00:00söh 60
00:11sagen
00:15पुलामु जैसे इलाके में हर्बल गुलाल एवं रंग का उत्पादन पिछले तीन वरसों में तीन गुना बढ़ गया है ड़हारखन
00:24लैबली हुड पर्मोसोनल सोसाइटी ने दो हजार पचीस में पांच क्यूंटल हर्बल गुलाल तैयार किया था
00:322026 में होली से पहले 10 कुंटल हर्बल गुलाल को तयार किया गया है
00:38इस हर्बल गुलाल एवं रंग को पूरे जहारखन में पलासमार्ट के माध्यम से बेचा जा रहा है
00:52इस पर जानकरी प्राप्त हुई है कि 10 कुंटल का टार्गेट है
01:00और इसे हमारे जितने भी ब्लॉक्स में जितने भी पलासमार्ट वगरे बने हुए है
01:05उसके तवरा इसका लिक्रे किया जाएगा
01:08हर्बल गुलाल एवं रंग को प्राकरितिक चीजों से तयार किया जाता है
01:13किसी को इनफेक्शन नहीं हो इसके लिए नीम के पत्ते का भी इस्तेमाल किया जाता है
01:19आम तोर पे खाने वाले सबजीयों से निकले रंग का ही हर्बल गुलाल एमम रंग में इस्तेमाल किया जाता है
01:27दो दिन में हर्बल गुलाल एमम रंग तयार हो जाते हैं
01:32बाद में इनकी पैकेजिंग कर बजारों में सकी दीदी के द्वारा भेजी जाती है
01:57जो अनुम हो रहा उसके नुसार रूजान कापी अच्छा रहा है लास्टेर सिर्फ लेस्रिंगर ने शुरू किया था इस पर
02:03लावडिया पजार और छेत्रपूर के माधिम से भी यह उत्पादन का कारिये किया जा रहा है
02:07पहले तेलकम पाउडर आरा रोट और गेंदा का फूल पलाज का फूल एंट्फेक्शन नहीं होने के लिए नेम का पाता
02:15हूंच करके इसी बनाते हैं
02:21यह हम लोग का दो दिन में तियार हो जाता है और इसका लागत हम लोग का पर केजी 300
02:27रुपया होता है
02:39पलामू के ग्रामिन इलाके में महिलाएं हर्बल गुलाल एवं रंग को तयार कर रही है और स्वालम भी बन रही
02:47है
02:47परति किलो 300 की लागत आ रही है लेकिन यह बजारों में 500 से 600 रुपय परति किलो के हिसाब
02:54से बीक रही है
02:56नीरज कुमार लिटी भारत पलामू
02:59झालम भारत पलामू के है लेकिन रही है
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