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  • 2 days ago
जमुई का सामाजिक संगठन नेचर विलेज. जहां महिलाएं बीड़ी छोड़ अब मसाले के साथ-साथ बना रहीं हर्बल गुलाल.

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00:05बिहार के जमुई के मठिया गाउ में जो हाथ कभी बीडी बनाया करते थे वही हाथ अब हरबल गुलाल बना
00:12रहे हैं
00:12इन महिलाओं को नेचर दीदी के नाम से जाना जा रहा है
00:16गाउं की 10 से 15 महिलाए पिछले 3 साल से होली के रंगों को प्राकर्तिक तरह से बनाने का काम
00:23कर रही है
00:24हम इस समय जमुई के मठिया में हैं
00:26आप जानते होंगे या पहले से भी नाम सुने होंगे जीब का दीदी के बारे में
00:49हरबल गुलाल को बनाने में किन चीजों का इस्तिमाल किया जाता है
00:53इसे लेकर ग्रामीन महिला मालती देवी बताती है
00:56क्या कर रहे है आप हरबल गुलाल कैसे बनता है आरा रोट में
01:05तुझी सुने कि इसमें फॉल वला और सब्जीब जी से बनता है
01:16कितना दिन से आप यहां काम कर रहे है और भी लोग यहां पर सुने कि
01:33वही हरबल गुलाल बनाने पर इन महिलाओं को कितने रुपे मिलते हैं
01:37जब हमने इस पारे में जैमंती देवी से पूछा तो वो कहती है
01:58नेचर दीदी का कॉंसेप्ट कहा से आया
02:00इसे लेकर नेचर विलेज के संस्थापक और लक्षमी पूर के पूर्व अजला धिकारी निर्भय प्रताप सिंग बताते हैं
02:08नाम जब हमलोग के यह स क्ज़ुकार करते हैं
02:23बिहार नेचर दीदी के नाम होगा को एक सम्मानित नाम करेगा
02:36The concept of nature is the name of nature.
03:06The concept of nature is the name of nature.
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