00:07कुछ कहानिया बस सुनने के लिए होती है और कुछ कहानिया ऐसी होती है जो सुनकर नींद उड़ जाए आज
00:16जो मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ
00:18वो एक ऐसे इनसान की कहानी है जिसकी जिन्दगी की सबसे डरावनी रात एक सफर बन गई मुंबई एक शहर
00:28जो कभी नहीं सोता लेकिन जब बारिश होती है तो ये शहर भी चुप हो जाता है
00:34साल 2022 जुलाई का महिना रात के करीब दो बजे का वक्त था संतोश एक आटो ड्राइवर जो रोज रात
00:45दस बजे से सुबह चार बजे तक सवारी करता था
00:48उस रात दादर स्टेशन के पास वो अपनी आटो खड़ी किये सवारी का इंतजार कर रहा था
00:56तभी एक औरत आती है सफेद साड़ी में भीगी हुई हाथ में एक पुरानी सी थैली औरत धीरे से कहती
01:06है
01:06भाया मीरा रोज चलोगे संतोष थोड़ा हिचका रात दो बजे मीरा रोज जाना वो भी बारिश में लेकिन फिर उसने
01:16सोचा चार सो रुपे तो बनते हैं
01:19संतोष कहते हैं हाँ बहन जी बैट चाहिए रास्ता सुनसान था चारों और सिर्फ पेड
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