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छत्तीसगढ़ में क्या है नीचे से ऊपर की ओर बहते पानी का रहस्य? देखें अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय

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00:00झाल झाल
00:36यहाँ पर पानी उपर की ओर चर्ती भी दिखती है
00:48पानी सच्च मुच में नीचे से उपर की ओर पह रहा है
00:53यह जन्नत का कैसा जादूई दर्या है
00:55आपको क्या लग रहा था?
00:57उनलों को भी वेचा मतकार लग रहा था
01:00यह उल्टी दुनिया का माया जाल है
01:04जो पानी का फ्लो है वो नीचे से उपर की दर पा रहा है
01:07यह साइन्स यहाँ पर आके खतम होता है मुझे ऐसा लगता है
01:09कुद्रत का करिश्मा है
01:13यहाँ पानी की धारा उल्टी पहती है
01:15पतलब में को तो लग रहा था कि चढ़ान है फिर भी मेरी गाड़ी कैसे चढ़ रही है वही सोच
01:19रहा था
01:19खलकी चढ़ान है आपर लेकिन गाड़ी ऐसी जारी है जैसे वो धलान हो गई है यहाँ चढ़ाई पर गाड़ियां खुद
01:28पखुद खिंचती है
01:32ऐसी जमीन तो मैंने पहले कभी नहीं देखी है यहाँ पाताल से निकलते जलजले में पाव तले जमीन हिलती है
01:54पुरी पहाड़ी हमें अद्बुट लगती है अद्बुट लग रहा है बिल्कूल है चमतकार
02:13यह कैसी दुनिया है यह कैसा करिश्मा है कैसा है यह उल्टी दुनिया का गहरा रहस
02:29हमारी दुनिया में हर चीज की अपनी चाल होती है पर जब यह चाल बदल जाती है तो बनता है
02:34कुछ अद्बुट अविश्वस्निय अकल्पनिय
02:37नमस्कार मैं हूँ श्वेता सिंग और ऐसा ही कुछ अद्बुट आज आपको हम दिखाने वाले हैं जैसे पहाड के उपर
02:45से नीचे की ओर बहने वाली नदी तो आप सब ने देखी होगी पर कभी देखा है किसी नदी को
02:51नीचे से उपर की ओर बहते हुए नहीं आगे सुनि
02:55पहाड पर गाड़ी चलाते हुए चड़ाई में एक्स्ट्रा ताकत लगती है ये तो आपको पता होगा पर किसी पहाड पे
03:03अगर बिना इंजिन स्टार्ट किये आपकी गाड़ी खुद बखुद उपर की ओर चहने लगे तो हमारी दुनिया में ऐसी कई
03:10जगे हैं पर ये क�
03:14चमतकार है या कुछ और आईए आपको उल्टे दावों की सीधी दुनिया में लिए चलते हैं
03:21क्या कभी सुना है पानी की धाराएं उल्टी बह सकती हैं क्या कभी देखा है बिना किसी मशीनी मदद के
03:30पाताल का पानी पहाड़ी पर चड़ सकता है
03:35क्या कभी आपने खुली आँखों से विज्ञान के हर नियम को तूटते देखा है अगर नहीं तो अगले कुछ पल
03:43में आपका सारा भ्रम तूट जाएगा
03:46पानी विपरीत दिशा में भी बहेगा और बिना किसी ट्रिक के पाताल से निकल कर पहाड़ की चड़ाई पर भी
03:53चड़ेगा
04:00पानी उपर जा रहा है निचे जाना चाहिए बलकि उपर चड़ रहा है तो यह कुछ नया दिखने को मिले
04:07हमको
04:07यह और देखा है अपना साथ यह फर्स टाइम पहला अनुगव है हमारा कोई चीज ऐसी हो सकती है जो
04:12पानी को उपर खींचे पानी अगर बहे तो उसे तो उपर से नीचे जा जी यह हम अभी तो इसे
04:17कुदरत का करिश्मा बागी कुछ नहीं बानता है
04:19उल्टी चाल उल्टी बात उल्टी रीत उल्टी सोच सब कुछ उल्टा लेकिन उल्टा पानी न दुनिया में कही किसी ने
04:27सुना न किसी ने देखा लेकिन यहां 36 गड़ में इस जगे पर पहले हमें बोर्ड नजर आया और अब
04:33यह उल्टा पानी नजर आ रहा है जहां पर �
04:36चड़ाई उस ओर है आप देख रहे हैं और पानी भी उस ओर बह रहा है ये कैसे मुम्किन कुद्रत
04:45की अध्भुत रहस्यमई धाराओं का रहस्य समझने अध्भुत अविश्वस्निय अकल्पनिय की टीम पहुंची 36 गढ़ के अंबिकापूर हमें पता चला
04:55कि अंबिकापू
05:06यानी उल्टी सडक और दलदली जमीन सारी चे जी पूरा उल्टा लगता है और ये अध्भुत पूरा मैनपार्थ है अपन
05:13उल्टा पानी है जलजली है
05:19बारिश के मौसम में मैनपार्थ की पहाड़ियां बेहद खूबसूरत लगती हैं हर तरफ हर याली लेकिन इसी पहाड़ी पर बसे
05:26एक अध्भुत गाव विसर पानी में एक रहस्य सालों से विज्ञान को चुनौती ले रहा है
05:34यहाँ पानी उल्टा बहता है एक छोटे पत्थर के नीचे से पानी की धारा निकल कर एक पहाड़ी पर करीब
05:41दो किलो मीटर उंचाई तक चड़ती
06:07पानी की धारा के इस उल्टे बहाव के कारण ही इस स्थान का नाम अब उल्टा पानी पढ़ गया है
