00:00झाल झाल
00:30झाल झाल
01:00पद्दू कहा है?
01:06पता नहीं, यहीं तो थी अभी
01:08पद्दू को देखा क्या?
01:11नहीं, मैंने तो नहीं देखा
01:12शादी में जरूर आना
01:16ओके, बाई
01:17सुनना, पद्दू दिखाईनी दे रही है
01:20कहां गई होगी?
01:21यहीं कई होगी, क्यों टेंचन ले रही हो?
01:22मैं देख लेता हूँ, जाओ, आ रही हूँ
01:24पद्दू, यहीं क्या कर रही हो?
01:38क्या हुआ? तुम रो क्यों रही हो?
01:41मुझसे नहीं हो रहा है वासू, तुम्हारा मुझसे इस तरह दूर जाना यह मुझसे
01:46बर्दाश नहीं हो रहा, मुझसे तुम बहुत पसंद हो, सोचा था कि तुम जैसे ही आओगे, वैसे ही तुम्हें अपने मन की बात बता दूँगी
01:54लेकिन मेरे बताने से पहले तुमने अपने मन की बात घर वालों को बता दी
02:01मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, बहुत सपने देखें, तुमसे शादी करके इसी घर में रहने के
02:12लेकिन इस घर में तो मेरी जगा श्री को तयार किया जा रहा है, लग रहा है जैसे उसने मेरी जगा चीनी है
02:18शादी का मंड़ तयार करने पर, होल तयार करने पर, इस शादी से रिलेटिट कोई भी काम करने पर ऐसा लग रहा है कि वो मेरे लिए होना चाहिए था
02:25बच्पन से ही नानी मचसे ये बात कहती आ रही थी कि वासू ही तुम्हारा पती बनने वाला है, एक बार तुमसे भी कह देती कि पत्मावती तुम्हारी पत्नी बनेगी
02:36तो शाद तुम भी मुझे उस नजर से देखते हैं, है ना वासू
02:43लेकिन मैंने तुम्हें हमेशा एक दोस्त ही माना है, मैं श्री से प्यार ना भी करता, तो भी मैं तुमसे यही कहता है
02:56तुम मेरे बारे में सब जानती हो, तुम मुझे समझती हो, फिर भी तुम ऐसे
03:02समझती हूं वासू इसलिए इसलिए बात किसी को नहीं बताई मैंने
03:07लिके ना जब तुमने पूछा तो खुद को रोक नहीं पाई और सब कह दिया
03:14एक बात तो सच है वासू अपनों से कभी कुछ नहीं चुपाना चाहिए
03:19सही वकपर ना बताकर बाद में बताएं तो खुद को कभी दुख के सिवाए और कुछ नहीं मिलता है
03:26ठीक है तुम वो सब देख लो ना मामा जी सारा इंतिजाम कर दिया दो सो लोग खाना एक साथ खा सकते हैं
03:49ठीक है बस यह देख लो कि जो लोग आया है वो किसी को कोई परिशानी नहीं पॉली चाहिए
03:53मिनिस्टर के पीए का बार बार फोन आ रहा है अपोइमेंट मैंने मिनिस्टर से बात करके प्रोग्राम पोस्ट पॉन कर दिया उन्हें प्रोजेक्ट रिपोर्ट चाहिए मेल कर दिया जिए अप यहां कर बैठिये जी ऐसी ट्रेडिशनल शादी देखकर मुझे बहुत दि
04:23कर दो
04:53कर दा कर दा कि अभर नदी जी कब से दूनें वो भूला रहे हैं काफिए यह देर होगे इसने कर चल्द लेक्ट चल्द हैं अज मेरे यार की शादी है
05:17अच्छा सुन जब तु बड़ा हो जाएगा तेरी शादी भी ऐसे ही करवाऊगी
05:47जब तु ने कहा कि श्री से तुम्हें शादी करनी है पता है घर के सारे लोग क्यों मानगे क्योंकि सब को तुम परबारो साथ
