00:00बहुत सारी चीज़ों को समझने के लिए हमें इधिहास में लोटना पड़ता है और हमें पता है कि ये दरसर
00:07जो सामरजीवादी या एक तरीके से जिसको हम हिंदी में उपनिवेश्वादी ताक्तें जो हैं वो किस तरीके से अपना काम
00:14करती इसको समझिए जब अंग्रेज मह
00:29आए थे तो उन्हें राजस्तान के जो राजाओं को ऐसा लगा था कि ये वही लोग हैं जो हमें माराठों
00:35और पिंडारियों के आत्रमट से आजानी दिलाने के लिए आए हैं तो उनका स्वागत हुआ था तो ये ब्रहम की
00:41इस्तती पैदा होती है और ये होती है और वही हाल
00:44दर असल इरान में भी है इरान का वो तपका जो खासकर व्यापार करता है या जिनके बेटे विदेशों में
00:51पढ़ते हैं।
01:14क्याना चाहिए कि आधुनिक्ता की तरफ यह लोग नहीं गए यह अगर बात है कि वह मॉडेनिटी भले ही वेस्टन
01:20स्टाइल में नहीं होती वह बले ही इरैनी स्टाइल में होती पर उस तरफ भी नहीं गए और उनों ने
01:26जो धर्म का जो जो दामन है वह नहीं छोड़ा तो य
01:40साब साफ चाए वीक्तार कर रहा है तो पहली बात वो यह कह रहें वहाँ पर कितम प्लॉलीयम गैस और
01:46वह सब्सक्तार वाकितना है तो साफ साहब पर दूसरी बात एक्रल और की कर रहे हैं और उनों
02:10कि इरान को छेड़ने से पहले उन्होंने सीरिया में सप्ता परिवर्तन किया और प्रतिक्रिया देखी कि चीन और रूस की
02:18क्या प्रतिक्रिया हो सकती है उसके बाद में उन्होंने सिमित लड़ाई लड़ी और सिमित लड़ाई लड़ने के बाद में उन्होंने
02:24देखा कि क्या
02:25दुनिया की कैप्शितिक रहा हो सकती है और अब भारत के प्रदान रंत्री का भी वहां पे उतका दौरा हुआ
02:32था निश्ट क्रूप से जो बेनिया में नितनिया हो और उपकी लिए बात जरूर ही वोगी ज़िस्ट रखेद्व कि अब
02:39खरेगे और भारत को ऐसा कुछ नहीं क
02:55किया जाए और उसके बाद में जो समरंजी वादी उपनिवेश वादी पंजों को किस तरीके से पश्चिम एश्या में फैलाया
03:02जाए तो ये एक लंभी रंगती कार्था है पकल साहब
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