00:02वो 35 साल का बाप था, जेब में सिर्फ 1200 रुपए थे, और घर में दो बच्चे इसके इंतिजार में,
00:09बढ़ा बेटा स्कूल की फीस पूछ रहा था, छूटी बेटी नई किताबों की जिद कर रही थी, और वो मुस्करा
00:15कर कह रहा था, इंशाओ अल्ला सब हो जाएगा,
00:18मगर इसे मालूम था, सब खुद नहीं होगा, इसे करना पड़ेगा, वो सुबह 6 बजे घर से निकलता, दो नौकरियां
00:26करता, ठकन को चाय के कप में घोल कर पी जाता, कई बार दिल चाहता हार मान ले, मगर फिर
00:32बच्चों की मुस्कराहत याद आती, और वो फिर खड़ा हो ज
00:36जाता, साल गुजरे, मुश्किले कम न हुई, मगर उसकी हिम्मत बड़ी हो गई, आज इसका बेटा कालिज में है, बेटी
00:43अपनी कलास में टाप करती है, और वो कहता है, बाप ठकता जरूर है, मगर रुकता नहीं, क्योंकि इसके खाब
00:51अब सिर्फ उसके नहीं होते, अगर
01:02नहीं हार ना माने, उनके खाब अपनी महनत से हकीकत बनाएं।
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