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The Last Ritual–Aghori ki Adhoori Sadhna
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00:06भारत के वारानसी से करीब 60 किलोमीटर दूर एक छोटा सा गाव है सोनपुर घाट
00:12कहते हैं यहां की मिट्टी में अभी भी तंत्रमंत्र की गंध है
00:17रात होते ही इस घाट की हवा ठंडी नहीं भारी हो जाती है
00:22जैसे कोई अद्रिश्य उपस्थिती हर सांस को देख रही हो
00:26लोग कहते हैं यह जगे सिर्फ पूजा के लिए नहीं
00:30बलकि अंतिम साधना के लिए भी इस्तिमाल होती थी
00:33और वहां का सबसे डरावना नाम था आगोरी त्रिलोचननाथ
00:39वो इनसान नहीं एक रहस्य था
00:42उसकी साधना थी मृत आत्मा को पुनरजन देना
00:47पर कहते हैं वो साधना अधूरी रह गई
00:50और अब हर अमावस्या की रात कोई न कोई उसकी साधना
00:55पूरी करने की कोशिश करता है और गायब हो जाता है
00:58तीस साल कारव महरा और सत्ताई साल का निशा सेन
01:03दो डॉक्यमेंटरी फिल्म मेकर
01:05जो भारत की हिडन फेट्स सीरीज बना रहे थे
01:08उनका अगला एपिसोड था
01:10दी फगोर्टन अगोरी और सोनेपूर
01:13गाव पहुँचने पर उन्हें हर चेहरा चुप लगा
01:17बूढे लोक सिर जुका लेते
01:18बच्चे भाग जाते
01:20और मंदिर का पुजारी भी बोला
01:22मत जाओ बेटा
01:24वहाँ त्रिलोचन नाद का श्राप है
01:26आरव हस पड़ा
01:28पंडित जी हम बस शूट करेंगे
01:31कोई साधना थोड़ी करने जा रहे है
01:34निशा ने धीमी आवाज में कहा
01:36मुझे ये जगे पसंद नहीं है
01:38आरव
01:39पर आरव के कैमरे का लेंज घूम चुका था
01:43और अब उसकी यात्रा शुरू हो चुकी थी
01:46शाम का वक्त था
01:48सूरज डूपते ही गंगा किनारे की हवा में
01:51अजीब ठंड उतर आई
01:52घाट के किनारे पर एक टूटा हुआ शिवलिंग
01:56बिखरी हुई हड्डिया और राख के धेर पड़े थे
02:00निशा ने फुसफुसा कर कहा
02:02ये राख
02:04इंसानों की लगती है
02:05आरव कैमरा ओन करके बोला
02:08परफेक्ट फ्रेम
02:09रॉज एंड अनटच्च्ट
02:11लेकिन तभी कैमरे की स्क्रीन पर
02:13हलकी स्टाटिक आई
02:15जैसे किसी ने लेंज के सामने से
02:17गुजर कर स्क्रीन को छुआ हो
02:19निशा चौंकी
02:21कोई आया था क्या
02:23आरव बोला
02:24नहीं शायद हवा थी
02:26पर उसक्षन
02:28गंगा की लहरें एकदम शान्थ हो गई
02:31जैसे किसी ने उनका दिल
02:33रोक दिया हो
02:34रात में आरव और निशा
02:37ने गाव के बुजर्ग महादेव बाबा
02:39से बादचीत की
02:41बाबा ने कहा
02:43त्रिलोचनात कोई साधारन आगोरी नहीं था
02:45वो तंत्र के पांचवे
02:47चरण पर पहुँचा था
02:48जहां मनुष्य और मृत्यू के बीच की
02:51रेखा मिट जाती है
02:52उसकी साधना थी
02:54प्रेट साधना
02:55कहते हैं
02:57उसने अपनी शक्ती बढ़ाने के लिए
02:59अपने ही शिश्य की बली दे दी थी
03:01उसके बाद
03:03वो रात
03:04जब उसने अंतिम साधना शुरू की
03:07पूरा घाट आग की लप्टों में घिर गया
03:10अगली सुबह बस राख मिली
03:12और एक अज़्जला शव
03:14जो न त्रिलोचन था
03:16न उसका शिश्य
03:17निशा ने पूछा
03:18तो क्या उसकी आत्मा अभी भी
03:21बाबा ने उसकी बाद बीच में काटी
03:24हां
03:25वो अधूरी साधना
03:27आज भी पूरी होने का
03:28इंतजार कर रही है
03:30अमावस्या की रात थी
03:32गाव वाले अपने घरों के दर्वाजे
03:34बंद कर चुके थे
03:35आरव और निशा कैमरा लेकर घाट पर पहुँचे
03:39वो जगे अब पूरी तरह
03:41अंधेरे में थी
03:42बस दीपक की मरी हुई
03:44लौ टिम्टिमा रही थी
03:46आरव ने टॉर्च ओन की
03:48फर्ष पर एक पुराना यंत्र बना था