06:14जो भी इस उल्टे पानी को देखता है देखता ही रह जाता है
06:21क्योंकि पानी की मूल प्रवृत्ती है कि वो उपर से नीचे की ओर बहता है
06:26दुनिया की हर नदी इस निखम पर बह रही है
06:31उत्तराखंड की पहाड़ियों से निकलने वाली गंगा भी गंगोत्री से निकल कर मैदानी क्षेत्र की ओर बढ़ती है
06:43लेकिन 36 गड़ के अंबिकापुर में तो जैसे उल्टी गंगा बह रही है, सब कुछ उल्टा है
06:49इस पेड़ के नीचे से निकल कर पानी पहाड पर नीचे की ओर न जाकर ऊपर की ओर जा रहा
06:56है
07:05कई भूबे ग्याने भी आये, कोई बोलता है यहाँ पर गुर्टवाकर्शन जीरो है, इस कारण पानी पहाड की ओर जा
07:12रहा है
07:12कोई बोलते हैं कुदरत का चमतकार है, अभी तक कोई थोस निसकर्स नहीं आया है कि किस कारण से पानी
07:20पहाड की ओर जा रहा है
07:22कागस की कष्टी और बारिश के पानी का जो खेल है, बचपन में खूब खेला है सबने
07:26लेकिन यहाँ पर एक एक्सपेरिमेंट के तौर पर हम खेल रहे हैं इस खेल को
07:30जहां एक पहाड है और यह जो पतली सी नहर है, जैसे उल्टा पानी यहाँ कहा जाता है
07:36हो ऊपर की तरफ बह रही है, हमने पूरे दायरे में वॉक करके देखा है, तो करीब-करीब
07:402 km का दायरा यह है, अब इसमें यह नहीं समझ में आ रहा है कि पानी नीचे से ऊपर
07:45की और कैसे बेश रखता है
07:46कि आप पानी को भी कोई चुम्ब किया शक्ति कीच सकती है ये सारे लोग यहां के जो लोकल है
07:51वो यही कहते हैं लेकिन ये समझ से परे है इसलिए हम इस कागस की कश्टी से ये जानने की
07:58कोशिश कर रहे हैं और सचमुच में ये पानी का जो प्रवा है वो सिर्फ हमारे आखों
08:09में यही दिख रहा है और हमारे जो कागस के नाव हैं इस बात की तस्दीक कर रहे हैं लेकिन
08:14हम आगे अभी इसकी जाच करेंगे कि ऐसा हो क्यू रहा है आखर
08:20उल्टा पानी का सच जानने के लिए हमने कई प्रयोग किये कागस की नाव बना कर इस पतली धारा पर
08:26बहाया
08:39की ओर जाने में पानी को कोई रुकावट आ रही है ऐसा लग रहा था कि भले ही पानी पहाडी
08:45पर चड़ रहा हो लेकिन पानी की स्पीड ऐसी है जैसे पानी ऊपर से नीचे बह रहा हो
08:53यहां पे आपको लग रहा है कि पानी उपर की तरफ चड़ रहा है हाँ मैंने वीडियो भी लिया एक
08:57दम जूम करके सही में पानी उपर की तरफ चड़ रहा है क्यों अभी वो तो खुदर का करिश्म इसका
09:02तो कोई लॉजिक कोई नहीं समझा पाएगा कि क्यों गाओं वाले �
09:33स्थानिये लोगों के लिए ये एक सामान्य बात है यहां पर सालों से जगह जगह
09:48पानी के ऐसे स्त्रोथ फूटते रहें इसका प्रयोग किसान अपने खेती के लिए करते रहें
09:54मद्य चतिजगर बिलासपूर रिजन बिरासपूर और रायपूर की तरफ में बीसर का मतलब होता है लोटना और हमारी तरफ जो
10:01हम लोग सरुजा की तरफ जब रहते हैं
10:04तो इस तरफ हम लोग इस भासव को बिसर का मतलब होता है रिसाव पानी का रिसाव बिसर रहा है
10:11मतलब निकल रहा है जब इनों से तो
10:14� Arkि मीन जन्हों को झाड कर दो हम लोग यहां मानते हैं कि यह जो उल्टा-पानी
10:22प्रविर्थी है तो लुट यहोथ को पना हिए राज चुपा हुआ है और यह जो उल्टा-पानी
10:34अब द्रहाल में इसके पहक्चान हुई है लेकिन जो हम्लोग इसको मानते हां
10:44सवाल उठा कि फिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि उल्टा पानी रहस्ये बनकर विज्ञान को चुनोती देने लगा
10:50हमने पड़ताल को आगे बढ़ाया तो नई कहानी सामने आई
10:57कमली जी आप सबसे पहले आपने एक तरह से इसे दुनिया के सामने रखा उल्टा
11:02जी मेडम हमारे सिक्षक साथी यहां से गुजरते थे उन्होंने बताया कि यहां पर पानी उपर की और चर्ती भी
11:08दिखती है
11:09मैंने आकर के खोटे शूटे नाव बनाया और कुछ पत्तों को चलाया तो उसका विदियो बनाकर के यूटूब पर डाला
11:15और यूटूब पर लब 5-6,000 लोगों ने इसको देखा और काफी लोगों ने सेयर किया
11:33कुछ ही दिनों में उल्टा पानी इतना मशहूर हो गया है
11:37कि यहां पर देश के कोने कोने से लोग पहुँचकर कुदरत के इस अविश्वस्निय करिश्मे को खुली आँखों से देख
11:44रहे हैं
