट दिया
20:45यहां तक कि दिल्ली के जिस घर में वो रहा करते थे
20:48उस घर को भी बेच दिया
20:50पर हरीश के हालत में कोई सुधार नहीं हुआ
20:53वो एक जिन्दा लाश की तरह बिट पर पढ़ा रहा
20:57जब हर डॉक्टर हर हस्पताल ने जवाब दे दिया
21:00तब मजबूरन हरीश के माबाप उसे घर ले आए
21:03उन्होंने हरीश की देख भाल के लिए एक नर्स रख लिया
21:07पर नर्स का खर्चा भी कम नहीं था
21:0928,000 रुपे महीना तनखाह पाने वाले अशोक राना
21:1327,000 रुपे तो हर महीने नर्स को ही दे दे दे थे
21:23इलाज के साथ साथ घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा था
21:27फिर वो वक्त भी आया जब अशोक राना नौकरी से रिटायर कर दिये गए
21:33छोटे बेटे की अभी नौकरी भी नहीं लगी थी
21:35मजबूरन उन्हें नर्स को हटाना पड़ा
21:37अब हरीश की देख बाल खुद माबाप किया करते
22:10बेटे की दवा और घर का खर्च चलाने के लिए शोकराना ने सैंड्विच और स्प्राउट पेचना शुरू कर दिया
22:21घर के पास ये एक मैदान है जहां खास कर हर शनिवार और रविवार पड़ी तादाद में बच्चे खेलने आते
22:28हैं
22:28शुरवात में अशोकराना घर में ही सैंड्विच और स्प्राउट पना कर मैदान ले जाते
22:33और वहां वो बच्चों को बेजा करते
22:36घर का कुछ खर्चा निकला था पेंशन के नाम पर तीन हजार रुपे मिला करते थे
22:41फिर भी इन सब के बीच घर चलाना मुश्किल हो रहा था
22:45महीने साल बीचते रहें
22:47इदर हरीश की हालत में कोई सुधार नहीं हूँ
22:50नजाने कितने बरस कितने मौसम बीच गए
22:53पर हरीश इस मुद्दत में इसी बिस्तर पर युगी पढ़ा रहा
22:59इस पूरी मुद्दत में उसने एक करवट तक नहीं बदली
23:03बिस्तर के साथ एक यूरीन बैग और एक फूट पाइप लगा था
23:07उसी पाइप के सहारे उसे रोजाना उसकी माँ खाना देती
23:14गुजरते वक्त में हरीश को एक इनसान से कंकाल बना दिया था
23:18पर ना उसे कंकाल कह सकते और नहीं मुर्दा
23:23क्योंकि एक चीज अब भी ऐसी थी जो उसका साथ नहीं छोड़ रही थी
23:27और वो थी उसकी सांस ही
23:34और इसी सांस ने उसे जिन्दा होने का सर्टिफिकेट दे रखा था
23:38जबकि तमाम अस्पताल और डॉक्टर कपका अपना हाथ खड़ा कर चुके थे
23:42घर के इस एक बिस्तर ने मानो घर की पूरी खुशियां ही निकल ली थी
23:47कैसा तेवार कैसी खुशियां किसका चलम दे
23:51खुशी देने वाली हर खुशी ने यहां मातम का लबाता हो रखा था
24:02अब तक हरीश को इसी तरह बिस्तर पर जिन्दा मुर्दा लेटे दस बरस बीच चुके थे
24:08इन दस लंबे बरसों में हरीश की हालत जरा भी नहीं बतली
24:12लेकिन घर में रहने वाले बागी तीन जिन्दा लोगों की जिन्दगी पूरी तरह से पतल चुकी थी
24:33और तभी एक रोज अचानक हरीश की मान एक आर्जू की
24:38दुआ में लिप्टी ये आर्जू हरीश की मौत की थी
24:42हरीश की माँ चाहती थी कि अब हरीश के हिस्से मौत ही आ जाए
24:54हादसे के बाद से हर रोज अपने बच्चे की जिन्दगी की दुआ मांगने वाली माँ
24:59अब हर वक्त अपने बेटे की मौत की दुआ मांग रही थी
25:03पर मौत भी जित्ती है आती अपनी मर्जी से ही है लहाजा मौत ने भी मां की आर्जू पूरी करने
25:10से इंकार कर दिया
25:11दवा के बाद अब दुआ भी बेकार जा रही थी और ठीक तभी हरीश की मां ने एक फैसला लिया
25:19एक ऐसा फैसला जो शायद ही दुनिया की कोई भी मां ले सकती है
25:24मां के इस फैसले के साथ हरीश का पूरा परिवार एक फर्यात के साथ दिल्ली हाई कोट के दरवाजे पर
25:32दस्तक देता है
25:34मनीशा जहा और मैंगौल के साथ हिमान शुमिश्रा आज तर
25:43तो इस अफसोसनाक वारदात में फिलहाल इतना ही देश और दुनिया की बागी खबरों के लिए आप देखते रही आज
25:49तक
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