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  • 21 hours ago
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में विश्व प्रसिद्ध फागुन मेला अपनी अनोखी प्राचीन और आध्यात्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है.

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00:03
00:18जिले में 12 दिनों तक चलने वाले फागुन मडई में, सोम्वार को चतुरदशी पर मा की नवमी पालकी बड़े ही
00:27धुम्धाम से निकाली गई।
00:28दंतेश्वरी मंदिर परिसर में पुलिस जवानों ने पालकी को गार्ड आफ ओनर दिया।
00:52Palki Yatra Narayanpur Mandir
00:54जहां पूजा अर्चना के बाद भैरवनाद बाबा इस्थल ले जाया जाता है। यहां भी पुलिस जवान पालकी को गाड़ा फॉनर
01:03देते हैं। इसके बाद पालकी को वापस नारायनपुर मंदिर लाया जाता है। और मादा दंतेश्वरी के साथ तीन परिक्रमा की
01:11जाती ह
01:12अंत में पालकी को दंतेश्वरी मंदिर लाकर पारंपरिक विध्य अनुसार स्थापित किया जाता है।
01:49मेले की सबसे चर्चित रस्म आवला मारा निभाई जाती है। यह रस्म सदियो पुरानी है और इसके पीछे एक विशेश
01:58धार्मिक मानिता जड़ी है। इस रस्म में मंदिर समिती के सदस्य दो दलों में बट जाते हैं और एक दूसरे
02:06पर आवला फेकते हैं।
02:12पालिकी के दिन जो यहां के वारा लंकरवार है या बाबा यह सब मिलकर माई जी के जब दूली वहां
02:25के वापत आती है।
02:28पालिकी के वाक्षी में उस आवले के फल्स है। जब को जो विजी चली आ रही है जो फ्रम्परा चली
02:37आ रही है उसके तरफ एक मुझरे को उस फल्से मारा जाता है।
03:02फागुन मंडई के बड़ी विशिष्टा यह है कि यहां ताड के पत्तों से खोली का दहन किया जाता है।
03:09भैरव बाबा मंदिर से ताड के पत्ते लाकर उन्हें दंतेश्वरी सरोवर में धोया जाता है।
03:15इसके बाद उन्हें मंदिर प्रांगड में बिच्छा कर उनी पर होलिका की अग्मी प्रज्वलित की जाती है।
03:21इसमें आशदिये लकडियों का भी उपयोग होता है।
03:24दूसरे दिन सुबा होली का दहन की ठंडी राख को पलाश के फूलों के प्राकृतिक रंग में मिलाया जाता है।
03:32यह रंग सबसे पहले माता दंतेश्वरी को अरपित किया जाता है।
03:36इसके बाद लोग आपस में होली खेलते हैं।
03:40मुकेश श्रिवास, ETV भारत, दंतेवाडा
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