11:45पहली नजर में तो किसी को यकीन ही नहीं हो रहा है कि ऐसा अध्भुत करिश्मा भी हो सकता है
11:51चौकाने वाली बात ये है कि ये सब कुछ-कुछ निश्चित क्षेत्र में हो रहा है
11:57पानी के साथ साथ हम जब पहाडी पर चड़े तो हमें कुछ दूर जाकर इसका आखिरी छोर भी दिख गया
12:03मतलब पाताल से निकल कर पानी कुछ दूर तक पहाडी पर तेज रफ्तार से चड़ता है
12:09लेकिन इस जगह पर आकर पानी बिल्कुल शान्त हो जाता है
12:12ऐसा लगता है पानी को खींचने वाली शक्ती यहाँ पर आकर शून्य हो जाती है
12:18पानी की तेज धारा यहाँ पर आकर ठहर जाती है
12:22इसे उल्टा पानी का अंतिम छोर कहा जा रहा है
12:25वीडियो तो देखा हुआ है यूट्यूब बगरे पर वीडियो देखा हुआ है मैगनेटिक हिल करके तो पहली बार देखा लाइव
12:31के पर्टिकुलर ऐसा भी होता है वीडियो तो देखा है वो तो देखा पर लाइव देखे में कुछ मजा अलग
12:36यहाँ अगर हम यहाँ पर उ
12:54ओठे से उपर की ओर जा रही है, जहां पर वो लोग खढ़े हैं, यहां धलान हैं, वहां उचाई, अब
13:02सवाल उठता है कि आखिर ऐसा हो क्यों रहा है? क्या ये सिर्फ आखों का धोखा तो नहीं है? ऐसा
13:08तो नहीं है कि जो हमें खुली आखों से दिख रहा है, वो भ्रम है. �
13:12ठीक वैसे ही जैसे गर्मियों के दिनों में रेगिस्तान में लोगों को पानी का भ्रम हो जाता है।
13:17सत जानने के लिए हम पहाडी पर उपर गए और वहां से पूरी तस्वीर को परखने की कोशिश की।
13:24तो यहां नीचे की ओर हमने वो नाव रखे जो उपर की ओर बहे हैं यही एक्सपेरिमेंट हमने किया है
13:30और अब यहां उपर से देखने में साफ साफ लग रहा है।
13:33यह इस उचाई की ओर यानि चड़ाई की ओर पानी के साहरे वो सारे नाव दें।
13:40इस सड़क पर अगर आप अपनी गाड़ी बंद करके न्यूट्रल पर डाल दें तो गाड़ी खुद चलने लगती है
13:53अध्भुत बात ये है कि गाड़ी धलान पर नहीं बलकि पहाड़ी पर चड़ने लगती है
14:02पहाड़ी के जिस हिस्से में मैं नीचे से उपर की ओर आ रही हूँ
14:05दरसल ये वही जगह है जहाँ पर लोग अपनी गाड़ीों को अगर बंद कर देते हैं
14:10और उसके बाद न्यूट्रल गेर में डाल कर छोड़ देते हैं
14:13तो गाड़ी खुद बखुद यूँ ही से मैं चल रही हूँ वो उपर की ओर आती है
14:17बिना कोई ताकत लगाए बिना इंजिन को स्टार्ट की
14:20और इसी लिए यहाँ पर लोग सोच रहे हैं कि उल्टी सड़क में उल्टी दिशा में गाड़ियां यूँ बिना किसी
14:27मदद के बिना किसी सहायता के आगे बढ़ कैसे रही हैं
14:45गाड़ी का इंजल बन चापी हाथ में पहाड़ी पर उंचाई की ओर न जाने कैसे रफटार में भाग रही है
14:52ये गाड़ी
14:52क्या ये कोई करिश्마 है ड्रिक है या फिर जमीन में है कुछ अध्बुत शक्ति जो हर चीज को ऊपर
14:59की ओर खींच रही है
15:29चाबी बाहर है आपकी?
15:30कि यह चड़ाई ऐसा नहीं है कि यह अद्भुत अनुभव सिर्फ कुछ लोगों को हो रहा है जो भी इस
15:41सड़क पर गाड़ी चलाता है या फिर गाड़ी पर सवार होता है उसे ऐसा लगता है जैसे कोई शक्ति उसे
15:46अपनी और तेजी से खींच रही हो अद्भुत यह है कि य
15:52साइंस के नियम के बिल्कुल उलट है साइंस कहता है कि कोई भी चीज गुरुत्वा कर्शन के कारण ऊपर से
16:03नीचे की ओर जाती है लेकिन यहां तो सबकुछ अद्भुत है अविश्वस्निय है तो क्या यहां गुरुत्वा कर्शन का नियम
16:10लागू नहीं होता है या फिर �
16:11गुद्रत कोई मैया चमतकार दिखा रही है अगर आप आखों से यहां पर देखें वह बहुत जादा डिग्री ओफ एलेवेशन
16:20तो नहीं दिखता है लेकिन हां आपको क्यामरे के फ्रेम से भी दिख गया होगा कि गाड़ी आपको ऊपर आती
16:25हुई दिख रही है उपर ऊप
16:26पर जाते हैं हलकी चढ़ान है यहां पर लेकिन गाड़ी ऐसी जारी है जैसे वह धलान हो गई है गाड़ी
16:31के लिए इस तरह से जारी है कि आप कहां के रहने वाद हम कुनकुरी के रहने वाले हैं पास
16:36मैं आपने कभी ऐसी सड़क देख नहीं नहीं आज हम आपनों गाड़ी
16:40चलाते हैं, ऐसी सड़क पे चलाई है काई?
16:42ऐसी सब्सक्राइब पे गाड़ी चलाई है, लेकिन
16:43गाड़ी को हम को चलाना पड़ाइब गाड़ी बंद करके
16:45चाबी निकाल के हम लोग देखे, और सिर्फ ये ये देखने हम लोग
16:48इतने दुर्मेन पाटाए.
