00:00यहां बड़ी खबर किपलर के हवाले से आ रही है किपलर का कहना है कि अगर एरान ने स्ट्रेट ऑफ
00:05हर्मूस पर मिसाइल डाक कर इस समुदरी रास्ते को बंद कर दिया तो कच्छे तेल की कीमते 75 डॉलर प्रती
00:11बैरल से 100 डॉलर प्रती बैरल तक जा सकती है
00:15मैं आपको बड़ी स्क्रीन पर कुछ नंबर्स दिखाना चाहती हूँ जिसके आपको पहले से तैयारी कर लेनी चाहिए क्योंकि रेखिए
00:21ब्लाक इन वाइट वो शो है जिसके जरिये आप भी इस युद्ध को समझ कर खुद के लिए अपनी तैयारी
00:27कर सकते हैं
00:28रॉटर्स के मताबिक इस युद्ध के कारण कच्छे तेल प्राक्रतिक गैसों को ले जा रहे डेड़ सो समुद्री जहाज इस
00:34वक्त यहां पर फारस की घाड़ी जहां पर डेड़ सो जहाज अटके हुए है
00:53स्ट्रेट ऑफ अर्मूस हम लगातार आपको बता रहे तो वहाँ पर भी लिए चलते हैं उपर इरान है आप देख
00:58रहे हैं इसी लिए हम लोग बार बार कह रहे है कि इरान यहां पर यहां पर तो खाड़ी है
01:03फारस की खाड़ी उधर ओमान की खाड़ी बीच में जो यह रा
01:23की तरफ जाने से डर रहे हैं इन जहाजों को लग रहा है जो फारस की खाड़ी में इस वक्त
01:28भी पाक्ट है कि अगर हम स्ट्रेट ऑफ हर्मूस से आगे बढ़े तो इरान हम पर हमला कर सकता है
01:33इरान वैसे ही वहां कोनारक पोर्ट पर इस वक्त हमला कर चुका है और इस वजह स
01:38यह माना जा रहा है कि फारस की खाड़ी से अगर यह जहाज आगे जाते हैं तो इस तरह के
01:43हमले हो सकते हैं और इसके कारण कच्छे तेल प्राक्टित गैसों के आपूर्ती पर बड़ा असर पड़ता हुआ भी दिख
01:50रहा है देखें यह जो वहां पर पोर्ट से चार बार प
02:09अगर यह जारी रहता है तो कच्छे तेल की कीमते बहुत जल्दी प्रती बैरल सो डॉलर हो सकता है जूमिन
02:17करके दिखाए
02:19सो डॉलर प्रती बैरल और यहां पर अगर श्रेट ओफ और मूस से अगर आप देखें तो कच्छा तेल पचास
02:26पीज़ दी जाता है भारत का और एलन जी साट पीज़ दी ऐसे में भारत के नजरिये से भी अगर
02:33आप इससे गुद्द देखें तो कीमते कैसे बढ़ेंगी उ
02:37इस वक्त हमारा लगवक 50% कच्छा तेल, 60% लिक्विफाइड नाच्रल गयास इसी स्ट्रेट ओफ और मूर से गुज़र
02:43कर भारत में आता है
02:56भारत हर साल जिन कीमतों पर कच्छा तेल खरीदता है उसके मताबिक अगर कच्छे तेल की कीमतों में प्रती बैरल
03:03एक डॉलर की भी वृद्धी होती है तो पूरे साल में हमारा इंपोर्ट बिल सिर्फ हमारा इंपोर्ट बिल दो बिलियन
03:11डॉलर यानी 18,000 करोड रुपे ब
03:19सिर्फ एक डॉलर प्रती बैरल की भी कीमत बढ़ती है एक डॉलर प्रती बैरल तो भारत का सालाना इंपोर्ट बिल
03:27जो हम तेल खरीदते हैं वो दो बिलियन डॉलर यानी 18,000 करोड रुपे बढ़ जाएगा और इसलिए आप खुद
03:36यहां सोचिए कि अगर इस कच्छे तेल
03:37की कीमते में प्रती बैरल 25 डॉलर तक बढ़ गई तो इसका हमारे उपर कितना गहरा असर पड़ेगा 18,000
03:44करोड रुपे इंटु 25 का मामला हो जाएगा देश में महंगाई भी बढ़ सकती है
