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01:14ुच्छी जान दे दी।
01:18अब ज़रा असम चलते हैं।
01:2017 साल की एक लड़की,
01:22हाथ में तिरंगा लिए
01:24पुलिस टेशन की ओर बढ़ रही थी।
01:26नाम था कनकलता बरुआ।
01:28अंग्रेजों ने चेतावनी दी,
01:31रुको!
01:32लेकिन कनकलता ने कहा
01:36अंग्रेजों ने खूब रोकने की कोशिश की
01:39मगर उस बच्ची की आखों में देश प्रेम की रोशनी इतनी तीवर थी
01:43कि उसे और कुछ नजर ही नहीं आया
01:46और वो आगे बढ़ती गई
01:48तभी गोली चली
01:49और वो वहीं शहीद हो गई
01:5217 साल की उम्र
01:54जब ज्यादतर लोग जिन्दगी की शुरुआत कर रहे होते हैं
01:58कनकलता ने देश के लिए अपनी जिन्दगी खत्म करती
02:05अब सोचिये
02:071942 में ना सोशल मीडिया था ना टीवी
02:10फिर भी आंदोलन की खबरे पूरे देश में कैसे पहुँचती थी
02:15एक गुप्त रेडियो स्टेशन चलता था
02:17कॉंग्रेस रेडियो
02:19और इसे चलाती थी 22 साल की उशा महता
02:23वो हर दिन गुप्त स्थान बदलती थी
02:26ताकि अंग्रेज पकड़ना सके
02:28इस रेडियो से संदेश जाता था
02:31यह कॉंग्रेस रेडियो है
02:37आस्ता को बिलाब होत ना में को अध्यार करा के वा functioning का नाम बिलनों से लिए जरी करा को
02:53और भी कहा हमायाँ हो हुः
02:58जासी की रानी का नाम तो सब जानते हैं
03:01लेकिन उनसे भी पहले दक्षिन भारत में एक रानी थी
03:05वेलू नचियार
03:06जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ भकाइदा सेना तैयार की
03:11रणनीती बनाई और वर्षों तक संगर्ष किया
03:15इतना ही नहीं
03:16उनकी एक सहयोगी ने अंग्रेजों के गोदाम में
03:19खुद को बलेदान कर विस्फोर्ट तक कर दिया
03:22ताकि दुश्मन की ताकत खत्म हो
03:25वेलू नचियार को भारत की पहली ऐसी रानी माना जाता है
03:29जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संगठित युद किया
03:36भगत सिंग का नाम सब जानते हैं
03:38लेकिन क्या आपको ये पता है
03:41जब भगत सिंग को लाहौर से निकालना था
03:44तो एक महिला ने अपनी जान जोखिम में डाल कर उन्हें बचाया
03:48वो थी दुर्गावती देवी
03:50जिन्हें लोग प्यार से दुर्गा भावी कहते थे
03:53उन्होंने भगत सिंग के साथ ट्रेन में पत्नी बन कर सफर किया
03:58ताकि अंग्रेजों को शक्त ना हो
04:00सिर्फ इतना ही नहीं उन्होंने खुद भी क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा लिया
04:05हतियार उठाए और आंदोलन का नेतरित्व कर स्त्री शक्ती का असली रूप जग को दिखाया
04:13दोस्तों इन कहानियों में एक बात कॉमन है
04:16इन में से किसी ने प्रसिधी के लिए लड़ाई नहीं लड़ी
04:20ना सोशल मीडिया था ना फॉलोवर्स ना लाइक्स
04:23बस एक सपना था आजाद भारत
04:27आज जब हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं या गंतंत्र दिवस पर तिरंगा फहराते हैं तो याद रखिए
04:33ये सिर्फ एक जंडा नहीं है
04:36ये उन महिलाओं की हिम्मत का प्रतीक है
04:39जिन्होंने समाच की बंदिशों को तोड़ा दर को हराया और तीश को खुद से उपर रखा
04:46क्योंकि आजादी सिर्फ कुछ मशूर चहरों की कहानी नहीं है
04:51ये उन अंगिनत वीरांगनाओं की भी कहानी है
04:55जिनके बिना भारत की सतंत्रता अधूरी थी
05:09झाल झाल
05:11You
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