00:00प्रगति शील किसान ने खेती को नया रूप दिया है
00:112012 में उन्होंने रासाइनिक खेती पूरी तरह छोड़ दी और जैविक खेती अपनाई
00:17बीजामरित, जीवामरित, घरेलू कमपोस्ट और ड्रिप इरिगेशन जैसी प्राकृतिक तकनीकों से संजय यादव मिट्टी को जहर मुक्त रखते हैं
00:26उनका मकसद है कि फसलें न सिर्फ स्वस्थ हों बलकि बाजार में अच्छा दाम भी दें और किसान बिचॉलियों पर निर्भर न रहें
00:34फतेहपूर स्थित क्रिशी अनुसंधान केंद्र की एक कारेशाला से प्रेरित होकर संजय ने अनोखा प्रयोग किया
00:44उन्होंने सफेद, पीली, हलकी लाल और गहरी लाल रंग की मक्का की किस्मों को क्रोस पॉलिनेशन कर मल्टी कलर मक्का विक्सित की
00:53रंग बिरंगे दानों वाला या भुट्टा पोशक तत्वों से भरपूर है और बाजार में एक भुट्टा 200 रुपे तक बिका
01:01इस नई किस्म के लिए उन्होंने पेटेंट आवेदन भी कर दिया है
01:05ये सर हमने एक हम भतेपूर बीज के उसमें ट्रेनिंग में गए थे
01:15पर पर उस टाइम पर मक्कई का सीजन था तो उसका एक डेमोडेशन हमने किया और वह डेमोडेशन के अंदर हमने दो कलर अपने फ़र्म पे लगाए रेड वाइट और यलो तीन कलर उन्हीं को हम एक दूसरे को जिन्स क्रोस करवा करके हमने एक ही भुटे में ये पांस कलर
01:45संजे की महनत अब गाओं के अन्य किसानों के लिए प्रेड़ना बन गई है किसान उनके साथ जैविक खेती सीख रहे है
02:05हजे हमारे संजे जी है जो अच्छा काम करते हैं ये मक्का के लिए भी हमको सीखाय है और हम भी सिख जाएंगे भूरपर्ति सेशील काम करते हैं पर अच्छे एंसान है ये आपने अभी तक हिनसे क्या क्या चीज़े सीख ही है हम भी सीख एधे बग heavy दूआयों क्खेटी कर
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03:01उनकी ये कहानी सावित करती है कि छोटे गाउं से भी बड़े बदलाव संभव हैं
03:07जैविक खेती न सिर्फ मुनाफ़ा बढ़ाती है बलकि मिट्टी, परियावरन और किसानों के भविश्य को भी सुरक्षित बनाती है
03:15जैपुर से ETV भारत के लिए अश्विनी पारीक की रिपोर्ट
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