16:49पर चाबी निकाल के देख लूँ और मतलब कैसा उल्टा पानी है गाड़ी
16:55चड़ती आप बूफर चड़ती है क्यू लग रहा है यह थी आपको छका डौपना कर दोका भी सबस्ट perceptions मुझा
17:03वदो यह रही है किंगा तो ना
17:27प्रकृती के विपरीत हो रही इस क्रिया में एक और आश्चरय जनक बात है
17:33कार नीट्रल गियर पर होने के बाद उचाई की ओर धीरे धीरे नहीं अच्छी खासी गती में आगे बढ़ती है
17:39करीब एक 100 मीटर तक कार चढ़ाई चढ़ जाती है
17:42इसकी उचाई नीचे से उपर तक करीब 5 फीट है कुछ-कुछ ऐसी
17:49हैरान करने वाली बात ये है कि अगर उपर पहाड़ पर चढ़ने के दौरान कार को नहीं रोका गया
17:55तो ये अनियंत्रित होकर पलट जाएगी कई बार ऐसा हो चुका है
18:01कि अगर चढ़ाई एक दम नीचे जाना चीए ता आपको चा लग रहा है तो नीचे उपर से उपर जा
18:21रहा है
18:31कि आपको क्या लग रहा था हम लोग भी सुने थे कि यहां पर ऐसी होता है धलान पर भी
18:38चढ़ाओ पर गाड़ी चड़ती है करके तो हम लोग वहीं ट्राइग करने और दिखने आए
18:44जो बातें विज्ञान के तरकों पर नहीं टिकती उसे ही दुनिया खुदरत का करिश्मा कहती है और मैनपार्ट की पहाड़ियों
18:52पर ऐसी घटनाएं विज्ञान के लिए अद्भुत पहेली बनी हुई है
18:59लेकिन क्या सच में विज्ञान के पास उल्टा पानी और अद्भुत सड़क का जवाब नहीं है इस सच को जानने
19:07के लिए हमने अपनी पड़ताल का दायरा बढ़ाया तो एक नया सिरा हमारे हाथ लगा
19:11हमें पता चला कि उल्टा पानी से सिर्फ आठ किलोमीटर दूर एक ऐसी जगह है जहां जमीन पर अद्भुत करिश्मा
19:19हो रहा है यहां पर इंसान जैसे ही उचलता है जमीन उसे स्प्रिंग की तरह और उपर उच्छाल देती है
19:25अद्भुत यह है कि यहां पर पाम तले जमी
19:28जमीन हिल रही है यह जानकारी मिलते ही हमें लगा हो ना हो उल्टा पानी के रहस्य का कोई ना
19:36कोई सिरा तो जरूर इस जमीन से जुड़ा होगा लिहाजा हम चल पड़े उस रहस्यमई जमीन की ओड़
19:48कभी पैरों तले खिसकती जमीन के बारे में सुना है यह पैरों तले उचलती हुई जमीन है जो बात सबसे
19:56ज्यादा अद्भुत है वो यह कि जहां उल्टा पानी को दिखा रहे थे उसे मुश्किल से चंद किलोमीटर के दाएरे
20:02में यह जगे भी आती है यह भी अपने आप
20:12कि अज़ार कि पानी को उसके पर परत जम्मा है
20:48जम्प करते हैं जाद भी उपर फेटे हैं जाए तो
20:57हाँ चमतकार चमतकार लगा भी
21:02अगर इस जमीन के नीचे दलदल है तो फिर ये धस्ती क्यों नहीं
21:09अगर इस जमीन के नीचे अथा पानी है तो फिर ये फटती क्यों नहीं
21:15अगर इस जमीन के नीचे को यादबुद पुद्रती स्प्रिंग है तो बैज्यानिक उसे धून क्यों नहीं पा रहे
21:22क्या है इस जमीन का रहसी क्यूं याद बुद्ध जमीन इंसान को फुटबॉल की तरह उच्छाल रही है क्यूं इस
21:29जमीन पर पाउं रखते ही ऐसा लगता है जैसे भूकम पा गया हो
21:34जांचे की पाउं पीड़
21:42अब जांचे की पानी होगा उसको पर यह परत जमा है
21:48परत जमाहिं को हील मतलब यह दर जो मुमेंट कर रहना जी जो वह जासे लग रहा है अपन को
21:55ऐसी जमीन देखी है कहीं
22:18इस जमीन की सबसे अधोत बात यह है कि आप जितनी तेजी से यहां उचलेंगे उतनी तेजी से जमीन अंदर
22:25धासेगे
22:25और फिर उतनी ही तेजी से यह आपको ऊपर उचाल देगी ठीक वैसे ही जैसे कोई बच्चा नर्म बुलाएं गद्डे
22:33पर उचलता हो
22:58जो भी जमीन पर पाउ रखता है उसे एक अधभूत एहसास देता है
23:06ऐसा लगता है कि अब नहीं तो तब वो जमीन में खस जाए
23:12हर कदब पर डर लगता है लेकिन मज़ेदार बात यह है कि किसी भी वजन का इंसान आज तक इस
23:18जमीन में खसा नहीं
23:20अग्यों तो बिल्कुल डंडल टाइचे लग रहा था करके पर अंदर जा रहा था मतलब जिसे ओंप रदे आधि ऊपर
23:35फेक दे रहा
23:36कभी से लग रहाते के अंदर चले जाएंगे लेकिन गयर नहीं अंदर क्यों स्पांज टाइप से लग रहाते हैं
23:44यहांसे डलडल में पैर जाता है नीचे यहांद इसे पहले कभी कहीं इसे दखा था नहीं नहीं कभी नहीं देंगे
23:55वंडरलाइंड बैनपार्ट की इस सबसे अधुत जगे को जलजली कहते हैं
24:00कोई इसे बाउंसिंग लैंड, कोई इसे स्पंजी जमीन कहता है
24:03लेकिन इस जमीन में उच्छाल का कारण क्या है? ये रहस्य ही
24:10हमने भी जब इस रहस्य की परताल शुरू की
24:12तो हमारे सामने अलग-अलग कहानी आई
24:17जलदली जमीन जो है वहाँ पर मतबब उचलते हैं तो वापस ये आपको क्या समझ
24:22ये हमारे पूरवज कहानी बताते हैं कि एक राजा की बरात थी
24:27वो राजा की बरात वहाँ डूब गई और राजा जी वहीं समाधी हो गया
24:30तो इससे वो जमीन हिलती है ऐसा हमारे पूरवज बताते हैं
24:43अबुमन अगर लोगों को कोई बात समझ में नहीं आती है तो उसे वो देविये चमतकार का नाम देते हैं
24:48यहाँ पर लोग कह रहे हैं कि यह जो सारी चीजें हैं वो खुदरत के करिश्मे की वज़े से हो
24:53रही हैं
24:54आयए हमारे साथ मिलकर इस रहस्ते की पड़़ताल करते हैं
25:05अध्भुत मैन पार्ट में अब तक हमारा सामना खुदरत के तीन रहस्तियों से हो चुका था
25:09पहला उल्टा पानी, दूसरा चड़हाई पर अपने आप गारी को खीजने वाली चुम्ब की ये सड़क, और तीसरा इनसान को
25:22आकाश में अपने आप उछालने वाली अध्भुत जलजली जमीन.
