00:00बारबंकी जिला मुख्याले से तक्रीबन 40 किलो मीटर दूर रामनगर तहसील का ये है महादेवा धाम। यहां इस्थित पौराणिक लोधेश्वर
00:08मंदीर बहुत ही प्रसिद्ध है। यहां हारवर्ष सावन मास और फागुन मास में शिवभक्तों का तांता लगा रहता है।
00:16उराई, जालाओन, कालपी, मैनपूरी, इटावा, कानपूर, उन्नाव ही नहीं। मध्ध प्रदेश तक से शिवभक्त इस मंदिर में जलाभिशेक करने आते
00:25हैं। आस्था और शद्धा ऐसी कि महाशिवरात्री के मौके पर तो यहां लाथों कामड ये कामड लेकर पहुं
01:01अच्छा से लब्रेश शिवभक्तों का कहना है कि लोधेश्वर भगवान की महिमा ही है जो उन्हें इतनी दूर से खींच
01:09लाती है। और वे बिना थके पैदल ही कामड लेकर यहां तक पहुंच जाते हैं।
01:15अजय बाई कामर लाएं हैं यहां पांच बार चड़ा गए हैं।
01:19अच्छा अच्छा क्या सूच के आते हैं।
01:21हम लोग यह सूच के आते हैं कि लोधेश्र बगवान के दर्शन करेंगे जाके लिए ठीक है।
01:25जो मनों कामन हो मांगते हैं आकर वो पूर हो जाती है।
01:44जो मनमा इच्छा करें वह पूरी जिरूज होती है।
01:48अवस्त कम्रा में 20 साल हुए।
01:49वहाँ जिन परिदा कामर लाओ आत तरफ कोई बात खाली नहीं गए।
01:53जिकार विश्वास ना हो तो उन करिके अजबाइक देख लिए बाम हो ले।
02:14वहाँ परिद्या पाठ करने आये हैं। उनको उधर बिला थी।
02:19कि उनकी देखते देखते उनकी पिताजी जनुए।
02:23तो जब उन्होंने लोदेश्वार का पूजन किया तो उनकी उदर दिला साम।
02:28द्वापर में पांडों उनका अध्याकवास ने वहां पे एक साल कसमेड़ाया।
02:41यदी किया और लोदेश्वत्ता पूजन किया।
02:44समय पिता कल्यूगाया।
02:47कल्यूगी में एक ब्रहमर के घर एक लोदी माता रही।
02:53कि वह जो प्रहमर के वहां गवए थी उनको चलाना थी।
03:00और घरवान का बजन करती।
03:04तो जो उनके पास गवए थी उन गवएं थी उन गवववें से एक गाय का दोठ वो गाय को जोद
03:11भगवान से वह चबहाती दोश्वत्ता उसको गढ़्धे में दिखते भगवान
03:23कि जिए की बाहर भी आते हैं, तो ऐसे में तो काफी अंतरी होती है, जिए उनको प्रसाद दे जाते
03:30हैं, और भी तौपी है, तो खरिज़री और फरी फरुक होता है, अच्छा परसाद।
03:35तो ऐसे मंदिर महादेवा, वहाँ पे अभी शिर्दातिर के उपलक्ष में मेला चल रहा है, क्योंकि आगामी पर्दातारिक तक चले
03:43ना, इसमें काभी बड़ी समझा में लोग अलंदी जन्वतों से भी आ रहे हैं, तो उसकी काउन लेके पैदल आ
03:49रहे हैं, इसे भी रश्
04:04में जो फालगुनी मिला आपका लगता है, यहां पर महा शिर्कातरी के उसरत है, बड़ी दूर-दूर से कावड लेकर
04:11सुधान लेकर आपर आते हैं, बड़ा इसका महत्व है, अगर पाचीन काल से सला आते हैं, तो इसके लिए आज
04:17हम पर ब्रीफिंग की बैठे तकी में, म
04:20अभी अधिकारियों से पाचीत करें, और सारी विवस्ताइं ठीक रहें, इसके लिए नर्देश जिये गया है, सभी अधिकारियों टेयारे भी
04:26की है, दो तीन बार इसका रेरिक्षन दिखिया जा चुका है, और काफी बहतर विवस्ताइं है, तालाब का पाने भी
04:33काफी साह
04:34पूरी चार चोबन है, इसले भी भागने भी सेफ्टी के लिए अपनी सारी विस्ताइं कि मुझे वमेदे के ब्रूबत बहुत
04:40अच्छे से मिला खपन है, बारबलती सही जिए भारत के लिए अलीम शीर,
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