00:00घने जंगल के बीचो बीच एक छोटा सा लकडी का घर था। इसी घर में दो बहने रहती थी। उनकी दुनिया बजाहिर छोटी थी मगर जिम्मेदारियां बहुत बड़ी थी। उनके वालिद बच्पन ही में दुनिया से रुखसत हो चुके थे और चन्द माह पहले उनकी मा
00:30और यही उनकी जिन्दगी की वाहिद हकीकत। महनत सक्त थी मगर वो सबर से काम ले थी क्योंकि उनके पास और कोई रास्ता नहीं था। एक दिन लकडियां काटते हुए वो दरिया के किनारे जा पहुँची। वहां पानी के साथ बहती हुई एक पुरानी किताब उनकी न�
01:00इस जुमले का मतलब पूरी तरह ना समझ सकी। बस उन्हें इतना महसूस हुआ कि ये किताब हर खौाहिश पूरी कर सकती है। इस दिन दोनों बहने हद से जादा ठकी हुई थी। बाजों में दर्द था और कदम उठाना भी मुश्किल लग रहा था। कुछ देर की खामो�
01:30जब तक लकडिया नहीं काटेंगे और बेचेंगे चूला कैसे जलेगा। तुम जानती हो हमारे पास फुजूल बातों का वक्त नहीं। पहली बहन चंद लम्हें खामोश रही फिर धीरे से बोली। बस एक बार ही तो कह रही हूँ अगर कुछ ना हुआ तो फौरन काम श�
02:00हाँ बिलकुल हम रोज आधा दिन दरख्त काटने में लगा देती हैं और फिर भारी लकडियां उठाकर दूर दूर के गाउं जाना भी बहुत मुश्किल होता है। पहली बहन ने अपने ठके हुए हाथों को देखते हुए कहा अगर हमें दरख्त काटनी की मुशकत ना करन
02:30से कहा तो फिर हम यही ख्वाहिश करते हैं कि हमें कटी हुई लकडियां मिल जाएं। चंद ही लमहों बाद उनके सामने लकडियों का एक बड़ा धेर मौजूद था। वो दोनों हैरत से साकित रह गई। खौफ, खुशी और हैरानी एक साथ उनके दिल में उमड़ाए। �
03:00तरफ रवाना हो गई। आज दरखत काटने की जरूरत नहीं पड़ी थी, इसलिए उनके पास आम दिनों से कहीं जादा वक्त था। आम तोर पर वो एक दिन में सिर्फ दो गाउं तक जा पाती थी, मगर इस दिन वक्त बचने की वज़ा से वो पांच मुखतलिफ गाउं मे
03:30इतनी ठकन थी कि खाना पकाने का ख्याल भी मुश्किल लग रहा था। एक बहन बोली, काश बना बनाया खाना मिल जाए। दूसरी ने ठकी आवाज में कहा, हाँ, आज हिम्मत नहीं रही। अचानक कमरे में खुश्पू फैल गई और उनके सामने गरम खाना आमोजूद ह�
04:00जिन्दगी आसान थी और वो सुस्त होती चली गई। खाना सफाई सब कुछ ख्याहिश से होने लगा।
04:30असम और आसों के साथ उन्होंने किताब को देखा। हमने महनत छोड़ दी, इसी ने हमें तबाह किया। पच्चतावे के आलम में वो दरिया के किनारे पहुँची और किताब पानी में फेंक दी। किताब किरते ही सब कुछ बदल गया। वो अपनी असल उम्र में वापस आ
05:00महनत ही असल सुकून है। और अगर आपको ये कहानी पसंद आई हो तो वीडियो को लाइक करें, चैनल को सब्सक्राइब करें और कॉमें बताएं कि आपको ये कहानी कैसी लगी। आपके एक लाइक और सब्सक्राइब से हमें मजीद दिल्चस्प और सबक आमोस कहानिया ब