25:29हम ये जानना चाहते थे कि क्या इन तीनों में आपस में कोई रिष्टा है? क्या मैन पाट की अध्भुत
25:34घाटी में ही कुछ ऐसा है जो अध्भुत, अविश्वसनिय, अकल्पनिय है या फिर विज्ञान यहाँ पर पूरी तरह से हार
25:41चुका है?
25:44सबसे पहले हमने जलजली की सच्चाई जानने की कोशिश की. हमने ये जाना कि जमीन का इतिहास क्या है? जमीन
25:51का ये रूट क्या बरसों से ऐसा ही है? या फिर हाल फिलहाल में किसी भौगोलिक कारण से जमीन ने
25:57अपनी मूल प्रवृत्ति को छोड़ कर ऐसा रूप अख्ति
26:11से परकरार था. इन तीनों रहस्यों की गहराई में जाने के लिए हमने भूव एग्यानिकों से संपर्क साधा. जलजली जमीन
26:25को लेकर जो उनकी थियोरी है? आए हम पहले वो समझते हैं.
26:32पहली थियोरी ये है कि जलजली के आसकास जलस्त्रोथ हैं जो समय के साथ उपर से सूप गए और अंदर
26:39जमीन दलदली रह गए. दूसरा ये एक टेक्निकल टर्म लिक्वी फाक्शन का उदाहरण है. वैग्यानिकों के अमसार लिक्वी फाक्शन ये
26:49इशारा करता है कि यहा
26:59दलदली शेत्र का निर्माण हुआ था. एक सिध्धान्त ये भी है कि प्रिथवी के आंतरिक दबाव और पोर स्पेस यानि
27:06खाली स्थान में सॉलिड के बजाए पानी भरा हुआ है. इसलिए ये जगह दलदली और स्पंजी लगती है.
27:13जमीन स्पंजी है. जमीन उपर नीचे हो सकती है. वो वेवकन रूप हो सकती है. और ऐसे जगह हैं. सिर्फ
27:19यहां पर ही नहीं है. दुनिया में भी ऐसे जगह हैं. समुदर में भी ऐसे जगह हैं. और समुदर में
27:24जो जगह हैं वो पूरी तरसा फ्रोटिंग आइलेंड है. �
27:26तो जितने फ्रोटिंग आइलेंड है, उसके उपर में भी ऐसी घटना होती है।
27:30ऐसा इसलिए होता है कि नीचे का जो भाग होता वो दलदली होता है।
27:35उसमें कहीं न कहीं पर किसी न किसी रूप में पानी सीप करके आ चुका है।
27:50में पाट की जमीन में पानी का स्तर जितना है, उसे देखकर ये तर्ट लाजमी है।
27:56तो क्या उल्टा पानी का रहसी भी यहीं से सुलचता है।
28:03कभी भी भुकम बाया होगा या किसी स्थान पर कोई दरार पड़ी होगी, तो उसके आसपास के नदी का पानी
28:09है, वो नीचे में सीप करके चला जाता है।
28:11अब अगर नीचे पानी सीप परके चला गया और नीचे पानी को निकलने के फिर जगह बाद में नहीं बिरे
28:16तो नीचे पानी रह जाता है उपर की जमीन भी रह जाती है
28:19उपर की जमीन इतनी पानी इतना नहीं होता है कि जमीन गिली हो पाए
28:23तो उसके उपर में जमीन लगभग खाहरी हुई दिखती है और वो पानी के उपर में लगभग ताइटे हुई दिखती
28:29है तो इसके लिए उपर में इस पॉंगी हो जाता है असानी से उपर नीचे वो जा सकता है
28:36आईए उल्टा पानी के रहस्य को समझने के लिए फिजिक्स के कुछ एक्सपेरिमेंट्स करते हैं
28:41हमने काच के दो ग्लास लिए, एक में पानी भर दिया, दूसरे को खाली रखा
28:46पानी वाले ग्लास को हमने नीचे रखा और खाली ग्लास को थोड़ा उपर
28:52अब पिशु पेपर से एक पतला रोल बनाया और उस रोल का एक सिरा पानी वाले ग्लास में डाल दिया,
28:59दूसरा सिरा खाली ग्लास
29:03अब आप गोर से देखें तो नीचे होने के बावजूर पानी वाले ग्लास से खाली ग्लास में पानी आना शुरू
29:10हो गया
29:11इसे physics की भाषा में capillary action कहा जाता है
29:16मुम्किन है उल्टा पानी की पीछे ये कारण हो
29:22ऐसे तो जनली science में ऐसा नहीं होता कि gravity के अगेस्ट कोई काम करे
29:26एक होता capillary action जैसे कि पेड़ों में पानी जाता है
29:29अगर आप capillary में पानी एक ग्लास में बतो उसके फूप एक सक्षन होता उससे जा सकता है
29:34लेकिन नॉर्मली कोई पानी एंटी gravity नहीं होगा
29:39हुईता पानी के इस रहस्य को हम आपको एक दूसरे experiment से की समझाते हैं
29:45यहाँ source of water यानि पानी का स्त्रोथ उचाई पर जहां से पानी प्रेशर के साथ गिर रहा है
29:51और इसी force के कारण पानी थोड़ी दूर तक उल्टी दिशा में जा रहा है