05:59बेटा इसको नीचे रख दो भगो अर्यमा से विता पुरंदेल मह्यां त्वादो कार्य पत्याय दिवा बेटा अब ये अक्षत और फूल वहां चड़ा दो अक्षतम फुस्पम समर्पया में
06:18शादी का मंडप मंदिर जैसा होता है यह अश्टदिक पालक सबता रिशी सब होते हैं
06:33एक बात तो सच है वासू अपनों से कभी कुछ नहीं चुपाना चाहिए सही वकपर ना बता कर बाद में बताए तो खुद को कभी दुख के सिवाय और कुछ नहीं मिलता है
06:48कि यह बात हम दोनों के बीच ही रहेंगी जब तुने कहा कि श्री से तुम्हें शादी करनी है पता है घर के सारी लोग क्यों मान गए क्योंकि सबको तुम पर बारुसा है
06:59अपनों से कभी कुछ नहीं चुपाना चाहिए सही वकपर ना बताकर बाद में बताए तो खुद को कभी दुख के सिवाय और कुछ नहीं मिलता है
07:10क्या हूँ वासू ऐसे शादी के मंदब से उठकर नहीं जाते बैठ जाओ वासू खड़े क्यों हो आप से बात करनी है
07:22हम शादी के बात बात करेंगे ना बैठकर पुजा करो नहीं पापा अभी बात करनी है
07:31अगर अभी बात नहीं की
07:35तो आपका और श्री का गुन्हेगार बन कर जीना होगा
07:39सुरी ससुर्जे
07:52आपसे वादा किया था कि ये बात किसी को नहीं बताऊंगा
07:55लेकिन मुझसे अब रहा नहीं जाता है
07:57वहाँ बैठ कर कुछ नहीं कर पा रहा हूँ
08:01कैसा वादा किया है बिटा
08:03दादी माँ शादी से पहले इस श्री को तलाग देने वाले
08:15कुछ डिवोस पेपर्स पर
08:17इन्होंने साइन करवा ले
08:27शादी से पहले तलाग कैसा?
08:36उन्हें हमारे प्यार पर भरोसा नहीं है
08:38या इस शादी पर भरोसा नहीं है
08:41मैं नहीं जानता
08:42उन्होंने कहा कि अगर शादी के लिए हाँ कहनी है
08:46तो मुझे दस्तकत करने होंगे
08:48तो मैंने कर दिया
08:51यह क्या बात होई?
08:55हर माता पिटा चाहते हैं
08:56कि उनके बच्चे शादी के बाद मिलकर रहे
08:58और आप हैं कि शादी के पहले ही
09:01गल्ति उनकी नहीं है दादी
09:03मेरी है
09:04हमारे प्यार के बारे में सबको बताने वाला मैं इस अग्रीमेंट के बारे में किसी को नहीं बता पाया श्री सौरी
09:18बचपन में बुआ की शादी में पंडिजी ने मंत्र पढ़ते हुए मुझे उनका मतलब समझाया
09:29जब तुम्हारे सिर पर जीरा और गुड लगाते हैं तब द्रुवन ते राजा वरुनो द्रुवन देवो ब्रहस्पति ही द्रुवन ता इंद्रा इश्चाद दहितो राश्ट्रन धार यताम द्रुवक ऐसा कहते हैं मतलब
09:50अश्टद इकबालक को साक्षी मान कर वादा करना होगा कि हम दोनों साथ रहेंगे लेकिन जो कागजाद हमें अलग कहेंगे उन पर दस्थकत करके मैं वहाँ बैठकर ये वादा कैसे कर सकता हूं श्री
10:04कन्यादान करते वक्त धर्मेचा, अर्थेचा, कामेचा, मोक्षेचा, नातीचरितव्य ऐसा कहते हैं
10:21मतलब धर्म, अर्थ, काम में मैं तुम्हें कभी भी धोका नहीं दूँगा और इसके बाद नादचरामी कहते हैं
10:29इसका मतलब है कि मुझे ये मन्जूर है, तलाक के कागजात पर दस्थकत करके दोखा देने वाला वहाँ बैठकर नादचरामी कहसे कह सकता है