03:50हलाकि हम इस बात को भी जोड़ना चाहते हैं कि भारत स्थिती को संभाल भी सकता है भारत सरकार के
03:56मताबिक हमारे पास अभी कच्छे तेल का इतना बंडार मौझूद है कि हम 74 दिन तक 74 डेस तक बिना
04:03आयात के अपनी जरूरतें पूरी कर सकते हैं
04:06तो 74 दिनों तक हमारा मामला बिलकुल सेफ है हमारे पास इतना तेल है कि 74 दिनों तक बिना कोई
04:14भी इंपोर्ट बिना कोई भी आयात हमारी जरूरतें जो हैं वो हम पूरी कर सकते हैं
04:22अब देखिए अगर ये युद्ध लंबा खिचता है इसलिए बार बार भारत के नजरीये से अगर आप देखिए तो ये
04:28युद्ध लंबा ना कीचे यही सबसे बड़ी प्रात्मिक्ता है
04:32अगर शोट टम में ये खतम हो जाता है तब हमारी जेब पर कोई असर नहीं पड़ेगा
04:37इसके अलावा सोने और चांदी की कीमते एक बार फिर से बढ़ सकती है अगर युद्ध के कारण शेर बाजार
04:44नीचे आता है तो बहुत जल दस ग्राम सोने की कीमत दो लाख रुपे तक पहुँच जाएगी
04:49ये देखिए फिलहाल अगर आप देखिए ये कीमत पहुच सकती है अब हम आपको आज की कीमत भी बता देते
04:56हैं सोने की कीमत प्रती 10 ग्राम 1,66,000 हो गई है वही पर अगर आप चांदी की कीमत
05:03देखेंगे तो चांदी की कीमत 2,87,000 रुपे प्रती किलो पहुच गई है और
05:09चांदी की कीमते वापस से 3-4 लाख रुपे प्रती किलो पर पहुंच सकती है
05:15तो ये असर हो सकता है और यही वो वज़ा है कि हमने सोचा
05:19ये बात सीधे आप से जुड़ी हुई है भारत में भी शादियों का सीजन चल रहा है
05:23जो जून महीने तक चलेगा और इस दोरान हमारे देश में सोने चांदी की बहुत सादा खरीदारी होती है
05:28लेकिन एक्सपर्ट की सला है कि अभी युद्ध के माहौल में सोने और चांदी की खरीदारी से दूरी बना कर
05:34रखे
05:36ये युद्ध 28 परवरी को सुबा 11 बजे शुरू हुआ था और तब से लेकर आज रात 9 बजे तक
05:43इस युद्ध को करीब 60 घंटे भी चुके है
05:46बड़ा सवाल यही है कि ये युद्ध और कितने दिन चलेगा
05:51राश्रपती डॉनल्ड ट्रम का दावा है कि इरान की नई लीडर्शिप अमेरिका से बाचीत करने के लिए तयार है
05:56उन्होंने ये भी कहा है कि वो इंतजार करेंगे कि इरान के आम लोग सडकों पर उतरें
06:01इरान के मौझूदा इस्लामिक शासन को उखाड कर फेग दे
06:04यही बात इस्राइल के प्रधान मंत्वी बेंजमिन नितन्याहू की तरफ से भी की जा रही है
06:08बेंजमिन नितन्याहू तो जैसा हमने आपको शुरू में ही बताया था
06:11मौसाद ने इरान के नाशनल चैनल को हैक किया
06:17और उसके बाद वहाँ पर अचानक पूरा का पूरा प्रेजेंटेशन आने लगा
06:22पूरी की पूरी बात आने लगी बेंजमिन नितन्याहू की
06:25बेंजमिन नतन्याहू इरान के घरों में टेलिविजन पर दिखने लगे
06:30ये कहते हुए कि सडकों पर उतरिये और अपने इस शासक के खिलाफ इस शासन के रिजीम चेंज के लिए
06:37अपनी आजादी के लिए सडकों पर निकल लिए
