00:00अर्जुन ने अचानक एक पौधे की जड़ तोड़ी और उसे चखने के लिए मुह में डाला, उसे स्वाद अच्छा लगा,
00:04फिर उसने जमीन की घास खाई, और वो भी स्वादिश थी, पूरा जंगल खाने से बना हुआ लग रहा था,
00:07इसके बाद वो सावधानी से द्वी�
00:23पर मजबूर कर दिया, नहाने के बाद जब वो आराम करने जा रहा था, तभी शेरु नाम का बाग आ
00:27गया, वो कुछ खा रहा था, अजीब बात ये थी कि नेवले शेरु से डरे नहीं और भागे नहीं, शेरु
00:31को मज़े से खाते देख, अर्जुन मुसकुराया, लेकिन र
00:53द्वीब किसी इंसानी आकरती जैसा लग रहा था, उच सुकता में अर्जुन ने पेड से एक अजीब सा फूल तोड़ा,
00:57उसे खोल कर देखा तो अंदर एक इंसानी दान था, अर्जुन को यकीन हो गया कि ये कोई नर्भक्षी द्वीब
01:02है, उसे लगा कि उसे जल्दी से �
01:04अगली सुबह उसने जहाज में धेर सारा खाना भरा, पेड की जड़े और सैकडों नेवले, ये उसे और शेरु को
01:08कुछ दिन तक खाने के लिए काफी था, इसके बाद कोई उस नर्भक्षी द्वीब को फिर नहीं देख पाया, प्रास्ते
01:13में जब खाना खत्म हुआ, तो �
01:14शेरु पानी में मचली पकड़ने गया, लेकिन वो तैरने में नाकाम रहा और खाली हाथ लोटा, अर्जुन को ये देखकर
01:18हसी आई, लेकिन तभी शेरु उसकी ओर तैरने लगा, अर्जुन को खत्रा महसूस हुआ, और वो तेजी से जहाज की
01:23ओर भागा, वो किसी तरह ला
01:44शेरु के चढ़ने से पहले वो बेडे पर कूद गया, ताकि सुरक्षित रहें, अगली सुबह जब शेरु सो रहा था,
01:48अर्जुन ने लाइफबोट का सारा सामान बेडे पर ले जाया, सामान गिनते वक्त, एक बड़ी मचली उसके जाल में फसी,
01:53अर्जुन ने उसे पकड
02:09समुद्र में गिर गया, बिना खाने पानी के मौत निश्चित थी, भूखा शेरु फिर से खतरनाक लगने लगा, तभी एक
02:14उड़न मचली अर्जुन पर गिरी, उसने उसे शेरु को दे दिया, अचानक धेर सारी उड़न मचली आई, अर्जुन और शेरु
02:19ने मिलकर उन्हे
02:37उसका पहला मास था, उसे समझ आया कि समुद्र में जीवित रहने के लिए, उसे शेरु को पूरी तरह काबू
02:41करना होगा, वो नुकिली लकडी लेकर लाइफ बोड पर गया, शेरु डर से काप रहा था और गुर रहा था,
02:46लेकिन अर्जुन ने उसे मचली का टुकडा दिय
02:47वो शेरु को अपनी दोस्ती दिखाना चाहता था, फिर उसने एक और टुकडा फेंका, और शेरु को तिरपाल की ओर
02:52ले गया, धमकी और लालत से शेरु आखिर कार काबू में आ गया, इसके बाद अर्जुन मचलिया पकड़ने लगा, और
02:57खाली समय में बेडे पर आराम कर
03:00बारिश में वो ज्यादा से ज्यादा पानी इकठा करता, एक दिन उसे एक क्रूस शिप दिखा, उसने मदद के लिए
03:05सिगनल भेजा, लेकिन आखरी गोली चलाने तक कोई जवाब नहीं मिला, तभी एक तूफान आया, और अर्जुन निराश हो गया,
03:10लंबे समय बाद वो �
03:11शेरु भूग से ठकर डेक पर पड़ा था, अर्जुन को बहुत दुख हुआ, लेकिन अब वो सिर्फ मौद का इंतजार
03:15कर सकता था, लेकिन जब वो जागा, तो देखा कि वो एक द्वीब पर पहुँच गया था, उसने एक जड़
03:19तोड़ी और मूँ में डाली, स्वाद �
03:21अच्छा था, ताकत मिलने के बाद वो द्वीब पर घुमा, वहाँ धेर सारे नेवले और पानी के गड़े थे, अर्जुन
03:25ने पानी में तैरते हुए खूब पानी पिया, शेरु ने भी किनारे पर खूब खाया, लेकिन फिर अजीब बात हुई,
03:29नेवले पेड़ों पर च
03:46अगली सुबह, अर्जुन ने धेर सारा पानी और खाना इकठा किया, कई नेवले पकड़े और शेरु के साथ ध्वीब छोड़
03:51दिया, दोसो से ज्यादा दिन समुद्र में भटकने के बाद, उनकी टूटी-फूटी नाव मेक्सिकों के तट पर पहुँची, अर्जुन
04:09कम
04:09शेरु उसका मानसिक सहारा था, लेकिन अब वो बिना पल्टे चला गया, अर्जुन को अस्पताल ले जाया गया, बीमा कमपनी
04:14ने जहाज डूबने की जांच के लिए लोग भेजे, अर्जुन ने दोसो दिनों की कहानी सुनाई, उसने बताया कि जहाज
04:18डूबने पर एक ब
04:40अर्जुन फिर मस्तूल पर चड़ गया, कुत्ते को समुदरी बिमारी थी, इसलिए अर्जुन बच गया, तभी एक मादा चिंपैंजी केले
04:45के बेडे पर तैरती आई, अर्जुन ने उसे बचा लिया, लेकिन रात को कुत्ता भूखा हो गया, और उसने जेबरा
04:49पर हमला कर
05:03उसे पता था कि अगर उसने कुछ नहीं किया, तो वो भी मर जाएगा, उसने चाको उठाया, लेकिन तभी पता
05:08चला कि शेरु समुदर में नहीं डूबा था, वो तिरपाल के नीचे छिपा था, इसके बाद अर्जुन और शेरु की
05:13समुदरी यात्रा शुरू हुई
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