30:00उल्टा पानी का जो स्त्रोथ हमें नजर आ रहा है
30:03मुम्किन है उसका असली स्त्रोथ पाहाडियों के नीचे से होता हुआ कहीं उचाई पर हो
30:09जिस कारण स्त्रोथ से निकलने के बाद वो कुछ दूरी तक उपर की और पानी को जाने में मदद कर
30:17रहा हूँ
30:21वो सकता है उल्टा पानी के पीछे इन कारणों में से ही कोई बज़े हो पर चुम्बतिय पहार का क्या
30:28क्या क्योंकि यहां गाड़ी चलाने वाला हर एक व्यक्ति यहीं दावा कर रहा था कि पहार मानो उसे उपर की
30:35और अपनी तरफ खीच रहे हूँ
30:40तरसल मिगनेटिक हिल का ऐसा दावा केवल 36 गड़ के मैंपार्ट में नहीं बलकि हमने खुद इसे गुजरात के अम्रेली
30:47में अनुभग किया था
30:55यह हमने आपको दिखाया 36 गड़ का इलाका पर इसी तरह लद्दाख में भी एक पहाड़ है जिसे मैगनेटिक हिल
31:02कहा जाता है
31:02उसकी चुम्बकिये विशेशता की वज़े से और गुजरात में भी अम्रेली में ऐसा ही एक पहाड़ है
31:09तो 36 गड़ की अपनी परताल के साथ हमने गुजरात के इस मैगनेटिक हिल का रुख किया
31:15जरा हम भी तो देखें कि कोई भारी भरकम गाड़ी कैसे नीचे से पहाड के उपर खीची चली जाती है
31:23एक ऐसी सड़क जहां बंद गाड़ियां भी चड़ाई चड़ जाती है
31:30एक ऐसा पहाड जहां कोई अध्रिश शक्ती उपर की उड़ खीचती
31:37पहाड़ी बंद गारको तो उसका एंजिन बंद करने जे भी गाड़ी उपर जाती है नीचे री आगगए यह थोड़ा आगै
31:42किलो मेटर में यह साथ होगा चम्मेने कुछ प्रपा होगे
32:04हैमताबाद से करीब 200 किलो मीटर दूर है अमरेली जिला घने जंगलों के पीच से गुजटती यह सड़क देखने में
32:11किसी आम रास्ते की तरह ही है जिस पर लोगों का और गाड़ीयों का आना जाना लगा रहता है
32:17लेकिन सड़क के इर्दगिर्द ऐसे और विश्वस्तिय राज है जिनको कोई सुल्जा नहीं पाया
32:34जाड़ी यह पीच्छे जाती है यह डाल पर गाड़ी से रिवेश्ट पर चलती है आधे किलो मेटर में यह साथ
32:39हो चम्मेने कुछ प्रूपा होए यह सही है
32:46चड़ाई के रास्ते में आपको गाड़ी रोकनी होती है तो आप हांडब्रेक लगा कर उतरते हैं
32:51लेकिन इस सड़क पर कोई भी गाड़ी धलान पर न जाकर अपने आप चड़ाई की दिशा में बढ़ने लगती है
32:59ऐसा लगता है जैसे कोई ताक करते से नीचे जाने से रोक रही
33:03किसी भी गाड़ी को इस सड़क पर एक खास पॉइंट पर लाकर न्यूट्रल में छोड़ते ही
33:08कार धलान पर न जाकर चड़ाई पर जाने लगती है
33:11जबकि ग्राविटी के नियम कहते हैं कि उसे बीचे की ओर जाना चाहिए
33:21सचमुच में पहाड का कोई ऐसा खंड हो सकता है जो की चुम्बकिये शक्ति रखता हो
33:26कि गाड़ी यहां से आगे की तरफ स्टार्ट करकर तो चले लेकिन जहां पर उसे ब्रेक लगा के न्यूट्रल में
33:34डाला जाए
33:34वहां से पहाड उसे खुद बखुद खीज ले हम इसकी विस्तार से पर्टाल करने वाले
33:44हमारे सामने कई सवाल थे अवल खुद गाड़ी में बैटकर ये महसूस करना कि क्या रुकी हुई गाड़ी उपर की
33:51ओर जाती है
33:57दूसरा कि क्या यही असर बाकी चीजों पर भी पड़ता है
34:04तीसरा कि अगर यहाँ चुबगिय शक्ती है तो क्या उसे यंत्र से मापा जा सकता है
34:11चौथा ये कि यहाँ की प्राकृतिक धलान की सोर है यानि कहीं हमें आखों का धोका तो नहीं हो रहा
34:21ये सारे एक्स्पेरिमेंट्स करने के लिए हमने अपने साथ ली एक गेंद क्यूकि गोलाकार चीज से धलान का पता चल
34:28सकता है
34:28एक कंपस और मागनेट ताकि हम चुम्बकिय क्षेत्र का पता लगा सके और सबसे एहम काड़ी ताकि ड्राइब करके कहानी
34:37की परताल की जा सके
34:40एक मेगनेटिक कंपस साधारन तौर पर दिशा बताने के लिए होता है
34:44इसके अंदर एक सुई होती है जो हमेशा उत्तर की ओर दिशा दिखाती है
34:47मेगनेटिक कंपस पृत्वी की मेगनेटिक फील्ड के अनुसार काम करता है
34:51लेकिन जब कुई बाहरी चुम्बक इसके पास लाया जाता है तो सुई में कमपन होता है और ये दिशा भ्रम
34:57कर सकता है