06:39अगर खामनाई की मौत के बाद इरान के लोग ऐसा करते हैं तो अमेरिका और इसराइल अपनी तरफ से युद्ध
06:44को रोक देंगे
06:45और ये युद्ध अगले कुछ दिनों में ही खत्म हो जाएगा
06:48लेकिन अगर इरान के लोग ऐसा नहीं करते तो इसका मतलब ये होगा कि अमेरिका और इसराइल ने इरान में
06:55शासन व्यवस्था को बदलने के लिए जो हमले किये वो खामनाई की मौत के बाद भी सफल नहीं हुए
07:03इसे खमनाई अपनी मौत के बाद भी अमेरिका से जीट जाएंगे और उनकी ये बात सही साबित हो जाएगी कि
07:09इरान के लोग इसलामिक शासन को नहीं अटाना चाहते
07:12ये अमेरिका और इस्राइल के लिए बहुत बड़ा जटका होगा जिसका अभास उन्हें अभी से ही होने लगा है
07:1928 परविरी को ये वार शुरू हुआ और तब से लेकर आज तक तीन निन बीद गए इरान के लोग
07:25सड़कों पर नहीं उतरे
07:26राश्रपती टरंप ने दो बार इस्राइल के प्रधानमंसी ने तीन बार
07:31लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की उन्हें ये कहा कि उनके पास इस इसलामिक व्यवस्था को बदलने का
07:36आखरी मौका है
07:37लेकिन अब तक इरान के लोग सड़कों पर नहीं उतरे और इसके दो कारण हो सकते हैं
07:44पहला तो ये हो सकता है कि इरान के लोग अभी शायद थोड़ा सहमे हुए हैं डरे हुए हैं युद
07:48किस्तिती हैं गोला बारूद गिर रहा है
07:50और दूसरा ये हो सकता है कि इरान के लोग खामनाई के साथ है और वो अपने देश से इसलामिक
07:55शासन को हटाना ही नहीं चाहते है
07:57अगर इन में से दूसी बात सही साबित होती है तो ये अमेरिका के लिए बहुत बड़ी नैतिक, कूटनितिक हार
08:03होगी
08:04हलाकि नैतिक हारिसले होगी क्योंकि इरान के लोग अमेरिका के साथ नहीं आएंगे
08:09और कूटनितिक हारिसले होगी क्योंकि इरान की सत्ता ऐसे नेताओं के ही आतों में रहेगी
08:12जो इरान से कट्टर दुश्मनी और अमेरिका से कट्टर दुश्मनी और नफरत करते है
08:19और ऐसा होने पर अमेरिका युद करके भी इरान में अपने दखल को नहीं बढ़ा पाएगा
08:23इरान अमेरिका को अपना दुश्मन ही मानता रहेगा
08:27और खासकर तब जब कुछी दिनों पहले लगातार तस्वीरे आ रही थी ना कि सडकों पर लोग आयतल्ला खमनाई के
08:33खिलाफ उतर रहे थे रिजीम चेंज मांग रहे थे
08:35लेकिन ऐसा हुआ नहीं और आयतल्ला खमनाई के मरने के बाद अगर लोग रिजीम चेंज के लिए नहीं उतरते है
08:43तो अमेरिका के लिए ये एक नेतिक हर की और वज़ा होगी
08:47ऐसा होने पर आयतल्ला खमनाई के वो आखरी शब सच हो जाएंगे जो उन्होंने अपनी मौत से सिर्फ 11 दिन
08:55पहले बोले थे
08:56पिछले महीने की 17 तारीख आयतल्ला खमनाई आखरी बार किसी सारजनिक कारक्रम में शामल हुए थे
09:03जो इरान के इस आइसबाइजान प्रांत में हुआ था
09:06इस कारक्रम में उन्होंने अमेरिका को क्रंबलिंग इंपायर यानी धेहता हुआ सामराज्य बताया था
09:13ये कहा था कि अमेरिका के पतन को अब कोई ताकत रोक नहीं सकती
