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  • 7 minutes ago
ग्वालियर में बैजू बावरा महोत्सव का समापन, पद्मश्री पं ऋत्विक सान्याल की ध्रुपद प्रस्तुति देख श्रोता दंग, तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा तानसेन सभागार.

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00:00गौालियर में आयोजित हुए बैजु बावरा महोतसव के तीसरे दिन पंडित रित्रिक सान्याल की संगीत सभा और धुपद पर प्रिस्तुती
00:08के साथ इस आयोजन का समापन कारिकरम राजामान सिंग तोमर संगीत एवं कला विश्विध्याले के तांसें सभागार में पूर
00:16तीन दिवसी बैजु बावरा महोतसव के समापन दिवस पर विशे विशेशक यके रूप में वाराणरसी से आये पदमश्री पंडित रित्रिक
00:24सान्याल गायन में दृपत के महत और बैजु बावरा पर उदबोधन और बैख्यान दिया साथ ही सांगेतिक प्रस्तुतियां
00:30भी उन्होंने दी कारिकरम के समापन में गौलियर के पूर उसांसत विवेक नराइन सेजवल कर भी मौजूद रहे वहीं कारिकरम
00:37को लेकर विशेव ध्याले की कुल गुरू प्रोफेसर समिता सैस्तर बुद्दे ने कहा या एक सफल आयोजन रहा इस आयोजन
00:44में जिस तरह स
00:45वरिष्टों की सहभागता रही और जिस तरह उन्होंने अपनी बातें कहीं और बच्चों को सिखाई उतनी गंबीरता से बच्चों ने
00:52भी उन्हें आत्मसाथ किया है इस द्रस्टी से यह एक सफल आयोजन माना जा सकता है उन्होंने यह भी कहा
00:59कि जितने भी लोग यहां आ
01:00उन्होंने व्यक्तिगत अनभव के आधार पर इस कारेक्रम को हर साल आयोजित करने की इच्छा जाहर की है
01:07जैसा कि आप सभी को ग्याद है कि यह ब्रेजु बावरा महुत्सव अजया मान सिंग तो मैं संगी त्यों कलाविश्व
01:14द्यालव प्रयास साहिति संगी और शिक्षा समीति कूच वालियों के संयुक्त तत्वा उधान में हुआ
01:22जो सत्रा तारीख को चालू हुआ और मेरे इसाब से मुझे ऐसा लगता है कि इस आयोजन में जिस तरह
01:32के वरिष्ट जनों के सहभागिता रही और उन्होंने जिस तरह से अपनी बातें यहां कहीं है जो चीजे हमारे बच्चों
01:39को जो सामने बैठे थे उनको सिखाई हैं ब�
01:50और जितने भी वरिष्ट जन आएं उनका जो विक्तिगत अनुभाव रहा या जो उनसे बातचित हुई तो यही कहके गया
02:00है कि इस तरह के आयोजन निरंतर होने चाहिए और वो स्वेम भी संतुष्ट रहे जिखिए आयोजन का जो आमंत्रन
02:11था वो लगभग सभी को दिया �
02:15सबी जगे शास्की रूप में भी दिया गया और विक्तिगत रूप में भी दिया गया लेकिन ये विधा और ये
02:23जो शैलिया है ये ऐसे ही नहीं है कि एकदम बीड आके उसको सुन ले सीखले समझ ले सिर्फ टेक्निकल
02:31विक्ति या लोग ही इसको इसमें आनंद भी ले पात
02:36और मुझे असा लगता है इसी समय इसी अवधी में नगर में बहुत सारी दिविधिया भी रही कुछ लोगों कि
02:42आए व्यक्तिगत कारण से विभा अदिल का प्रसंग भी रहा संभवत इसलिए थोड़ी से संख्या कम रही लेकिन संतुष्टिस बात
02:51की कि जो लोग भी उप
03:01एवी भारत
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