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  • 20 minutes ago
नक्सलियों का सेफ जोन और सुरक्षाबलों के लिए लंबे समय तक 'NO GO' जोन रहे गोगुंडा में कैंप स्थापना के बाद तस्वीर बदल रही है.

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00:07बस्तर में विकास और उमीदों का नया सवेरा ही नहीं, बलकि नई साम भी हो रही है।
00:13ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि जो गाउं कभी शाम होते ही अंधेरे और सननाटे से पसर जाता था,
00:21वो गाउं चार दशकों बाद बिजली आने से रोशन हो रहा है।
00:26ये गाउं है सुकमा जिले का गोगुंडा।
00:56जो खड़ी पहाडी पर खंबा लगाया गया है, विजली खंबा इसके जरी अब गोगुंडा तक विजली पहुचाई जा रही है।
01:04खड़ी पहाडी पर अब देख सकते हैं ये सड़क है, सड़क का निर्मान कराया गया है।
01:09इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि कितनी चुनोती पून रही होगी इलाके में जब सड़क बनाई जा रही थी।
01:16ना सिर्फ नकसल बलकि दुर्गम भावगौलिक इस्थिती के चलते भी गोगुंडा इलाके में मूल भूत सुईधाओं का विस्तार करना चुनोती
01:25पूर्ण है।
01:26650 मीटर उची पहाड़ी पर बसे इस गाउं के लोग सूरज ढलने के बाद लालटेन और चिमनी के सहरे ही
01:34काम करते थे।
01:35जंगली जानवरों का डर भी हमेशा बना रहता था लेकिन सिर्फ एक बल्ब की रोशनी देखकर ही अब उनके चेहरे
01:43खिल गए हैं।
02:23बदलती तसवीर के पीछे,
02:25police, surakchabaloum
02:27और praşasinik adhikariyon
02:29के sanyugt-pariyas है
02:31जिसकी वज़ा से
02:32बिजली और सचरक के साथ
02:34अब praşasin बाकी
02:35बुनियादी सुईधाएं देने की भी
02:37तैयारी कर रहा है
02:38और गोगुंडा में भी
02:40सुशासन परिसर का कार जो है
02:42प्रारम हो गये है
02:42जिसके अंदर गत
02:43वहाँ पे स्कूल का निर्मान
02:45जिसे प्रात्मिक शाला
02:46आंगनवाडी निर्मान
02:47वहाँ पे पीडियस भवन
02:48सामुदाइक भवन
02:48एवं वहाँ पर इसके साथ-साथ
02:50जो है
02:52गाउवालों की मांग थी
02:53कि वहाँ पे हाड बयार
02:54शेड बनाने का
02:54यह सारे काम प्रक्रिय अदीन है
02:56इवं दो माह में पूर्ण भी कर लिए जाएगी
02:58वहाँ पे मेजर जो इश्यू पानी का भी आता था
03:00जिसमें वहाँ पे लगाता है
03:02साथ बोर किये गए
03:03जिसमें से 5 success भी हुए है
03:05और कुछ बोर से जो है
03:06pumps साबित करके वहाँ पानी की वैस्ता की जा दी है
03:11कि वहाँ पर पहले एक cycle को भी ले जाना
03:13पाना संभाव नहीं था
03:14वह एक steep चड़ाई करती थी
03:15मुलेग जो base camp था
03:16वहाँ से उस पहाड़ी को चड़ने में
03:18तकरीबन 3-4 घंटे लगते थे
03:19अभी विकास कारीश विधाओं के लिए
03:22medical education चिकित्सा के लिए भी
03:24वहाँ पे आदे घंटे में
03:26वहाँ के द्वागर पहुंचा जा सकता है
03:46गोगुंडा में
03:46चट इसगर पहुंडा
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