09:18आयतल्ला खमनाई ने शब्द शय ये भी कहा था कि अमेरिका इरान में इसलामिक रिपबलिक को खत्म करना चाहता है
09:24लेकिन वो ऐसा कभी नहीं कर पाएगा
09:26और अब जब बार बार अपील करने के बाद भी अमेरिका के लोग सड़कों पर नहीं उतर रहे हैं तो
09:32इससे यही लग रहा है कि खामनाई के आखरी शब्द सच हो रहे हैं और शायद ये युद्ध भी इरान
09:46में इसलामिक शासन को खत्म नहीं कर पाएगा
09:50हैं। ऐसा हम इसलें भी कह रहे हैं क्योंकि इरान की शासन व्यवस्ता दुनिया के बाकी देशों की शासन व्यवस्ता
09:56से अलग है।
09:57इरान में ना तो भारत अमेरिका की तरह लोग तंत्र है, ना सौदी अरब UAE की तरह राजशाही है, इरान
10:03में इसकी जगा थियोक्रसी है, थियोक्रसी वो शासन विवस्ता होती है जिसमें धर्म को सबसे उपर रखा जाता है और
10:11यह माना जाता है कि देश को वही लोग चलाए
10:17अब भी इरान में जो थियोक्रसी है वो अल्ला के नाम पर चल रही है, इसलिए इरान के शिया मुसल्मान
10:21अल्ला की शासन विवस्ता को हटाने के लिए खुद सड़कों पर उत्रेंगे, इसकी उम्मीद बहुत कम लगती है, अभी बहुत
10:29सारे लोग यह समझ रहे हैं कि खमन
10:45अल्मानों के सबसे बड़े विद्वान मौलाना को दी जाती है, उन्नीसवी शताबदी की शुरुआद में जब इरान में काजर राजवंश
10:52का शासन था, तब वहाँ उलेमा और आयतल्ला होते थे, इधारमिक मौलानाओं की वो मजलिस या काउंसल होती थी, जिसके
11:00फैसलो
11:00को इरान के राजाओं को मानना पड़ता था, एक वक्त ऐसा आया जब इन आयतल्ला और उलेमाओं से इरान की
11:08जनता इतनी प्रभावित हो गई कि उन्हें अपने राजा बुरे लगने लगे, और आगे चलकर साल 1989 में ही आयतल्ला
11:15को इरान का सरवोच चनेता मान लिया गया, �
11:17उनको सत्ता सौप दी गई, उनको इरान सौप दिया गया, कहने का मतलब यह है कि अमेरिका और इस्वाइल, खामनाई
11:24या उनके जैसे बाकी नेताओं को मार सकते हैं, लेकिन वो आयतल्ला को खत्म नहीं कर सकते, आयतल्ला अला के
11:32वो नमायंदे हैं जने इरान के लोगों ने
11:33अपने वोट से चुना और ये बात बड़ी है जिसके बारे में ज्यादा लोग नहीं जाना, देखें, 79 में जब
11:42इरान में राजशाही को हटाये गया, इसलामिक क्रांती हुई, ये क्रांती इरान के लोगों की मनजूरी से हुई थी, उस
11:48वक्त इरान को इसलामिक रपबलिक
11:49बनाने के लिए पूरे देश में वोटिंग कराई गई थी, 98.2 प्रतिश्यत लोगों ने इरान को अल्ला के मताबिक
11:56चलाने के लिए वोट किया था, इरान अगर कट्टर पंती की तरफ गया फिर से, और वहां राजशाही खत्म हुई,
12:02जो कि बहुत पहले खत्म हो चुकी है
12:06फिलाल वहां पर चल रहा है, इसके पीचे इरान के लोग खुद थे, और इसलिए हमें लगता है कि राज़पती
12:10डॉनल्ल ट्रम्प ने इरान में रिजीम चेंज के लिए जो हमला किया, वो हमला एक जुए जैसा था, इस जुए
12:16में अभी तो ऐसा लगता है कि इरान से इसल
12:19गताई नहीं होगा
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