00:00नवावो का शहर लखनव ये तो ये शहर अपने अदब और तहजीब के लिए जाना जाता है
00:04लेकिन इसी शहर के एक बंद कमकान से जब बदबू आनी शुरू ही तो आसपास के लोगों का दम घुटने
00:10लगा
00:11किसी को भनक तक नहीं थी कि जिस दर्वाजे से वो रोज चक्कर काट रहे हैं
00:15उसके अंदर एक ऐसा खौफनाग राज दफ्न है जो पूरे इलागे की नीद उडाने वाला है
00:20पुलिस को ख़वर दी गई
00:22खाकी वर्दी जब इस घर के अंदर दाखिर हुई तो सनाटा पसरा था
00:25लेकिन पुलिस की नजर पड़ी घर के एक कोने में रखे उस बड़े ड्रम पर
00:30जब उस ड्रम का ढकन खुला तो पुलिस वालों के भी रोंग्टे खाड़े हो गए
00:34अंदर एक लास थी जिसे बेहद बेरहमी से ठीकाने लगाया गया था
00:39लास किस की थी? किस ने मारा? और क्यों मारा?
00:42जब पुलिस ने तफ्तीस की सुई घुमाई तो जो सच सामने आया उसने खोन के रिष्टों पर से भरोसा ही
00:48उठा दिया
00:49कातिल कोई बाहर वाला नहीं था बलकि उस घर का चिराग था
00:53वो बेटा जिसके लिए इस पिता ने नजाने कितने सपने देखे थे
00:57इस पूरी वारदात की सच्चाई जानने के लिए फ्लैक्स बैक में जाना होगा
01:05तारीख और वो रात जो इस परिवार के लिए आखरी रात साबित हुई
01:09घर में बाप और बेटे के बीच कहा सुनी होती है
01:12वज़ा थी पढ़ाई
01:13पिता चाहता था कि बेटा पढ़े लिखे कुछ बने
01:16लेकिन बेटे की लापरवाही पिता के बरदास्त के बाहर हो रही थी
01:20उस दिन बहस इतनी बढ़ी कि पिता का पारस साथवे आस्मान पहुँच गया
01:23गुस्से में आगव बोला पिता कमरे में गया
01:26और अपनी लाइसेंसी राइफल निकाल कलाया
01:28मकसद गोली मारना नहीं था
01:29मकसद था अपने बागी होते हुए बेटे को डराना
01:33उसे खौफ दिखाना ताकि वो लाइन पर आ जाए
01:35पिता ने राइफल तानी गालियां दी और फिर वो भयाना गलती कर दी
01:39जिसने उसकी चान ले ली
01:42डाटने के बाद पिता ने राइफल साइड में रख दी
01:44उसे लगा कि बेटा डर गया
01:46लेकिन वो नहीं जानता था कि उसने बेटे को डराया नहीं है
01:49बलकि उसके अंदर के शैतान को जगा दिया है
01:52जरा सोचिये एक पिता जो सिर्फ डराना चाहता था
01:55उसने हथियार रख दिया
01:56मामला वहीं शान्त हो जाना चाहिए था
01:58लेकिन उस एक मिनट में बेटे के दिमाग का
02:01गुस्सा रिष्टों को चीरते हुए
02:03इसकदर हावी हो गया
02:05कि उसके सोचने समझने की ताका थी खत्म हो गई
02:07बेटे ने आओ देखा नताओ
02:09पढ़ाई की डार्स से उसका इगो इसकदर हट हो चुका था
02:12कि उसने उसी राइफल से अपने हाथों में उठा लिया
02:15पिता कुछ समझ पाता पीशे मुर पाता
02:17उसने पहले ही गोलियों से पुरा कमरा गोज उठा
02:20गुसा शान्त हुआ तो खौफ ने दस तक दी
02:23बाप की लाज सामने पड़ी थी
02:25अब बेटे को जेल जाने का डर सताने लगा
02:28उसने पुलिस से बचने के लिए एक बेहद खौफनाक साजिश रची
02:32लाज को घर से बाहर ले जाना नाममगिन था
02:34इसलिए उसने तैंक किया कि लाज को घर में ही दफन करेगा
02:37उसने एक बड़ा ड्रम लिया और अपने ही पिता के शव को उस ड्रम के अंदर ढूश ढूश कर भर
02:43दिया
02:43लाज से बदबू ना आये इसके लिए उसने क्या कुछ नहीं किया
02:46लेकिन कहते हैं ना जुर्म कितना भी शातिर क्यों न हो वो अपने निशान छोड़ी जाता है
02:52कई दिनों तक बेटा उसी घर में उस द्रम के साथ सोता रहा जाकता रहा
02:56लेकिन जब लाश सरने लगी और पदबूर ने दरवाजे की चोखट पार की
03:01तो कातिल बेटे का सारा खेल खत्म हो गया
03:04यह घटना सिर्फ एक क्राइम ने दियूज नहीं है
03:05यह बहुत बड़ी चेतावनी है कि हमारे समाज के लिए घर में हत्यारों का होना
03:10और पल भर का गुस्सा कैसे एक हस्ते खेलते परिवार को दबाह कर देता है
03:15फिलाकरी बस इतना ही बाके अबडेट लिए रहे वन इंडिया हैंदी के साथ
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