00:00बीस साल की परवरिश, हजारों सुनहरे सपने और माबाप की उम्र भर की जमापूंजी को एक तीसरी मनजिल की खिड़की
00:07से नीचे गिरने में शायद चंद सेकंड ही लगे होंगे
00:11दिल्ली के फर्ष बाजार इलाके के होटल संतोष रजडिनसी से नीचे गिरती उस 20 साल की यूवती का वाइरल वीडियो
00:19सिर्फ एक हादसा नहीं है
00:20बलकि ये उस खूखली मानसिक्ता पर एक करारा तमाचा है जिसने हमारे आज के युवाओं को भावनाओं का गुलाम बना
00:28दिया है
00:29बुलंद शहर के अपने बॉइफरेंट के साथ कमरे में हुई एक मामूली पहस के बाद उस लड़की का खिड़की पर
00:34बैठना, नीचे जहांकना और फिर खुद को मौत के हवाले कर देना
00:38ये सोचने पर मजबूर करता है कि क्या आज के दौर में प्यार इतना सस्ता हो गया है कि इसके
00:45लिए जिंदगी की कोई कीमत ही नहीं बची
00:46ये घटना कीवल एक पुलिस केस नहीं है बलकि ये उस गहरे मानसिक संकट का एक्स्प्लेनर है जिसे आज की
00:54युवापीड़ी कुजर रही है
00:55वालेंटाइन डे के आसपास जब पूरा बाजार और सोशल मीडिया प्यार का चश्ट मनाने का ढोंकर होता है
01:02तब अकेले पन या रिष्टों में तनाव से जूज रहे युवाओं पर एक अत्रिश दबाव बढ़ जाता है
01:08उन्हें लगता है कि अगर उनका पार्टनर उनसे सहमत नहीं है या रिष्टा ठीक नहीं चल रहा तो उनकी दुनिया
01:14ही खत्म हो गई है
01:15दिल्ली की इस युवती ने आवेश में आकर जो कदम उठाया वो इंपल्स कंट्रोल यानि अपने कुस्से और जजबातों पर
01:22काबू ना रख पाने की सबसे डरावनी मिसाल है
01:26गुस्सा एक ऐसी आग है जो चंद मिनटों के लिए चलती है लेकिन अगर उस वक्त खुद को संभाल न
01:31लिया जाये तो वो पूरी जिन्दगी को राख कर देती है
01:35युवाओं को ये समझना होगा कि जिसे वे इश्क समझ कर जान देने पर आमादा हैं वो अक्सर महज एक
01:41अस्थाई आकर्शन या इगो का टकराव होता है
01:44क्या एक 20-22 साल के लड़के या लड़की के दो बातें आपके उस माभाप के प्यार से बढ़ी हो
01:50गई जिन्होंने आपको चलना सिखाया
01:52जिस वक्त वो यूवती होटल की खिड़की से कूद रही थी उसने शायद एक बार भी उन बूढ़ी आँखों के
01:58बारे में नहीं सोचा होगा जो घर पर उसकी सलामती की राह देख रही होंगी
02:02रिष्टू में अनबन होना जगड़े होना और यहां तक की ब्रेक अप होना भी जिन्दगी का एक हिस्सा है लेकिन
02:08अपनी जान दाओं पर लगा देना कायरता की पराकाश्था है
02:12यह कोई फिल्मी सीम नहीं है जा हिरोईन को बचाने कोई आएगा असल जिन्दगी में जमीन पर गिरते ही सिर्फ
02:18हड्डिया नहीं तूटती बलकि एक पूरा परिवार बिखर जाता है
02:21सोशल मीडिया की इस बनावटी दुनिया ने युवाओं को परफिक्ट लाइफ के ब्रहम में डाल दिया है
02:27वे दूसरों की चमक दमक वाली फोटो देखकर अपनी साधारन जिन्दगी को बोच समझने लगते हैं
02:32होटल के कमरों में बंद होकर बहस करना और फिर खिड़कियों से च्छलांग लगाना
02:37ये बताता है कि आज की युवाओं में धैरे पूरी तरह खत्म हो चुका है
02:41वे ना सुनने की हिम्मत नहीं रखते
02:43उन्हें लगता है कि अगर उनकी मर्जी का नहीं हुआ तो जीवन बेकार है
02:47लेकिन हकीकत ये है कि असली बहादरी लड़ने या कूदने में नहीं
02:51बलकि मुश्किल वक्त में खुद को थामे रखने में है
02:54अगर उस यूवती ने कूदने से पहले सिर्फ पांच मिनट गहरी सांसली होती
02:59या अपने परिवार के किसी सदस्य का चेहरा याद किया होता
03:02तो शायद आज वो अस्पताल में मौच से जंग ना लड़ रही होती
03:06जिन्दगी किसी एक इनसान के आने या जाने से खत नहीं होती
03:10आज आप जिस इनसान के लिए जान दे रहे हैं यकीन मानिए
03:13कुछ सालों बाद आपको उसका नाम तक याद रखने में दिल्चस्पी नहीं होगी
03:17समय हर घाव को भर देता है
03:19बशर्ते आप समय को मौका तो दें
03:21युवाओं को चाहिए कि वे अपनी उर्जा करियर बनाने
03:24अपनी पहचान बनाने और अपने व्यक्तित्त को निखारने में लगाए
03:28किसी एक दिन या एक रिष्टे को अपने पूरी जिन्दगी का पैमाना ना बनाए
03:32रिष्टों में उता चड़ावाएंगे, लोग छूड कर जाएंगे
03:35दिल भी तूटेगा
03:37लेकिन इसका मतलब ये कताई नहीं है कि आप अपनी अनमोल सिंदगी का गला घोट दे
03:41दिल्ली की इस घटना से सबक लेने की ज़रूरत है
03:44अगर कभी मन में ऐसे विचार आएं तो याद रखें कि आपके पास बात करने के लिए दोस्त हैं, परिवार
03:50है और पूरी दुनिया है
03:52कमरे में बंद होकर घुटने के बजाए बाहर की खुली हवा में सांस लें
03:56खुद से प्यार करना सीखें, क्योंकि जो खुद की इज़त नहीं कर सकता, वो दूसरों से प्यार क्यों उमीद कैसे
04:02कर सकता है
04:03जिन्दगी एक मौका है ऐसे जीने का, इसे किसी होटल की खिड़की से फेक देने का नहीं
04:07आपकी जान की कीमत किसी भी बहस, किसी भी रिष्टे और किसी भी वैलेंटाइन डे से कहीं जादा बड़ी है
04:14संभल जाएए, क्योंकि आपके पीछे खड़ा आपका परिवार आपको मरा हुआ नहीं, बलकि हर मुश्किल से लड़कर जीता हुआ देखना
04:22चाहता है
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