00:00ओम बिर्ला जी, जितने सांदार सांसद है, उतने ही बहतरीन लोगसभा अत्यक्षभी हैं, वे संविधान को पुरी तरह समर्पीद है,
00:18वे संसदिये प्रणालियों के प्रती पूरी तरह निष्ठा रखते हैं,
00:25वे आज किसी पक्ष के सदसे नहीं हैं, वो पक्ष प्रती पक्ष से पूरी तरह उपर हैं, और मैं देख
00:36रहा हूँ जब उनको सदन में देखता हूँ,
00:38तब मुझे विचारा आता है, कि ये शायद सिख्षा की नगरी से आने का प्रभाव है,
00:46कि वो लोकसभा अध्यक्ष के तोर पर भी, एक अच्छे मुख्या की तरह,
00:53सब को सांथ लेकर के चलने की भूमिका में रहते हैं,
00:59और सदन में जितने भी हमारे मान्य साउसद गण हैं,
01:05उनको वो अच्छे से सबाल लेते हैं,
01:08उनकी भावनाओं को, उनकी आगरों को बहुत ही आदर करते हैं,
01:14और एक ऐसे स्पीकर महुदय हैं, जो सांसदों का सरवादिक सम्मान करने का स्वभाव रखते हैं,
01:23और कभी-कभी कुछ बड़े घरानों के अहंकारी, उत्पाती,
01:31अगर कोई छात्र आभी जाते हैं, वो अपना हुर्दन करने की आदत तो छोड़ते नहीं हैं,
01:38तो भी वो सदन के मुख्या के तरह सब को समालते हैं,
01:46किसी को भी अप्मानित नहीं करते हैं,
01:51सब के कड़वे बोल भी जेल लेते हैं,
01:55और आपने देखा होगा, हर बार वो मुस्कराते हैं,
02:02एक मिठी हसी उनके चेरे पर हमाशार आती है,
02:06शायद वो भी एक कारण है,
02:09कि सदन में वो सर्वप्रिया है,
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