34:58पहार के कथित तौर पर चुम्बकिये इलाके में जाने से पहले हमने प्रयोग का पहला पाड़ गिया
35:07जैसे ही हम चुम्बक को कमपस के पास लेकर आए इसकी सुई कापने लगी और कमपस गलत दिशा बताने लगा
35:17सवाल ये है कि क्या पहाड के मेगनेटिक खंड पर बिना चुम्बक ऐसा ही होगा हम तयार थे एक पेहद
35:25अद्बुत अनुभव के लिए
35:28हमने देखा कि अम्रेली की उस सड़त पर बीचों बीच एक गोल निशान बनाया गया था जहां लोग जाकर अपनी
35:34गाड़ियों के साथ उल्टा चलने वाला प्रयोग कर रहे थे
35:48तो हमने गाड़ी यहां लाकर इसे न्यूट्रिल में कर दिया है गाड़ी को बंद कर दिया है अब मैं यहां
35:54पर इसमें बैट के मैं खुद देखना चाती हूं क्यूंकि लोग तो इस तरह के
35:57experiments कर रहे हैं लोग तो हम देख रहे हैं यहाँ पर मज़े के लिए यहाँ पर आते ही अपनी
36:01गाड़ी को बंद कर ले रहे हैं लेकिन मैं जरा बैट कर देखूं कि क्या सच मुच में इसमें बैटने
36:07के बाद और वो हैंग्वेक हटाने के बाद सच में यह गाड़ी अपने आप
36:24को बंद करके न्यूट्रल में डाल दिया और रोपने के लिए हैंड़ेक लगा दिया फिर ब्रेक पर से पैर हटा
36:30लिये उसके बाद हैंड़ेक को जैसे हटाया गाड़ी खुद पखुद बैक होने लगी और कई मीटर तक पीछे तीजी से
36:37जाने रगी काड़ी किसी से टक्र
36:52कान की दिशा में न जाकर चड़ाई पर अपने आप चड़ी जा रही थी ऐसा लग रहा था जैसे कोई
36:58अध्रिश्य शक्ती गाड़ी को उपर खीच रही थी तो क्या असाधारन चुम्बकिये शक्ती वाली बात सच थी हमारी उत्सुक का
37:06पड़ती जा रही थी इसलिए इसक
37:08की परताल ज़रूरी थी हम अपने साथ एक रबर की गेंद भी ले आये था गेंद को जब जमीन पर
37:17रखा तो पहली बार में तो उसमें कोई ज्यादा हरकत नहीं हुई
37:21शायद गेंद अपने हलके वजन और खुर्दुरी जमीन के कारण नहीं लुरकी हो अगली बार जब थोड़ी सी ताकत लगाकर
37:28हमने गेंद को दोबारा चड़ाई की तरफ धक्का दिया तो वो भी नीचे से उपर की ओर चल पड़ी
37:36अगर पानी और रबर की गेंद भी धातू की चीजों की तरह ही बरताब कर रहे हैं तो क्या हम
37:41ये मानें कि ये किसी चुम्बकिय शक्ती का नतीजा नहीं
37:43पर अगर चुम्बकी ये शक्ती नहीं है तो फिर गाड़ियों को कौन खीच रहा है।
37:48हम किसी निशकर्ष पर पहुँचें उससे पहले आपको पृत्वी पर कुछ और ऐसी जगहें दिखाते हैं।
37:56अमरेली से 2400 किलोमीटर दूर लगता।
37:59ले से 30 किलोमीटर की दूरी पर ये कारगिल बटालिक राश्ट्रे राजमार्ग पर समुद्र तल से 14000 पीट की उचाई
38:06पर स्थित है मैगनेटिक हिल।
38:08खुबसूरत पहाड़ियों के बीचों भी जाते इस रास्ते पर एक बोर्ड लगा है।
38:13जिस पर अंग्रेजी में जो लिखा है उसका हिंदी अनुवाध हम आपको बताते हैं।
38:19चुम्ब किये पहाड़े। गुरुत्वा करशर को चुनोती देने वाली जगे।
38:22अपनी गाड़ी सड़क पर सफेद रंग से पेंट किये गए बॉक्स के निशान पर खड़ी करें।
38:30लदाख वाली मेगनेटिक हिल में भी वही सारी खुबियां बताई जाती हैं जो हमको अमरेली में नजर आई।
38:35गाड़ीों का चढ़ाई पर अपने आप चढ़ना, पानी का उल्टी तिशा में बहना, ये भी कहा जाता है कि इस
38:42जगे पर इतनी ज्यादा चुम्ब किये शक्ति मौजूद है कि इसके उपर से जब हवाई जहाज गुजरते हैं तो वो
38:48भी अपनी उचाई बढ़ा लेते है
38:49ताकि उड़ान पर कोई असर न हो, अब सुबह का वक्त है सूर्योदे को देखते हुए, सूर्य के पुजिशन को
38:56देखते हुए हम कह सकते हैं ये हिस्सा पूर्व है और ये हमारा कमपस भी दिखा रहा है, हमारा कमपस
39:01कह रहा है कि इस तरफ है, नौर्थ इस तरफ, वेस्�
39:16कोई असर न हो रही है, ये कमपस इस बात की तस्दीक नहीं कर रहा है कि यहाँ पर कुछ
39:21चुम्बक किये हैं, हमने देखा कि हमारे मिगनेटिक कमपस में ऐसी कोई असाधारन हरकत नहीं हो रही थी, जैसी पहाड़ी
39:36पर आने से पहले चुम्बक को पास लाने पर हुई थी,
39:39तो क्या कमपस के मुताबिक इस इलाके में कोई असाधारण मेगनेटिक पिल नहीं है?
