00:07बिहार के नालंदा जिला मुख्याले बिहार शरीफ शहर का खंदक पर इस्थेत स्कूल आज मिसाल बन चुका है
00:16इस अनोखी पार्शाला में शिक्षक भी बच्चे और विद्यार्थी भी बच्चे हैं
00:21यहां इस्कूली बच्चे अपने आसपास मुहले के गरीब परिवार के बच्चों को खोज कर लाते हैं और स्कूल के सीनियर
00:29चात्र छुट्टी के बाद डेड़ से दो घंटे पढ़ाते हैं
00:36यहां पर ऐसे तो मैं अपने क्लास 9 से पढ़ा रही हूँ अभी मैं 12th में हूँ
00:40मैं अपना 3-4 साल यहां दी हूँ बच्चों के लिए जिन बच्चे को नहीं हो पाता है गरीब बच्चे
00:46हैं स्कूल नहीं जा पाते हैं
01:02इस स्कूल की शुरुआत कैसे हुई और इसका उदेश क्या था बता रहे हैं प्रिंसिपल बाबू टी थॉमस
01:13इसको शुरुबाद हो गिया है 2016 में उसका पीछे का मोटीव था अचली मैंने रोटरी कलब में जोइंडिया था दो
01:20जार शुरुदा में
01:22तो रोटरी कलब का तरफ से 3-2-5-0 मिन जाकंड बिहार मिला करके हमारा जो डिस्टिक्ट था रोटरी
01:28क्या
01:28वहाँ आम लोगों ने एक तो प्रोजेट शुरुदा कि इंडिया में जितनी भी स्टुडेंट से हास करके बिहार और जाकंड
01:35जा
01:35तो जितनी इलिटरेट सुरुदा जो स्कूल नहीं जाता है उन लोगों को आम लोगों 2025 तक लिटरेट बनाना
01:51गरीब माता-पिता के बच्चे इस स्कूल में पौड़कर काफी खुश है और कई तो स्कूल में टीचर की भूमिका
01:58में है
02:30और यहां तो हम मतलब 3 क्लास से आ रहे हैं और यहां तारिम दिया जाता है जैसे जो
02:36इंग्लिष का भी, मैद का भी और सभी सबजेक्ट का सबजेक्ट, सबजेक्ट प्ठाईट होता है और यहां पढ़के बहुत ही
02:43अच्छा लगता है और शुनिहे पापा।
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