10:38तुम्हारे गले में मंगल सूत्र डालते वक्त, मांगल यम तन तुना नेना, मम जीवन हे तुना, कंठे बदनाम सुमगे, तुम जीवम सरदाम सुभम, ऐसा कहते हैं
10:52मतलब मेरे जिन्दगी का कारण इस सूत्र से मंगल नाम का रिष्टा तुम्हारे गले में बांध रहा हूं
10:59खबका उस रिष्टे को तोड़ने के लिए दस्थकत करने वाला वहाँ बैठकर अभी वो मंत्र पढ़ सकता है श्री
11:07पहली गांट बांधने के बाद पूशा द्वेत नयत हस्ता ग्रुह अश्विनो द्रवप्रवाह ताम्र देना गुमान कचा ग्रुह पत्नी यथा सोवसी निवात बृदतम अवदाब्या
11:27मतलब घर की मालकिन की तरह हुक्म चलाकर तुम हमें सुधारने के लिए हमारे घर आजाओ ये होता है
11:34लेकिन तुम्हें अपने घर वापस भेजने वाले कागजात पर दस्तकत करने वाला तुम्हें घर बुलाने के लिए वहाँ बैठकर मंत्र कैसे पढ़ सकता है श्री कैसे पढ़ सकता है
11:49ऐसे एक या दो नहीं
11:55वहां बैठकर जो हर एक मंत्र में बढ़ूंगा उसका मतलब है
11:59जो हर एक काम में करूंगा उसकी पवित्रता है
12:04इसलिए मंटप में बैठकर इतने जूटे वादे में नहीं कर सकता
12:08यह मुझसे नहीं हो पाएगा
12:11मुझसे नहीं हो रहा
12:12नहीं हो राश्री तुम हमेशा कहती थी न कि शादी का मतलब त्योहार होता है ऐसा त्योहार इतनी शर्तों पर इतनी गल्तियों के साथ नहीं होना चाहिए दादी
12:33नहीं मैंने गल्तिय किया मुझे माफ कर दो मुझे माफ कर दो
12:42वसू गल्ती मैंने किया तुम सॉरी मत कहो कवे इस एग्रिमेंट के बारे में गल्ती मैंने किया आप सबको मुझे माफ करना होगा
13:04हर बात को बिजनस की तरह देखने वाला मैं हमेशा एंट्री में ही एक्जिट के बारे में सोचता हूँ
13:09और मेरे लिए ये रिश्टा करने से पहले, यहाँ ये सब कुछ देखने से पहले तक
13:18शादी एक इविंट की तरह थी
13:22मतलब हमारे घर की शादी और किसी और की
13:26इसी सोच रखने वाले मुझको जब रस्मों में बुलाया जा रहा था तो मुझे हसी आ रही थी
13:35लेकिन यहाँ इतनी रस्मे होती है एक जन्नी होती है ये मुझे पता नहीं था
13:41सिर्फ महेंई बहुत लोग नहीं जानते
13:44जब हमारे घर में शादियां होती है तो इवेंट मैनेजर्स को सौप के हम निश्चिन्थ हो जाते हैं
13:50किसी ने हमें शादी में बुलाया है नहीं गए तो वो नाराज हो जाएंगे
13:53इसलिए वहाँ जाकर फामेलेटीज को कंप्लीट करना है इसलिए जाना पड़ेगा
13:57अटेंडेंस डलवाना ही पता था मुझे
14:00दुला दुलन के साथ घरवालों के साथ फोटो ले ली तो मतलब शादी में आ गए
14:06हम जैसे लोगों को तो दिल से आशिरवात देने का मतलब भी नहीं पता
14:15आशिरवात देने के लिए अक्षट देने पर उसे डाल कर हाथों पर लगी हल्दी को साफ करने के लिए टिश्यू ढूंडे वाले मुझ जैसे लोगों को
14:27यहां आने के बाद समझ वे आया
14:30कि उनक्षत के पीछे
14:35चावल गीले करके
14:39उन्हें सुखा कर
14:42हल्दी से रंगने का मतलब पिदा का प्यार है
14:45जिम्मेदारी है
14:48बेटी के साथ उसके रिष्टे का एहसास है