39:44अगर हाँ, तो क्यूं सारी चीजे गुरुत्वा कर्शन की उल्टी डिशा में जा रही?
39:55मेगनेटिक इलाकों की पर्ताल करते हुए, हमें स्कॉटलन की एक ऐसी ही मेगनेटिक हिल कही जाने वाली पहाड़ी के बारे
40:00में पता चला।
40:01स्कोटलिन की इस पहाड़ी की भी खासियत वही है जो भारत में अम्रेली और लदाख की पहाड़ीों की है।
40:11लेकिन वहाँ गेहन वैज्ञानिक रीसर्च की वे जो नतीजा सामने आया वो हर मेगनेटिक हिल की फ्योरी को सुल्चा गया।
40:24यानि रास्ता जैसा नजर आता है वैसा नहीं है।
40:28समुद्र की सपह से अगर ना पा जाए तो जिस तरफ चढ़ाई नजर आ रही है उस तरफ हफीकत में
40:34धलान है।
40:35और गाड़ियां उसी तरफ यूट्री करने पर चलने लगती है।
40:38आसपास की पेड़ बौधी और लांड्सकेप ऐसा नजरा फेश करते हैं कि आँखों को भ्रम हो जाता है।
40:45ऐसे इलाकों को मेगनेटिक इसी लिए कहा जाता है क्योंकि लोगों को ऐसा लगता है कि गाड़ियां किसी चुम्बकिये शक्ती
40:53के कारण पहार की तरफ उपर की ओल खीची चली जाती ही।
40:57हमने मेगनेटिक हिल के दावे को भी एक एकस्पेरिमेंट के जरिये परकने की कोशिश की।
41:09हमने एक टेबल पर एक उल्टा दिखने वाला इंकलाइन प्लेन बनाया है।
41:14अब इस उल्टे इंक्लाइन फ्लेन पर हमने जैसे ही एक तॉय कार को छोड़ा, वो उल्टी दिशा में चल देती
41:20है।
41:21दोबारा देखिए!
41:27आखिर ये कार हमारे एक्सपेरिमेंट में ग्राविटी के विरुद्ध क्यों चल रही है?
41:31दरसल सचाई ये हैं, कि जैसा आपको दिख रहा है, जैसा है नहीं।
41:48देखा आपने, आप जिसको चड़ाई समझ रहे थे, दरसल वो चड़ाई है ही नहीं, वो तो धलान है, और धलान
41:56पर सामान ये तरीके से ही कार चल रही है।
42:01इस तस्वीर में हम लोगा ने गेंड डाली यहां से, तो यह उपर के ओर जा रहा है।
42:04यह भी गेंड डाली, यहां से भी उपर के ओर जा रहा है।
42:08यहां से डाली, तो यह भी उपर के ओर जा रहा है।
42:10यहां भी डालेंगे तो यह उपर के ओर जाएगा।
42:12दिखने प्ले है कि सारी गंदे उपर की ओर जा रही है, सारे वाल्स उपर की ओर जा रही है,
42:16यह वास्तविक्ता नहीं है, वास्तविक्ता है कि इसके देखिए तस्वीर कैसे आती है, इस रूप में आती है, इसके औरियेंटेशन
42:22को लोगों ने चेंज कर दिया, अब आप दे
42:42है तो उन्हें लगता है कि उनकी कई धलान के उपर की बूढ जा रही है रे और नीट्रो गेर्ड
42:46में ढहरी है विवा इस हुर
42:47वे सविय रूट मैं ग्रैविटी से नीचे की बूढ जाती है लेकिन आज पासक के उतनेithe
42:52वातवरन है जो दिश्य है उसके अनुरूप होने लगता है कि वो ऊपर क्यों जा रहा है
42:57हो सकता है यह हमारा एक इल्यूजन हो जैसे कि नॉम्मल सर्फेस से एक इनर्सियल फ्रेम में हैं
43:18आपको जिस सड़क पर आखों से चड़ाई नहीं है वलकि ठलान है
43:24आजपास का माहौल पहाडियां और पेट आपकी नजरों के सामने एक ऐसा दोका ऐसा ओप्टिकल इल्यूजन बनाते है
43:32कि आपको विल्कुल उल्टा लगता है
43:34यही वज़े है कि गेम और पानी भी
43:37चड़हाई की दिशा में आपको चड़ते हुए नजर आएंगे
43:40जबकि वो धलान की ओर ही लुढ़क रहे होते हैं
43:48कमाल की है हमारी दुनिया और अध्भुत हैं इसके रहसे
43:52अध्भुत और विश्वसनिय और कल्पनिय में आज के लिए इतना ही
43:55देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप देखते रहे हैं आज तक
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