00:00बिवाद यह है कि जब हमारी माँ भगवती की यहां आर्थी चल लेती तब उस समय मज्जद से पत्फराव चाली
00:05हो गया और यह हमारी आस्था के सीधा प्रहार है कि आर्थी के समय लेकिनका तेवहार है आप अपना तेवहार
00:12अपना मनाई हमेशा सांधी से मनाते आ रहे हैं �
00:15अजार चौक सबसे चर्चे समीटी है और सबसे प्रतिस्टर प्रहस्तान है यह नो जोड़ी दुर्गा उस्तों समीटी शहुरा च्यत्र रगा
00:22वहां पर पत्थराव करना हमारी आस्था के सास्थ सीधे प्रहार है और यहां पर यहां केंद्र पे भाच्चपा की सरकार
00:28मद्
00:43बवाद का प्थम दस्टा कोई बाच्चीत में हुए कि क्या आवाद करो या नहीं करो या कुछ नहीं यह आरती
00:50के आरती चल लाई है उनको यह था कि किसी भी तरह इंकी आरती रोका जा और यह सुन्योज़त तरीके
00:55से था क्यूंकि मजज़त में इतने सारे पत्थर कहां से
01:00पहले से यह कि यह बवाद करना है यह बताई आप केमरा लेकर आए आप तैयारी से आए ना आप
01:10यह सोची हुई समझी हुई चाल है कि सब पहले से था यह कोई तटकाल में नहीं था
01:28यह लंसम साड़े नौ के आजपास माभवती क्यारती हो रही थी लंसम उस समय की बात है और अट्राइक टाइम
01:34तो बताने सकता हुए लेकिन लगवक साड़े
01:35नौ के बाद और करीब होई 11.11 के लगवा के तक नजबारदात यहां सब हुआ है और इसका नर्नय
01:41चाहिए है चाहिए और भाशपा दे चाहिए और वी जितने दल है इससे मतलम नहीं है निरनय चाहिए यह बड़े
01:49-बड़े मंचों से भासरद देने से और अपना प्रचार
01:51पसार करने से कुछ है नहीं होगा यहां बोट लेने के लिए आते हाथ-पाँ जोड़ते हैं क्यों लेते हैं
01:56इसके लिए लेते हैं यह आज के दिने देखना पड़े हैं को यहां पर जैन मेरा नाम अंकित बड़्डू गुपता
02:03है मेरे पूज पता स्री का नाम विहारी ला
02:06और भुपता है मैं आजात इछब निवाशी मेरा घर यह आप बेक्राइब लूमें देख रहे हैं पीछे ग्रिन कलर का
02:12खेला ख़ड़ा है वो मेरी होटल है मैं अपनी होटल मेरा यद्यू होटल चला रहाता दा जैसे ही साड़ी नव
02:18वज्य आृति सुरू होती
02:19तो मैं अपनी आर्ती में मेरी रोच की आदत है जैसे घंटा सुनाई देते हैं तो मैं दो मिनट के
02:25लिए पैर पड़के फर होटल में आ जाता हूं जैसे ही मैं बहा गया तो सामने देखा तो साकिर मकरानी
02:30मज्जद से निकला कहने लगा आप आर्ती बंद करो तो मैंने कहा भा
02:46पर नहीं कर सकते यहां पर आरती ने का भाई क्यों नहीं कर सकतेरें में जृद हको बुलाइए और ऋबडालाया
03:06और मज्द के वच्छें आर्ती में अहां
03:14में हमारे पुजारी हमारे धोलंग माश्टर सबको इननों मारा फट्वर से मारा हास से मारा जो जैसे मिल रहा था
03:20अब हमारे छोड़े-चोटे बच्चे हम उनको बचाने के चक्कर में हमारे भी अंदूरी नी चोट लग गई है और
03:26कल ऐसा माहूल हुआ कि मुझे दो मिनिट क
03:42में खाया फ़र आया फिर मैं अपनी मंदर में फूरी रेक रेक सटर अटर बंद किया इसके वाद भी फट्राव
03:47बहुत तेज हो गए थे मैं तो प्रशासन के माल करता हूं अगर मैं गलत हो तो मेरी उपर कारवाई
03:53करो वो गलत हो उनकी उपर कारवाई करो लेकिन जरूर कर
03:58आप जो बुल्डोजर चलाती है वो चलाओ कि विवाद का प्रमुक कारण यह है कि आरती शाड़े नौ बज़े जो
04:07शुरू हुई वो आरती क्यों शुरू कर ली आपने तो मैंने कहा है आरती तो रोज हो रही माताजी कि
04:13इस्तापना पिछले देड़ साल से हुई है रोज हो �
04:16है पहली बार नहीं है तो कहने लगे नहीं आपने आरती क्यों शुरू ही आरती के पीछे विवाद रेलिंग तोड़ी
04:22गई हमारे मंदर के अंदर फटर मारे गए जो चाल से लगी थी चाल से उखाड़ी गई मता हम बता
04:29नहीं सकते कल का माहुल कैसा था उंजेला देखके हम
04:32को बढ़ा अच्छा लग रहा दात की अंधिर में तो मैं तो में मरे बडाबर हो गया रहा इसकी कंडिसन
04:39खराब हो गई थी थी रही स्युक्रेश
04:41अरे छोटे-छोटे बच्चे हैं देखिए कोई आज की दुनिया में कोई किसी से नहीं डरता लेकर अपने बच्चों को
04:48देखके वो डरता है मैं भी अपने बच्चों को देखके डर गिया था कि हमारी छोटे-छोटे बच्चे कहां जाएंगे
04:52मैंने खटा-खट हमारी नगर
05:17झाल झाल
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