00:00तीन माच को ग्रहन का प्रकोप कब मनेगा हुलिका दहन
00:05भद्रा ग्रहन और पंच्वांग के बीच उलजन में लोग
00:12पालगुन का महीना आते ही गलियों और मुहलों में एक अलगी रौनक दिखने लगती है
00:17कहीं बच्चे लकडियां इकठा करते निजर आते हैं तो कहीं घरों की साफ सफाई शुरू हो जाती है
00:22लेगिन इस बार हुलिका दहन को लेकर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है
00:26हुलिका दहन दोहदा चबस कब बनाया जाएगा?
00:29दो मार्च या तीन मार्च?
00:31दरसल हुलिका दहन हिंदू पंचांग के अनुसार फारगुन पृर्णिमा की रात को किया जाता है
00:35वो भी प्रिदोश काल में
00:37लेकिन इसके साथ एक एहम शर्त जुड़ी होती है
00:39उस समय भद्रा काल नहीं होना चाहिए
00:42साल 2026 में दो मार्च की शाम को पृर्णिमा तिथी और प्रिदोश काल दोनों मौजूद हैं
00:47लेकिन इसी दोरान भद्रा का प्रिभाव भी बना रहेगा
00:50जोतिश रास्तर के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन करना शुब नहीं माना जाता है
00:55इसी वजह से दो मार्च की तारीख को लेकर संशय बना हुआ है
00:59अब सवाल उठता है फिर तीन मार्च क्यों माना जा रहा है ज्यादा अनुकूल
01:03जोचिय अगरनाओ के अनुसार तीन मार्च को भद्रा का साया नहीं रहेगा
01:06हालाकि उस दिन पुर्णिमा देथी शाम तक समाप्त हो चुकी होगी और च्वंदर ग्रहन का प्रिभाव भी रहेगा
01:11लेकिन ग्रहन शाम 6.46 मिनट पर समाप्त हो जाएगा
01:16उद्यातिति के सिध्धान्त के अनुसार जिस दिन सुर्योदोय के समय पुर्णिमा होती है
01:20उसी दिन का शाम का प्रदोशकाल हुलिका देहन के लिए मानने रहता है
01:23इसी अधार पर तीन मार्च की शाम को हुलिका देहन करना ज्यादा शुब बताया जा रहा है
01:28और इसी के बाद 4 मार्च को होली
01:31साल 2026 में होली का दहन का श्रेष्ट मुहूर्थ
01:343 मार्च शाम 6 बच कर 46 मिनट से रात 8 बजी तक ये होली का दहन का मुहूर्थ है
01:39हलाकि कुछ स्तानों पर जो लोग 2 मार्च को ही दहन करना चाहते हैं
01:43भदर समाप्त होने के बाद 5 बदरा में ये अनुष्ठान कर सकते हैं
01:47अकसर गाओं में इस्थानिय बंडित के सला से और शेहरों में मंदिरों की घोशना के अनुषार समय तय किया जाता
01:52है
01:52तो ये थी होलिका दहन और होली की बात लेकिन क्या पौरानिक कहानी जानते हैं होलिका दहन की कि आखिर
01:58क्यूं जलाई जाती है होलिका
01:59तो आपको बताते कि होलिका दहन की परंपरा भक्त प्रहलाद और उसकी बुआ होलिका की पौरानिक कता से जुड़ी है
02:05कहा जाता है कि होलिका को आग में न जलने का वर्दान प्राप्था लेकिन एहंकार और अन्याय के कारण वो
02:10स्वैम जल गई और प्रहलाद सुरक्षित बच गए
02:13जली होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत एहंकार के अन्त और सकरात्मक्ता की शुरुवात का प्रतीक है
02:19ग्रामिन इलाकों में ये नई फसल से जुड़ा पर्व है जहां कसान गेहुं की बालिया अगनी में आरपत करते हैं
02:25वह इस शहरे मुलोग पुराने के लिए शुकवे जलाकर ने रिष्टों की शुरुवात का संकल्प लेते हैं
02:30आज की समय में परियावरण को ध्यान में रखते हुए कई जगे छोटी और प्रतिकात्मक होलिका जलाई जा रही है
02:35जो परंपरा और प्रक्रति दोनों के बते जिम्मेदारी का संकेत है
02:39उस खबर में इतना ही लेकिन आप जहां से ये वीडियो देख रहे हैं वहाँ पर होलिका दहन कब मनाई
02:44जा रही है
02:44होलिका मनाई जा रही है अमें कमेंट करके जरूर बताए
02:47और ऐसी और खबरों के लिए देखते रहें वान इंडिया हिंदी
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