03:51हड्डियों और सिंदूर से
03:53बीच में एक खोपड़ी रखी थी
03:56जिसके चारों और जलते दिये लगे थे
03:59निशा ने कापते हुए कहा
04:00ये क्या है आरव बोला
04:03शायद किसी पुरानी साधना का चक्रन
04:05अचानक टॉर्च बुझ गई
04:07हवा में राख उड़ने लगी
04:10और एक धीमी मंत्रद्वनी गूंज उठी
04:13ओम कपालेनी स्वाहा
04:15ओम त्रिलोचन नमा
04:16निशा ने रिकॉर्डर चालू किया
04:19इस समय घाट पर कुछ
04:21अजीब मंत्रो चार सुनाई दे रहे हैं
04:23पर उसकी आवाज रिकॉर्ड नहीं हुई
04:25बलकि रिकॉर्डर से दूसरी आवाज आई
04:28तुम देर से आए
04:29पर समय अभी बाकी है
04:32आरव ने चारों और देखा
04:34कोई नहीं था
04:35लेकिन सामने की राख में हल चल हुई
04:38खोपड़ी धीरे धीरे घुमी
04:40और उसकी आखों के छेदों से धुआन निकलने लगा
04:43निशा चीखी
04:45आरव
04:46चलो यहां से
04:47पर आरव जैसे सम्मोहित हो गया था
04:50कैमरा
04:52चालू रखो
04:53उसकी आखों में अब डर नहीं था
04:55बस अजीब आकर्शन था
04:58अचानक आसमान में बिजली चमकी
05:01और आरव ने देखा
05:03उसके सामने राख के बीच
05:05कोई बैठा है
05:06सिर पर जटा
05:07गले में हड़ियों की माला
05:09और चहरे पर भसमकाचिन
05:11वो त्रिलोचन नात था
05:13या उसकी आत्मा का रूप
05:16उसने कहा
05:17मैंने साधना पूरी नहीं की थी
05:20अब तुम करोगे
05:21निशा ने उसे खींचने की कोशिश की
05:24पर आरव ने उसे धक्का दे दिया
05:27वो मंत्र पढ़ने लगा
05:30ओम्शमशान वासिने नमा
05:31ओ मृत संजीविनी स्वाहा
05:33निशा ने रोते हुए कहा
05:35आरव ये तुम नहीं हो
05:38पर उसकी आखें
05:39अब जलने लगी थी
05:41लाल अगनी जैसी
05:43आरव ने राख में से एक खोपड़ी उठाई
05:46और अपने सिर पर रख ली
05:47शन भर में पूरा माहौल
05:50चीखों से भर गया
05:51दिये बुझ गए
05:52कैमरा गिर पड़ा
05:54निशा किसी तरह भागी
05:56घाट के किनारे तक पहुँचते ही
05:58उसने पीछे मुड कर देखा
06:01पूरा शेत्र अब लाल रोशनी में डूबा था
06:04जैसे कोई अगनी कुन जल रहा हो
06:06उसने जीब तक पहुचने की कोशिश की
06:09पर टायर खुद बखुद घूमने लगे
06:12वो गिर पड़ी और जब उठी आरव सामने था
06:16पर उसका चहरा अब आरव का नहीं था
06:19वो शान्सवर में बोला
06:21अब मैं पूर्ण हूँ
06:25निशा चीकते हुए बेहोश हो गई
06:27अगली सुबह जब गाव वाले पहुचे
06:30घाट खाली था
06:31बस राख में कैमरा पड़ा था
06:34और उसके अंदर एक नई रिकॉर्डिंग थी
06:37जिसमें आरव की आवाज कह रही थी
06:40अंतिम साधना पूरी हो चुकी है
06:42पुलिस ने कई हफ़तों तक खोज की
06:45पर ना आरव मिला ना निशा
06:48गाव वालों ने कहा
06:49अब घाट पर कोई नहीं जाता
06:52कभी कभी रात में लाल रोशनी दिखती है
06:55और कोई गहरी आवाज गूंचती है
06:57मृत्योर्मा अमृत गमय
06:59कहते हैं
07:01जो भी उस आवाज का पीछा करता है
07:03वो अगला साधक
07:05बन जाता है
07:06कभी कभी कुछ साधनाय پूरी नहीं होती
07:10क्योंकि उन्हें
07:11पूरा करने वाला मर नहीं पाता
07:13वो अधूरा रह जाता है
07:15और अधूरी आत्माय
07:16हमेशा तलाश में रहती है
07:18किसी और शरीर की, किसी और समय की
07:22कांच महल के शीशों में आत्मा कैद थी
07:25पर सोनपुर घाट पर आत्मा आजाद थी
07:29जो हर अमावस्या को किसी न किसी आरव का इंतजार करती है
07:34अगर इस कहानी ने आपकी रूह तक सहरन पहुँचा दी हो
07:37तो रात की खामोशी को फॉलो कीजिए
07:40क्योंकि अगली कहानी शायद आपकी आत्मा के आसपास घूम रही हो
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