00:00Muhammad, I will not go to the end of the day.
00:06Come on, Muhammad, I will not go to the end of the day.
00:20ुजोली मेरी या मुहम्मद लोट करने ना जाऊंगा खाली उन नवासो कसदी का अता हो
00:40साधूनित युग में जहां लोग आलाराम और डिजिटल मुबाइल एप पर निर्भर हैं लेकिन बुरहानपूर जिले का मुस्लिम समुटा है
00:48आज भी जो है शेहरी जगाने अलोपर निर्भर है उन्हें ऐसे आलाराम और मुबाइल एप की जरूरत नहीं पता दे
00:58कि बुरहा
01:12अजिए तो कई साल पुरानी परमपरा है और अभी फिलाल में तो हमारी चोथी पीडी चल रही है
01:20कि केसे जगाते लोगों को बहुत यह कलाम पढ़ते और उठो रोजदारों सहरी कर लो पहले के दोर में कुछ
01:29था नहीं तो पहले जगाते थे
01:31और आप क्या है आप जैसा जादागर के मुबाइल निकल गए तो इसलिए आप कम होगे जगाने वाले
01:38कितने सालों से जगा रहे आप मैं थिलाल में अभी दस साल से जगा रहा हूँ
01:42Where do you go?
01:45I went to Pertapura, Purghama, Khankawaat, Gulmur, Rawal Mandi, Rashiwala, Bala, Kalabas.
02:00यह एक पुरानी परंपरा है, और बहुत सालों पहले से, मैं तो बच्पन से देख रहा हूँ, कि 50-50
02:09फकीर आते थे पहले, सदाएं लगाते थे और सब को उठाते थे, अब कम आने लगे हैं, क्योंकि टेक्नलोजी बढ़
02:16गई है, इसकी वज़े से लोगों के पास मुबाइल
02:18हैं, टीवी है, तो उसके अंदर सब टाइमिंग एड़िस हो जाता है, अब इनकी जरूर देसा कम मैसूस होती है,
02:24उसके बावजूद भी वो परंपरा आज तक की चाल हुए, कि लोग आते हैं, सदाएं लगाते हैं, लोगों को उठाते
02:30हैं, बूरे हर्ज पूरे भरहानप�
02:37क्या ये रुजदार के लिए खुदा का फरिस्ता बन के आते हैं?
03:07बेनेफिट फाइदे भी हो जाते हैं इससे, उनकों को जकार, पेदरा, खाना, पैसा सब मिल जाते हैं.
03:38बेनेफिट फाइदे भी हो जाते हैं, ये कही ना कही नेखी काम करते हैं, और लान को उसका अज्री दिता
03:44हैं.
03:45कितने साल पुरानी परंपरा है?
03:47ये तो सदियों साल पुरानी परंपरा चली आ रही हैं, और आज तक के ये परंपरा जारियों सारी हैं.
03:54सोनु सोले युजी भारत गुरानी परंपरा चली आ रही हो जाते हैं.
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