00:00तीन सो पचासवे शहीदी पर्वपर उनका पुन्य स्मरण कर रहे हैं।
00:09इस शहीदी समागम में उपस्तित सभी को मेरा प्रणाम इस आइतियासिक और पवित्र आयोजन का हिस्सा बन पाना
00:27मेरे लिए सवभाग्य की बात है।
00:34साथियों भारत का इतिहास शाओरिय, समन्वय और सहयोग का इतिहास है।
00:54महराष्ट की धर्ती पर इस आयोजन के जरिये हम उसी महान विरासत के साक्षी बन रहे हैं।
01:07जब हमारे गुरूओं ने त्याग की पराकाष्टा की, तब उस दोर में हमारी सामाजीक एकता की बहुत बड़ी भूमिका थी।
01:29हर वर्ग, हर समाज के लोगों ने हमारे गुरूओं से प्रेरणा प्राप्त की,
01:45समाज ने हर हाल में सत्य और संस्कृती के लिए अडीद रहना सीखा।
01:58सामाजीक एकता का वो महा यग्र उसमें स्री गुरू गोविंद सिंजी की गुरू नानक नाम लेवा संगत जैसे अनुस्ठानों की
02:15बहुत बड़ी भूमिका थी।
02:19आज जब फिर से देश को सामाजीक एकता की सबसे ज़्यादा जरुवत है।
02:51साथियों ये समागम एक निरंतर चलने वाला यग्र रहा है।
03:01इस यात्रा के शुरुवात पिछले वर्ष नागपूर की पावन धर्ती से हुई थी।
03:11फिर तकतसरी हजूर साहिब नांदेड की एतिहासिक भूमि पर हम समने उस भाव को और गहराते हुए देखा।
03:26और आज नवी मुंबई में ये यात्रा अपने एक महत्वपूर पड़ाव पर पहुँची है।
03:39इस यात्रा का संदेश इन तीन शहरों तक सिमित नहीं रहा है।
03:48महराश्ट के कोने कोने तक हजारों गाउं और छोटी छोटी बस्तियों तक
03:58स्री गुरु तेग बादुर साहब जी का वो पराक्रमी इतिहास पहुचाया गया है।
04:10मैं महराश्ट सरकार को विशेश तोर पर बधाई देता हूं कि उसने
04:27मैं मैं मैं मैं मैं मैं और ब्रभार खार गिजब मैं आज़ाएं कि पर लगवार गाद।
04:28झालया जी पलादी उसने तक सिमित विए्ट अवारे च जाएं पर नहीं तक सिमित पादूर साहत।
04:29झाल झाल
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