Skip to playerSkip to main content
  • 2 weeks ago
लखीमपुर खीरी के इस गांव के लोग पिछले 30 साल से नाम बदलने की लड़ रहे लड़ाई.

Category

🗞
News
Transcript
00:01लखिमपुर खिरी का एक ऐसा गाउं जिस गाउं का नाम बोलना और लिखना लोगों के लिए मुसीवत बनता जा रहा
00:07है
00:08ब्रिटिस काल में अंग्रेजों का यहां पे एक जमावडा था यहां के भीखंपुर गाउं में
00:14जहां पे अंग्रेजों ने एक अपना आसियाना बना रखा था उन्हीं अंग्रेजों ने इस गाउं का नाम हारंटे निश्मित रख
00:24दिया
00:24अब इस गाउं को बच्चे बूढ़े नोजवान लेना और लिखना और बोलना दोनों मुस्किल समझ रहे हैं
00:33यहां तक मेरी एक अध्यापक जी से बात हुई उन्होंने बताया कि ब्रिटिस काल में किसी अंग्रेज ने अपनी पतनी
00:41के नाम इस गाउं का नाम रखा था
00:43अब जहां भी हम लोग जाते हैं कोई सिलिप जमा करनी होती है कोई रसीद कटानी होती है तो लोगों
00:50को कई बार नाम बताना पड़ता है
00:57जब मेरी नहां पोस्टिंग होई दस साल पहले तो मैं यहां आया तो मुझे यह नाम थोड़ा सा अजीव लगा
01:02और अंग्रेजों के नाम भी यह नाम रखा गया था
01:05लेकिन यहां का जो लोकल नाम था वो ग्agarूओ का नाम झाल घरन लेकिन रिखार्ड में जो है एक बड़ी
01:11भी संगती हो गयी है कि लिखार्ड में इसका नाम तारेंटन स्मित या द राल दिया गया बहुत से लोग
01:16गामीनों
01:17foreign
01:25foreign
01:26foreign
01:26foreign
01:56Thank you very much.
02:26foreign
02:31foreign
02:32foreign
02:32foreign
02:32foreign
02:39foreign
03:02foreign
03:10foreign
03:11foreign
03:11foreign
03:25इस थारंटन इस्मृत गाउं का नाम लोग देहाती भासा में भावदा ग्रंट कहते हैं
03:33यहाँ पर एक भावदानात मंदिर है, उसी मंदिर के नाम से लोगों ने देसी नाम इसको दे दिया भावदा, लेकिन
03:41देसी नाम से कुछ नहीं हासिल हो रहा है, लिखा पड़ी में ठारंटर्न इसमृत ही हर जगे लिखा जाता है,
03:49चाहें वो इसकूल में हो, या खेती के खत
Comments

Recommended