14:52परसुन जब यहां बहुत रिष्टेदार आ रहे थे तब
14:58समझ जी से मैंने पूछा तो उन्होंने मुझसे एक बात कही थी
15:01अगर सबको अपना माने तो रिष्टेदार बहुत ज्यादा हैं
15:05और अगर ना माने तो हम सब अकेले हैं
15:08तब मुझे समझ में आया
15:09कि मैंने अपने आपको सबसे कितना आलग कर रख़ा है
15:14शादी की एहमियत जाने बिना मैंने अपनी बड़ी बेटी के साथ कितना अन्याय किया
15:18जब अपनी बीवी से कहा
15:21लक्षमी हमें हजार करोड का प्रोजेक्ट मिला है
15:24तो अच्छा जी कंग्रेचुलेशन्स कहकर चली जाती
15:27कभी इसकी आँखों में इतनी खुशी नहीं देखी
15:30लेकिन जब मैंने उसके लिए मॉल में सिर्फ पांच मिनट दिया
15:34और एक आदर्श पती की तरह
15:36एक साड़ी खरीदने पर वो कितनी खुश हुई
15:39ये मैंने परसों देखा
15:40अपनी बेटी को कॉस्टली गिफ्ट देने के लिए
15:45मैंने कॉस्टली कार दिलवाई थी
15:48तब उसकी आँखों में उतना रियक्शन नहीं था
15:51लेकिन जब उसके लिए
15:53उस परदे पर मैं ओम लिख रहा था
15:58पीली मिट्टी से
15:59सिर्फ मिट्टी
16:00उससे पूजा करते समय जूसकी आँखों में चमक दिखी
16:04उसे मैं शब्दों में बया नहीं कर सकता
16:10एक बिजनस्मेन बनकर मैं जो सबके घरों में रहना चाहता था
16:15आज तक अपने ही घर में नहीं था
16:17लेकिन आप सब लोग सबके घरों में आऊऊंड़ों मैं सोचता था
16:30कि अपनी बेटी को धन दौलत पैसा देकर मैं अपनी निगाहों में एक महान पिता बन जाऊंगा
16:35मुझसे अपनी बेटी की शादी में सारी रस्में करवा कर
16:39पिता की जिम्मेदारियों के अहसास दिलवाने के लिए थैंक्यू वासू
16:44तुम हमेशा मुझसे कहते थे कि मैं दूसरों के पॉइंट आफ विउस से सोचता हूँ
16:49मुझे समझ में नहीं आता था
16:51पर इट्स जस्ट अपीस ओफ पेपर ये जानते हुए भी
16:55यहां मौझूद इन सब को बताने की जरूरत ना होने पर भी
16:59अपनों से सच नहीं छुपाना चाहिए
17:03ये सोच कर सब के सामने तुमने सौरी कहा न
17:05ये तुम्हारी संसकार की वज़े से है
17:09महान संसकार
17:11मेरे काफी सारे दोस्त मुझसे कहते थे
17:21कि तुम्हारी बेटी से शादी करने वाला खुश किस्मत है
17:25नहीं वज़ो मुझे लगता है कि तुम जैसा दमात पाना मेरी खुश किस्मत है
17:32आप सब को दुखी करने के लिए मैं माफी चाहता हूँ प्लीज फगिब में
17:37माफ कर दीजिए अरे हरे हमारे बीच माफी कैसी अब शादी की एहमियत पहले जैसे क्यों नहीं रही रिष्टों में से प्यार इस तरह दूर क्यों हो रहा है इस बात को जैसे आप समझ गए हैं वैसे सब समझ जाय तो अच्छा होगा
17:53जिस रिष्टे में कोई लगाव नहों उसे आगे बढ़ाना और परंपराओं को छोड़ कर आगे बढ़ते रहना सही नहीं है समझेजी चलो एक मिनट पापा उस मंडब में जाने से पहले इतनी बड़ी बात तुमसे चुपाने के लिए तुमसे माफी मांगना चाहता हू�
18:23जाज़ी चाहता हूँ
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