00:28।
00:30फिलाल आज इस वीडियो में बात सलीम खान की इसलिए क्योंकि सलीम खान इस समय हॉस्पिटल में और हालत काफी
00:36नासुपटाई जा रहे हैं।
01:28उनकी नेटवर्ज की बात करते हैं।
01:30इसके बाद तीसरी मंजल सरहदी लुटेरा दीवाना जैसी करीब दो दर्जन फिल्मों में उन्होंने छोटे मोटे रोल किया।
01:38कई फिल्मों में तो क्रेडिट में नाम भी नहीं आया।
01:52इसके बाद वो फिल्म निर्देशक की रूप में काम करने लगे।
01:55और जावेद अक्तर के साथ मिलकर कमाल की फिल्म में बनाई और बॉलिवुट में अपनी अलग पहचान बनाई जो आज
02:02तक पर करार है।
02:03सलीम जावेद की जोडी की बात की जाए। तो 1978 के दशक में इस जोडी ने बॉलिवुट में ख्रांती ला
02:10दी। छे फिल्म फियर अवार्ड्स जीते। इस टाइम पर इनकी फिल्मों का जलवा चारों तरफ था। इन फिल्मों ने ना
02:18सिर्फ अमिताब बच्चन को सूपर स
02:19बनाया, बलकि लेखकों को उनका हक और सम्मान दिलाने की लड़ाई थी लड़ी। इस जोडी ने शोले जोकी 1975 में
02:27आई। उसके बाद 1975 में ही आई दीवार, सीता गीता 1972 में आई, जनजीर 1973 में आई और हाथी मेरे
02:36साथ ही 1971 में आई। इन सभी जैसे फिल्मों को लिख कर ब�
02:45पेमस फिल्मों में से हैं जो लोगों के दिलों पर राज करती हैं। सलीम खान के बारे में फिल्म इंडस्री
02:50में कहा जाता है कि उनका घर हमीशा सब के लिए खुला रहता है। चाहे नया लेखक हो, संघर्ष कर
02:56रहा काला का आरिया कोई पुराना दोस है। वो मानते हैं कि �
02:59इंसान के असली पहचान उसके वेवहार से होती है ना कि उसके नाम या शोहरत से। इतनी सफलता के बावजूद
03:06वो बहुत सादगी से रहते हैं। घर में कई कारे होने के बाद भी उन्हें कई बार आटो रिक्षा से
03:11सफर करते देखा गया। बानरा में अपने घर के सामने
03:15उन्हें सौस ज्यादा पेड लगाए और सालों तक उनकी देख़ाल भी की है। बॉलिवुड में लोग उनको काफी प्यार करते
03:21हैं। उनके बेटे सलमान खान के साथ काफी इवेंट्स में उन्हें देखा गया। और एक छूटे कलाकार से लेकर बड़ी
03:27हस्ती बनने की ये
03:45एक बड़ा नाम बनने तक का ये सफर क्यासा लगा। हमें कॉमें सेक्शन में जबूर बताएं।
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