00:00सनातन धर्मावलंबी ही इस बात की गोछना भी करता है कि अयम निज परोवेती गणना लगुचेत साम उदार चरिता नाम तो वा सुधेव कुटुम्वकम यानि यह मेरा है यह तेरा है यह तो संगुचित बुद्धि का ही ब्यक्ति करता है
00:23ओदार चरितर वाले लोगों के लिए तो पुरी दुनिया ही एक परिवार है एक कुटुम्व है और यह कुटुम्वकम का यह भाव यह सनातन धर्मावलंब्यों के संकल्प का ही नहीं उनके जीवन का ब्रत है
00:42हर एक अपने जीवन में रखता है और मनुष्य तो क्या हमने तो चराचर जगत के कल्याण की बात की है
00:52आप देखें न सनातन धर्मावलंब्यों के दारता आप देखें हमारे यहां कहते हैं पहला ग्रास गौ माता का और अंतिम ग्रास जो होता है न वह कुट्टे का
01:10यानि गाय को भी हमने अपने हिस्से का दिया है और पुट्टे को भी एक हिस्सा उसमें प्रदान किया है यह है समद्रिष्टि
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